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राज्यपाल का VC के निलंबन का आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने कहा हटाने से पूर्व राज्यपाल ने नहीं ली सरकार से सलाह

HC Notice to Rajasthan University VC

जयपुर, 14 अक्टूबर

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने श्री करण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलपति डॉ. बलराज सिंह के निलंबन पर बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्यपाल (कुलाधिपति) द्वारा जारी निलंबन आदेश को रद्द कर दिया है।

जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ की ओर से दिए गए रिपोर्टेबल जजमेंट में कहा गया कि राज्यपाल ने कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 2013 की धारा 25-ए(1) के तहत राज्य सरकार से परामर्श किए बिना निलंबन का आदेश जारी किया, जो कानूनी प्रक्रिया के विपरीत है।

हाईकोर्ट ने अपने 43 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि डॉ. सिंह को निलंबित करने से पहले राज्यपाल द्वारा राज्य सरकार से कोई परामर्श नहीं किया गया। जबकि अधिनियम में यह आवश्यक है कि ऐसे निर्णय राज्य सरकार की सलाह से लिए जाएं।

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की —

“यद्यपि अधिनियम में शब्द ‘may’ प्रयुक्त हुआ है, परंतु ऐसे मामलों में इसे ‘shall’ के रूप में पढ़ा जाना चाहिए, क्योंकि विश्वविद्यालय राज्य सरकार से वित्त पोषित है और परामर्श की प्रक्रिया अनिवार्य थी।”

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यपाल का “राज्य सरकार से परामर्श” करने का अर्थ राजनीतिक कार्यपालिका (Political Executive) से है, न कि किसी अधीनस्थ अधिकारी से।

जांच प्रक्रिया पर सवाल

हाईकोर्ट ने पाया कि 25 सितंबर 2025 को गठित जांच समिति के संदर्भ (Terms of Reference) में कुलपति की भूमिका की जांच शामिल नहीं थी।

लेकिन 6 और 7 अक्टूबर 2025 को तैयार की गई नोटशीट और निजी पत्रों के माध्यम से राज्यपाल कार्यालय ने अचानक जांच का दायरा बढ़ा दिया और उसी दिन निलंबन आदेश जारी कर दिया।

हाईकोर्ट ने इसे “पूर्वाग्रहपूर्ण और जल्दबाजी में उठाया गया कदम” बताया।

“राज्यपाल ने बिना किसी कारण दर्ज किए और बिना विश्वविद्यालय को पूर्व सूचना दिए कार्रवाई की। यह निर्णय ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों’ का उल्लंघन है,” — कोर्ट ने कहा।

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला दिया, जिनमें –“मोहिंदर सिंह गिल बनाम भारत निर्वाचन आयोग”, “के. प्रभाकर हegde बनाम बैंक ऑफ बड़ौदा (2025)”, और “कृष्ण दत्त अवस्थी बनाम मध्यप्रदेश राज्य (2025)” शामिल हैं।

इन मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह सिद्धांत स्थापित किया है कि किसी व्यक्ति को बिना नोटिस और बिना सुनवाई का अवसर दिए निलंबित करना ‘प्राकृतिक न्याय’ के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

हाईकोर्ट का निष्कर्ष

हाईकोर्ट ने माना कि यद्यपि राज्यपाल को कुलपति को निलंबित करने का अधिकार है, लेकिन यह राज्य सरकार से परामर्श के बाद ही किया जा सकता है।
इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।

“राज्यपाल ने बिना आवश्यक परामर्श के जल्दबाजी में निर्णय लिया। कोई ठोस आधार या औचित्य रिकॉर्ड पर नहीं है, इसलिए निलंबन आदेश पूर्णतः अनुचित और अवैधानिक है।”

हाईकोर्ट का आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्यपाल द्वारा जारी 7 अक्टूबर 2025 के निलंबन आदेश को रद्द कर दिया है।

कोर्ट ने सशर्त रूप से डॉ. बलराज सिंह को कुलपति (VC) के पद पर पुनर्नियुक्त करने के निर्देश दिए, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि धारा 25-ए(2) के तहत उन्हें प्रशासनिक कार्यों और नीति-निर्णयों से अस्थायी रूप से रोका गया है।

डॉ. सिंह के विरुद्ध लंबित जांच जारी रहेगी, और जब तक जांच रिपोर्ट कुलाधिपति को प्रस्तुत नहीं होती, तब तक उन्हें किसी अन्य पद पर नियुक्ति के लिए विचार नहीं किया जाएगा।

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