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राजस्थान न्यायपालिका में ऐतिहासिक पहल : 65 पति-पत्नी (130) जजों को साथ मिलेगी पोस्टिंग, देर शाम तक जारी हो सकती है सूची

Rajasthan High Court Questions Delay in Implementing Hill Area Building Rules

जयपुर। राजस्थान न्यायपालिका में आज का दिन एक ऐतिहासिक और मानवीय दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश Justice Sanjeev Prakash Sharma की पहल पर राज्यभर में 130 न्यायाधीशों के तबादले से एक साथ पोस्टिंग मिलेगी, जिनमें 65 पति-पत्नी जजों के जोड़े शामिल हैं।

देर रात तक जारी होने वाली तबादला सूची में ये लिस्ट भी शामिल हैं.

न्यायपालिका में इस फैसले को एक संवेदनशील, परिवार-केंद्रित और प्रगतिशील प्रशासनिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल की सबसे खास बात यह रही कि सभी दंपति न्यायाधीशों को एक ही स्थान पर पदस्थापित किया गया है।

आमतौर पर न्यायिक अधिकारियों के तबादलों में पारिवारिक परिस्थितियों को सीमित स्तर पर ही ध्यान में रखा जाता है, लेकिन इस बार राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने मानवीय पहलू को प्राथमिकता देते हुए पति-पत्नी जजों को साथ रखने का निर्णय लिया है।

न्यायिक और कानूनी हलकों में इस फैसले की व्यापक चर्चा हो रही है।

अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और विधि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की व्यवस्था से न्यायिक अधिकारियों को पारिवारिक स्थिरता मिलेगी, मानसिक दबाव कम होगा तथा वे अधिक सकारात्मक और प्रभावी तरीके से न्यायिक कार्य कर सकेंगे। कई अधिवक्ताओं ने इसे न्यायपालिका में “मानवीय प्रशासन” का उदाहरण बताया है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायपालिका केवल कानून और प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें कार्यरत अधिकारियों के सामाजिक और पारिवारिक जीवन को समझना भी उतना ही आवश्यक है।

लंबे समय तक अलग-अलग जिलों में तैनाती के कारण दंपति न्यायिक अधिकारियों को पारिवारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में यह निर्णय उनके जीवन में संतुलन और स्थिरता लाने वाला माना जा रहा है।

गौरतलब है कि Justice Sanjeev Prakash Sharma इससे पहले भी कई ऐतिहासिक और संवेदनशील फैसलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। हाल ही में उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के रोस्टर में पहली बार पति-पत्नी जज — Justice Pushpendra Singh Bhati और Justice Nupur Bhati — को एक ही पीठ में सुनवाई के लिए निर्धारित कर नई मिसाल पेश की थी। उस निर्णय को देशभर में सराहा गया था और राजस्थान के अधिवक्ताओं ने भी इसे सकारात्मक बदलाव बताया था।

अब 65 दंपति जजों के एक साथ तबादले को उसी प्रगतिशील सोच का विस्तार माना जा रहा है। न्यायपालिका में इस फैसले को प्रशासनिक सुधार के साथ-साथ संवेदनशील नेतृत्व का उदाहरण बताया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य न्यायिक कार्यों की दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ अधिकारियों के व्यक्तिगत जीवन में संतुलन बनाए रखना भी है।

माना जा रहा है कि इससे न्यायपालिका में कार्य करने वाले अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा और न्यायिक व्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

राजस्थान न्यायपालिका का यह कदम अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है और इसे न्यायिक प्रशासन में मानवीय दृष्टिकोण की एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

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