जोधपुर, 8 अक्टूबर
राजस्थान हाईकोर्ट मुख्यपीठ ने जोधपुर शहर की सफाई व्यवस्था और मलबा हटाने के लिए पेश की गई अनुपालना रिपोर्ट पर सख्त नाराजगी जताई है।
महेश गहलोत की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस विनीत कुमार माथुर ने कहा कि शहर को स्वच्छ रखने के लिए उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं हैं और इसके लिए एक अधिक प्रभावी और केंद्रित दृष्टिकोण की आवश्यकता है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वच्छता केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वास्तविक कार्यान्वयन पर भी ध्यान देना जरूरी है।
रिपोर्ट पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार और उनके सहयोगी आयुष गहलोत ने विस्तृत अनुपालना रिपोर्ट पेश की। इसमें जोधपुर शहर में सफाई कर्मचारियों और कचरा प्रबंधन के लिए निर्धारित मापदंडों की जानकारी दी गई।
हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान प्रयास शहर को स्वच्छ बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और नगर निगम को अधिक प्रभावी कदम उठाने होंगे। अदालत ने निगम को निर्देश दिए कि वह एक विस्तृत शपथपत्र पेश करे जिसमें सभी उपायों का विवरण हो।
प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता
नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि मलबा हटाने के लिए प्रयुक्त मशीनों और वाहनों की संख्या का विवरण पेश किया जाएगा। इसके साथ ही कचरा डालने के केंद्रों की पहचान कर संबंधित क्षेत्रों में बीमारियों के फैलाव को रोकने और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।