जयपुर, 4 सितंबर
राजस्थान हाईकोर्ट ने दो महिला आरोपियों को जमानती अपराध में 43 दिन जेल में रखने पर सख्त नाराजगी जताते कई सख्त टिप्पणियां की हैं.
जस्टिस अनिल कुमार उपमन की अदालत ने इस मामले में सभी पक्षों की गंभीर चूक बताते हुए कहा कि सभी लोग एक गंभीर मामले में अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं.
हाईकोर्ट ने कहा कि चाहे इस मामले के जांच अधिकारी हो, आरोपी के वकील, सरकारी वकील हो या फिर जज जिन्होंने जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की है वे सभी विफल रहे हैं.
राजस्थान हाईकोर्ट ने इसके साथ ही दोनो आरोपी महिलाओं को जमानत देते हुए दोनों महिलाओं को कानून कार्रवाई करने की छूट दी हैं.
अदालत ने कहा कि अगर उन्हें लगता है कि उनके मौलिक अधिकारियों का हनन हुआ हैं। वह इस मामले में कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं.
जजों के खिलाफ भी निर्देश
जमानती अपराध होने के बावजूद मामले में पहले ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट और बाद एडीजे कोर्ट ने दोनो महिलाओं की जमानत याचिकाए खारिज कर दी.
हाईकोर्ट ने अब दोनो जजों के खिलाफ भी संबंधित जिला जज को मामला भेजते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
जमानत आरोपी का अधिकार
राजस्थान हाईकोर्ट ने दोनो महिलाओं को जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि जमानती अपराध में जमानत आरोपी का अधिकार है, न कि जज का विवेक.
हाईकोर्ट ने कहा इस तरह के मामलों में पुलिस व अदालत को जमानत देने से इनकार नहीं करना चाहिए.
हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस जांच अधिकारी से स्पष्टीकरण पेश करने को कहा है कि जमानती अपराध में महिलाओं को थाने में ही जमानत क्यों नही दी गयी.
गौरतलब है कि दोनों महिलाओं को व्यापारी से सेक्सटॉर्शन की धमकी देकर पैसे वसूलने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इनके पास से 2.22 लाख रुपए बरामद हुए और मोबाइल से अन्य ब्लैकमेलिंग की जानकारी मिलने की बात कही गयी.