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LIVE: अदालतों को अस्पताल की तरह संवेदनशील होना चाहिए’: CJI जस्टिस सूर्यकांत

CJI Justice Surya Kant Felicitated in Jodhpur at Rajasthan High Court Heritage Complex

जोधपुर में CJI जस्टिस सूर्यकांत का अभिनंदन समारोह, राजस्थान की आन-बान-शान के साथ हुआ भव्य स्वागत

जोधपुर। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत राजस्थान हाईकोर्ट के जोधपुर स्थित हेरिटेज परिसर में आयोजित भव्य अभिनंदन समारोह में मौजूद हैं।

उनके सम्मान में राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में समारोह आयोजित किया गया है।

समारोह में CJI जस्टिस सूर्यकांत के साथ सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और राजस्थान हाईकोर्ट के अधिकांश न्यायाधीशों की मौजूदगी है।

न्यायिक जगत के वरिष्ठ अधिकारियों और बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की मौजूदगी के चलते समारोह को लेकर खासा उत्साह नजर आ रहा है।

अदालतों को अस्पताल की तरह संवेदनशील होना चाहिए’: CJI जस्टिस सूर्यकांत

‘न्याय की गुहार लेकर आने वाले व्यक्ति का आधा दर्द संवेदनशील व्यवहार से दूर हो सकता है’; CJI ने Bar-Bench से Mentality Change का किया आह्वान

देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने न्याय व्यवस्था को अधिक मानवीय और संवेदनशील बनाने का आह्वान किया।

जोधपुर में जिला न्यायालय के नए भवन के उद्घाटन समारोह में CJI ने कहा कि अदालतों को अस्पताल की तरह संवेदनशील होना चाहिए, जहां न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया के साथ भरोसा, सम्मान और आत्मीयता भी मिले।

CJI ने अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई बीमार व्यक्ति अस्पताल पहुंचता है तो उसके मन में बीमारी और भविष्य को लेकर डर रहता है। ऐसे समय में यदि डॉक्टर, नर्स या पैरामेडिकल स्टाफ उससे आत्मीयता से बात कर भरोसा दिलाए, तो उसका आधा डर वहीं खत्म हो जाता है।

‘लिटिगेंट भी मानसिक दबाव में अदालत पहुंचता है’

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्याय की गुहार लेकर अदालत पहुंचने वाला व्यक्ति भी मानसिक रूप से इसी तरह की स्थिति में होता है।

वह अपने अधिकार, समस्या और भविष्य को लेकर चिंतित रहता है।

यदि उसे अदालत परिसर में बैठने की उचित जगह, पीने का पानी और साफ-सुथरे बाथरूम जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलें, वकील उसके अधिकार और मामले की स्थिति समझाए और सुनवाई समय पर हो, तो उसके मन का बड़ा बोझ कम हो सकता है।

उन्होंने कहा कि अदालत में आने वाला व्यक्ति केवल एक केस नंबर नहीं, बल्कि अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और उम्मीद लेकर आता है। इसलिए न्यायिक अधिकारियों और न्याय व्यवस्था से जुड़े सभी लोगों का व्यवहार मानवीय और सम्मानजनक होना चाहिए।

न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधा नहीं, न्याय व्यवस्था की जरूरत

CJI ने जोधपुर में भविष्य की न्यायिक जरूरतों को देखते हुए नए इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि बेहतर न्याय प्रणाली के लिए आवश्यक आधार है।

उन्होंने बताया कि देशभर में जिला स्तर से लेकर हाईकोर्ट तक न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करने के लिए एक अध्ययन कराया जा रहा है।

इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारों के समक्ष भविष्य की न्यायिक आवश्यकताओं को रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से फर्स्ट जेनरेशन लॉयर्स और युवा अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त चैंबर, लाइब्रेरी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है, ताकि वे बिना किसी पारिवारिक विरासत के भी बेहतर तरीके से कानूनी पेशे में आगे बढ़ सकें.

सूर्यनगरी में सूर्य का स्वागत एक सूर्य ने किया”-जस्टिस संदीप मेहता

उद्घाटन एवं अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि “सूर्यनगरी में सूर्य स्वयं उपस्थित हुए हैं। मैं इसे आगे बढ़ाते हुए कहूंगा कि सूर्यनगरी में सूर्य का स्वागत एक सूर्य ने किया है—दिनेश जी सूर्य के पर्यायवाची हैं और मेरे नाम में भी थोड़ा सूर्यकांत है। आज पूरा स्वागत सूर्य का ही है।”

जस्टिस मेहता ने कहा कि यह परिसर उनकी सहित कई न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं की कर्मस्थली रहा है। उन्होंने नई अदालत भवन के तैयार होने के बावजूद करीब एक वर्ष तक उपयोग में नहीं आने पर चिंता जताई। उ

न्होंने कहा, “तैयार इन्फ्रास्ट्रक्चर का उपयोग टालना सार्वजनिक संसाधनों की बर्बादी है। भवन जितना अधिक समय खाली रहेगा, उसके खराब होने की संभावना भी उतनी ही बढ़ेगी।”

उन्होंने कहा कि न्यायिक भवन तैयार होते ही उसे जनता और न्याय व्यवस्था के उपयोग में लाया जाना चाहिए, ताकि litigating public को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें।

जस्टिस मेहता ने पुराने जिला न्यायालय भवन को हटाकर उसी परिसर में आधुनिक, डिजिटल और बहुमंजिला भवन बनाने की जरूरत भी बताई। उन्होंने उम्मीद जताई कि जोधपुर की न्यायिक व्यवस्था को आने वाले समय में एक और अत्याधुनिक भवन की सौगात मिलेगी।

नया भवन न्यायिक व्यवस्था की समस्याओं का करेगा समाधान: जस्टिस विजय बिश्नोई

समारोह को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विजय बिश्नोई ने कहा कि नए भवन के शुरू होने से जोधपुर की न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याओं का समाधान होगा।

उन्होंने बताया कि जोधपुर में करीब 15 अदालतें किराए के भवनों में संचालित हो रही हैं, जहां जगह और पार्किंग की कमी के कारण न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों को परेशानी होती है। नए भवन से इन समस्याओं में कमी आएगी और अदालतों को एक ही परिसर में लाने में मदद मिलेगी।

जस्टिस बिश्नोई ने CJI जस्टिस सूर्यकांत का आभार जताते हुए कहा कि जिला अदालत से न्यायिक सफर शुरू करने के कारण वे जिला न्यायालयों की आधारभूत सुविधाओं और अधिवक्ताओं-पक्षकारों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझते हैं।

उन्होंने जोधपुर हाईकोर्ट परिसर से अपने करीब तीन दशक पुराने जुड़ाव को भी याद किया और नए भवन में तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि G-7 भवन अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और पक्षकारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कानूनी पेशे में नैतिक मूल्यों को मजबूत करना जरूरी-अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी

CJI जस्टिस सूर्यकांत के सम्मान समारोह में भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अपने संबोधन में कहा कि देश को मजबूत बनाने में बार के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी केवल कानून की प्रैक्टिस तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी पेशे में नैतिक मूल्यों को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अधिवक्ता यदि अपने पेशे में नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देंगे तो इससे न केवल कानून और न्याय की संस्थाएं मजबूत होंगी, बल्कि नई पीढ़ी के वकीलों को भी सही दिशा मिलेगी।

अटॉर्नी जनरल ने जोधपुर से अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए खुद को “सन-इन-लॉ ऑफ द सॉइल” बताया। उन्होंने कहा कि राजस्थान और जोधपुर की कई संस्थाओं, विशेषकर लॉ स्कूल, बार एसोसिएशन और हाईकोर्ट से उनका गहरा जुड़ाव रहा है।

उन्होंने भारत की भाषाई विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की 22 भाषाएं हमारी समृद्ध विरासत हैं और भारतीय विधि शिक्षा में भी विविधता और समावेश का महत्वपूर्ण स्थान है।

आर. वेंकटरमणी ने अपने विधि शिक्षक प्रोफेसर महाजन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने बहुत पहले राष्ट्रीय स्तर के लॉ स्कूल की परिकल्पना की थी।

आज देश के विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वे राजस्थान में प्रोफेसर महाजन की स्मृति में एक Endowment स्थापित करने की दिशा में पहल करना चाहते हैं, ताकि उनके योगदान को सम्मानित किया जा सके।

राजस्थान हाईकोर्ट बार की समृद्ध विरासत- एक्टिंग सीजे

G7 भवन के उद्घाटन समारोह में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने अपने संबोधन में जोधपुर की हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की समृद्ध न्यायिक विरासत की सराहना की।

जस्टिस शर्मा ने कहा कि दोनों बार एसोसिएशनों से जुड़े 6 सदस्य सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, जबकि 46 सदस्य राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश रह चुके हैं। उन्होंने इस उपलब्धि को दोनों बार की प्रतिष्ठित न्यायिक परंपरा का प्रमाण बताया।

जस्टिस शर्मा ने अधिवक्ताओं से तकनीक के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ने और नई चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक का प्रभावी उपयोग अधिवक्ताओं को भविष्य में नई जिम्मेदारियां निभाने के अवसर देगा।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने सात मंजिला G7 भवन के उद्घाटन समारोह के भव्य आयोजन के लिए दोनों बार एसोसिएशनों का आभार जताया।

उन्होंने कहा कि बार प्रतिनिधियों ने आयोजन को लेकर तत्काल सहयोग दिया और पूरे कार्यक्रम को बेहतर तरीके से संपन्न कराया।

जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने याद किया जोधपुर से 1980-81 का जुड़ाव

लॉ कमिश्नन चैयरमेन जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने समारोह में जोधपुर से अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 1980-81 से इस परिसर को लगातार विकसित होते देखा है।

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट परिसर का पहले जहां क्षैतिज विस्तार हुआ, वहीं अब सात मंजिला नए भवन के रूप में वर्टिकल एक्सपेंशन भी देखने को मिला है। उन्होंने नए भवन के उद्घाटन को न्याय व्यवस्था के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बताया।

उन्होंने कहा कि वर्षों में परिसर और व्यवस्थाएं भले ही बदली हों, लेकिन जोधपुर की अपनायत और मेहमाननवाजी की परंपरा आज भी कायम है। सूर्यनगरी की यही खासियत है कि यहां आने वाले अतिथियों का हमेशा दिल से स्वागत किया जाता है।

वक्ता ने दोनों बार एसोसिएशनों को अभिनंदन समारोह आयोजित करने के लिए साधुवाद दिया और कहा कि यह आयोजन CJI जस्टिस सूर्यकांत को जोधपुर के न्यायिक समुदाय के बीच लाने का महत्वपूर्ण अवसर बना। उन्होंने विश्वास जताया कि CJI भविष्य में भी जोधपुर आते रहेंगे।

तकनीक, महिला सशक्तिकरण और ADR को न्याय व्यवस्था का भविष्य- Justice P S Bhati

समारोह को संबोधित करते हुए वरिष्ठ जज जस्टिस पी.एस. भाटी ने न्याय व्यवस्था के भविष्य से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विषयों-तकनीक, महिला सशक्तिकरण और Mediation/ADR पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि न्याय जगत को तकनीक के बदलाव का मूकदर्शक नहीं बनना चाहिए, बल्कि समय रहते इसे अपनाकर सक्रिय भागीदार बनना होगा।

तकनीक और AI का इस्तेमाल Assistive Tool के रूप में हो, लेकिन फर्जी citations, deepfake और अन्य गलत इस्तेमाल से सावधान रहना जरूरी है।

जस्टिस भाटी ने कहा कि राजस्थान की न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अब बार में भी महिला अधिवक्ताओं को समान अवसर और नेतृत्व की भूमिका देने की जरूरत है।

उन्होंने Mediation और Alternative Dispute Resolution (ADR) को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और न्यायपालिका, बार तथा सभी stakeholders के सामूहिक प्रयास से राजस्थान को ADR के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है।

जस्टिस भाटी ने कहा कि तकनीक का नैतिक उपयोग, महिलाओं की समान भागीदारी और ADR को बढ़ावा देना आधुनिक न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण जरूरत है।

राजस्थानी साफा पहनाकर CJI का सम्मान

अभिनंदन समारोह में CJI जस्टिस सूर्यकांत को राजस्थान की आन-बान-शान का प्रतीक राजस्थानी साफा पहनाकर सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही उन्हें राजस्थान की संस्कृति और परंपरा से जुड़ा विशेष राजस्थानी प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया गया।

राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने CJI जस्टिस सूर्यकांत को राजस्थान का प्रतीक चिन्ह प्रदान किया, जबकि राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी ने उन्हें राजस्थानी साफा पहनाकर सम्मानित किया।

न्यायिक जगत के दिग्गज मौजूद

अभिनंदन समारोह को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई, लॉ कमीशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी सहित अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश संबोधित कर रहे हैं।

CJI का जोधपुर आगमन न्यायिक समुदाय के लिए गौरव: रणजीत जोशी

राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी ने CJI जस्टिस सूर्यकांत का अभिनंदन करते हुए उनके जोधपुर आगमन को पूरे न्यायिक समुदाय के लिए गौरव का अवसर बताया।

जोशी ने कहा कि जिला कोर्ट के नए सात मंजिला G-7 भवन का उद्घाटन न्यायिक व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने किराए के भवनों में संचालित अदालतों को नए भवन में स्थानांतरित करने का आग्रह किया, ताकि न्यायिक कार्यों के लिए बेहतर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

महिला अधिवक्ताओं के प्रतिनिधित्व पर जोर

रणजीत जोशी ने न्यायिक व्यवस्था में महिला अधिवक्ताओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने Legal Aid Defense Counsel System को और मजबूत किए जाने की जरूरत बताई, ताकि जरूरतमंद लोगों को प्रभावी कानूनी सहायता मिल सके।

उन्होंने कहा, “बार और बेंच न्याय व्यवस्था के रथ के दो पहिए हैं। इनके बेहतर समन्वय से ही न्याय व्यवस्था मजबूत होगी।”

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