जयपुर, 20 सितंबर
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में दिव्यांग अभ्यर्थी को रविवार, 21 सितंबर 2025 को होने वाली परीक्षा में स्क्राइब यानी सहायक लेखक की सुविधा उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
जस्टिस मनीष शर्मा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को परीक्षा में शामिल होने से रोका नहीं जा सकता और उन्हें स्क्राइब की सुविधा उपलब्ध कराना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को आगामी परीक्षा में स्क्राइब के साथ बैठने की अनुमति दी जाए और विभाग तत्काल आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करे।
50 प्रतिशत दिव्यांगता
अभ्यर्थी यशार्थ पारीक ने याचिका दायर कर राजस्थान हाईकोर्ट से स्क्राइब उपलब्ध कराने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रचित शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता को 50% की स्थायी बौद्धिक अक्षमता (Intellectual Disability) है।
इस दिव्यांगता की पुष्टि 12 फरवरी 2025 को जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र से होती है।
याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता के मस्तिष्क का हिस्सा प्रभावित है और उन्हें माइल्ड आई.डी.डी. (Mild IDD) से पीड़ित माना गया है।
इसके बावजूद, संबंधित विभागों ने अब तक स्क्राइब सुविधा उपलब्ध कराने की उनकी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया।
स्क्राइब न देना भेदभाव
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने समय-समय पर दिशानिर्देश जारी किए हैं कि RPwD अधिनियम, 2016 की धारा 2(एस) के अंतर्गत दिव्यांग व्यक्तियों को परीक्षा में स्क्राइब की सुविधा और समुचित समय दिया जाना चाहिए।
अधिवक्ता ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के गुलशन कुमार बनाम आईबीपीएस का भी हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि “उचित सुविधा (Reasonable Accommodation)” का सिद्धांत दिव्यांगजनों की समानता सुनिश्चित करने का आधार है, और स्क्राइब या अतिरिक्त समय न देना भेदभाव माना जाएगा।