हाईकोर्ट ने कहा अब हालात ऐसे हैं कि “कुछ असामान्य और कठोर कदम उठाना अनिवार्य हो गया है”, ताकि अदालत की गरिमा बनी रहे
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सालों बाद भी कोर्ट के आदेशों की पालना नहीं करने के मामले में बड़ा सख्त कदम उठाते हुए राज्य के जलदाय विभाग के प्रमुख सचिव सहित 5 शीर्ष अधिकारियों का वेतन रोकने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में राज्य के ट्रेज़री अधिकारी को भी सख्त चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि इन अधिकारियों में से किसी को भी वेतन का कोई भाग अथवा कोई अन्य लाभ वितरित किया जाता है, तो संबंधित जिले के कोषाधिकारी (ट्रेज़री ऑफिसर) के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश PHED कर्मचारी लालचंद की ओर से दायर याचिका पर दिया है।
हाईकोर्ट के स्पष्ट और अंतिम आदेशों के बावजूद वर्षों तक कर्मचारी लालचंद के बकाया वेतन व लाभ नहीं दिए गए।
“अब सिर्फ चेतावनी नहीं, सीधी कार्रवाई”
हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि राज्य सरकार और संबंधित विभागीय अधिकारी न केवल अदालत के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं, बल्कि जानबूझकर अनुपालना से बच रहे हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि अब हालात ऐसे हैं कि “कुछ असामान्य और कठोर कदम उठाना अनिवार्य हो गया है”, ताकि अदालत की गरिमा बनी रहे।
2017 का आदेश, लेकिन 2026 में पालना नहीं
12 अक्टूबर 2017 को हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता लालचंद के पक्ष में आदेश दिया था कि याचिकाकर्ता लालचंद को स्टोर-मुंशी के पद पर पुनः कार्य पर लिया जाए और लेबर कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के अनुरूप समस्त वेतन व सेवा लाभ दो माह के भीतर अदा किए जाएं।
यह आदेश अंतिम रूप से प्रभावी हो चुका था, इसके बावजूद 8 साल बीत जाने के बाद भी पूरा भुगतान नहीं किया गया।
राज्य की अपील भी वापस, फिर भी भुगतान नहीं
सुनवाई के दौरान सामने आया कि राज्य सरकार ने इस मामले में विशेष अपील (DB SAW 511/2022) दायर की थी, लेकिन बाद में उसे स्वयं ही वापस ले लिया।
इसका सीधा अर्थ यह था कि 2017 का आदेश पूरी तरह वैध और बाध्यकारी है।
इसके बावजूद याचिकाकर्ता को केवल कुछ चुनिंदा अवधि का ही वेतन दिया गया, जबकि शेष बकाया आज तक अटका रहा।
बार-बार आदेश, फिर भी पालना नहीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर दर्ज किया कि कई बार संबंधित अधिकारियों को समय दिया गया, प्रमुख सचिव तक को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए गए।
इसके अलावा मामले में अतिरिक्त हलफनामे दाखिल हुए, लेकिन न तो पूरी राशि का भुगतान हुआ और न ही कोई ठोस गणना-पत्र कोर्ट में पेश किया गया।
हाईकोर्ट ने यह स्थिति देखकर कहा कि यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई अवहेलना है।
अधिकारियों का वेतन रोका
इन हालातों को देखते हुए हाईकोर्ट ने वित्त विभाग के कोषागार को आदेश दिए कि जब तक हाईकोर्ट के 12 अक्टूबर 2017 के आदेश की पूर्ण पालना नहीं की जाती, तब तक प्रमुख सचिव/सचिव PHED जयपुर, कार्यकारी अभियंता सिटी डिवीजन झुंझुनूं, सहायक अभियंता नवलगढ़, कार्यकारी अभियंता ग्रामीण डिवीजन झुंझुनूं तथा मुख्य अभियंता (प्रशासन) जयपुर को एक रुपये का भी वेतन या कोई लाभ न दिया जाए।
कोषाधिकारी पर भी कार्रवाई की चेतावनी
हाईकोर्ट ने इसके साथ ही कोषाधिकारियों को भी सख्त चेतावनी दी है कि यदि इन अधिकारियों को वेतन या कोई अन्य लाभ वितरित किया गया, तो संबंधित जिले के कोषाधिकारी के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
10 फरवरी तक पालना के आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए 10 फरवरी 2026 को अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।