गुजरात के पूर्व प्रिंसिपल आयकर आयुक्त डी.आर. सिधल की प्रेरणादायक यात्रा
जयपुर, 3 दिसंबर
देश की प्रशासनिक सेवाओं में IRS को हमेशा एक अनुशासित, निष्पक्ष और मजबूत स्तंभ के रूप में देखा जाता है। लेकिन कभी–कभी वही अधिकारी किसी अन्याय या प्रणालीगत जटिलताओं से गुजरते हुए अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए एक नए रास्ते पर निकल पड़ते हैं.
गुजरात के पूर्व प्रिंसिपल आयकर आयुक्त डी.आर. सिधल की कहानी भी ऐसी ही साहस, संघर्ष और आत्मसम्मान की कहानी है.
IRS से वकील तक: बदलाव की कठिन लेकिन प्रेरक यात्रा
डी.आर. सिधल ने प्रशासनिक सेवा में रहते हुए वर्षों तक ईमानदारी, साहस और दक्षता के साथ अपनी जिम्मेदारियाँ निभाईं। लेकिन एक समय ऐसा आया जब उन्हें अंदर से लगा कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने के लिए उन्हें अदालत का रास्ता चुनना होगा — वही अदालत जिसके सामने वे सरकारी अधिकारी के रूप में रोज खड़े होते थे।
सेवा के दौरान आई चुनौतियों, विवादों और अधिकारों के हनन ने उन्हें मजबूर किया कि वे अपनी लड़ाई खुद लड़ें।
और यहीं से शुरू हुई उनकी दूसरी पारी—एक IRS अधिकारी से वकील बनने की प्रेरणादायक यात्रा।
क्यों चुना उन्होंने वकालत का रास्ता?
सिधल का मानना था कि—
“जब सिस्टम में रहते हुए आपके अधिकारों की रक्षा नहीं हो पाती, तब आपको कानून के माध्यम से खुद अपनी लड़ाई लड़नी होती है।”
उनकी लड़ाई सिर्फ व्यक्तिगत नहीं थी, बल्कि एक संदेश था कि सरकारी सेवा में ईमानदार अधिकारी भी यदि न्याय चाहते हैं, तो वकालत का रास्ता सबसे प्रभावी हथियार हो सकता है।
कानून की पढ़ाई से लेकर अदालत की दहलीज तक
रोजमर्रा की व्यस्त सेवा जीवन के बीच उन्होंने LLB किया और कानूनी विषयों की गहरी समझ विकसित की।
सेवानिवृत्ति के बाद उनके सामने दो रास्ते थे—
शांति से रिटायर्ड जीवन बिताना
या वह संघर्ष जारी रखना, जिसके लिए उन्होंने वर्षों तक आवाज उठाई थी
सिधल ने दूसरा रास्ता चुना।
वह अदालत गए, वकील बने, और उन मामलों को उठाया जो उनके हक, सम्मान और प्रशासनिक न्याय से जुड़े थे।
IRS अधिकारी से एक सशक्त अधिवक्ता
आज डी.आर. सिधल न केवल एक अनुभवी पूर्व IRS अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं, बल्कि एक दृढ़ वकील भी हैं, जिन्होंने साबित किया कि—
“कानून पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती, और न्याय पाने के लिए संघर्ष की कोई सीमा नहीं होती।”
उनकी कहानी उन हजारों अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को प्रेरित करती है जो अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना चाहते हैं।
डी.आर. सिधल के संघष की कहानी बताती हैं कि सच की राह कठिन जरूर होती है लेकिन असंभव नहीं, सिस्टम की सीमाएँ आपको रोक सकती हैं, पर आपकी इच्छा शक्ति नहीं और यदि आपके साथ अन्याय हो रहा है, तो कानून आपका सबसे बड़ा हथियार है