जयपुर, 16 फरवरी। प्रदेश के सामाजिक सेवा में अग्रणी संस्थान आसरा फाउंडेशन जयपुर की ओर से एक और बड़ी पहल करते हुए बाल संरक्षण कानून के प्रति जागरूकता का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
झोटवाड़ा ब्लॉक की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित किए गए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में बाल संरक्षण कानून के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बाल अधिकारों, संरक्षण संबंधी कानूनों तथा संवेदनशील मामलों में प्रभावी हस्तक्षेप की प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई।

आसरा फाउंडेशन और राज्य सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत आसरा फाउंडेशन, जयपुर की सचिव मंगला शर्मा के स्वागत उद्बोधन से हुई।
मंगला शर्मा ने संस्था द्वारा बाल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न कार्यों और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी साझा की।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जमीनी स्तर के प्रतिनिधि
मंगला शर्मा ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समाज के सबसे महत्वपूर्ण जमीनी स्तर के प्रतिनिधि हैं, जो बच्चों और परिवारों के साथ सीधे जुड़े रहते हैं, इसलिए बाल संरक्षण की जिम्मेदारी में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि धर्मिष्ठा सिकरवार, मुख्य परियोजना अधिकारी, झोटवाड़ा ब्लॉक ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का उपयोग बच्चों के हित में अधिक प्रभावी ढंग से करें।
उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रारंभिक स्तर पर अवसाद, भय, चिड़चिड़ापन या तनाव जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेना आवश्यक है, क्योंकि ये संकेत किसी प्रकार के शोषण या उत्पीड़न की ओर इशारा कर सकते हैं। ऐसे मामलों की जानकारी मिलने पर संबंधित प्रावधानों के तहत अनिवार्य रूप से रिपोर्टिंग करना अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर आसरा फाउंडेशन द्वारा तैयार किए गए बाल संरक्षण जागरूकता पैम्फलेट का भी विमोचन किया गया।
विषय विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
प्रशिक्षण सत्र में लॉ प्रोफेसर प्रतिमा सोनी ने पॉक्सो अधिनियम सहित संविधान के प्रमुख प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी।
ध्रुवश्री शेखावत ने बाल संरक्षण से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण कानूनों को सरल और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
बाल मनोवैज्ञानिक मानसी सोनी ने पीड़ित बच्चों से संवाद स्थापित करने, उनकी भावनाओं को समझने तथा उन्हें मानसिक सहयोग प्रदान करने की प्रभावी तकनीकों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान एडवोकेट विवेक शर्मा ने निशुल्क विधिक सहायता एवं स्थायी लोक अदालत की व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए बताया कि इन प्रावधानों के माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता स्वयं भी अपने अधिकारों की रक्षा कर सकती हैं।