जोधपुर की विशेष पॉक्सों अदालत संख्या 1 का फैसला, कहा ऐसे अपराध समाज के लिए अत्यंत घातक और अमानवीय
जोधपुर। 5 वर्षिय मासूम नाबालिग के साथ एक अत्यंत संवेदनशील और जघन्य दुष्कर्म मामले में जोधपुर महानगर की विशेष पॉक्सो अदालत संख्या–01 ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
विशेष अदालत की जज डॉ. मनीषा चौधरी ने मासूम से दुष्कर्म के दोषी आरोपी कालू उर्फ कालिया को शेष प्राकृतिक जीवनकाल यानी जिंदा रहने तक जेल में ही रहने की सजा और कुल 1 लाख 11 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
अलग अलग धाराओं में सजा
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी कालिया को विभिन्न धाराओं में दोषी घोषित किया.
IPC की धारा 323 — 1 वर्ष का कारावास व 1 हजार रुपये जुर्माना,
IPC की धारा 324 — 3 वर्ष का कठोर कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माना
IPC की धारा 363— 3 वर्ष का कठोर कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माना
IPC की धारा 376(2)(i) — शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास एवं 50 हजार रुपये जुर्माने
पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(i)/6 — आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा
सभी सजाए एक साथ चलने के चलते आरोपी कालिया को आजीवन उम्रकैद की सजा सुनाई गयी. साथ ही कुल 1 लाख 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया.
समाज के लिए अत्यंत घातक और अमानवीय
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कैमरा ट्रायल में कि गयी सुनवाई के दौरान मासूम बालिका की गवाही पूरी तरह विश्वसनीय, सुसंगत तथा घटनाक्रम की सच्चाई को उजागर करने वाली है.
जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराध समाज के लिए अत्यंत घातक और अमानवीय हैं। ऐसे अपराध न केवल मासूम बच्चों से उनका बचपन छीन लेते हैं, बल्कि समाज की नैतिक और सामाजिक संरचना को भी गहरा आघात पहुंचाते हैं।
अदालत ने ऐसे मामलों में कठोरतम दंड आवश्यक है, ताकि समाज में एक सख्त और स्पष्ट संदेश जाए कि नाबालिगों के साथ किसी भी प्रकार का अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अदालत ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि “सहमी हुई सी आवाज में जो सच बोले गए, बंद अदालत में अपनी पीड़ा की परतें खोल गईं”.
जोधपुर के बासनी थाना का मामला
फैसले की जानकारी देते हुए विशेष लोक अभियोजक वीणा चौहान ने बताया कि यह मामला वर्ष 2015 का है, जो पुलिस थाना बासनी क्षेत्र से संबंधित है।
आरोपी कालू उर्फ कालिया ने घर के बाहर खेल रही महज 05 वर्षीय मासूम बालिका को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया।
जब देर शाम तक बालिका घर वापस नहीं लौटी तो परिजनों ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश शुरू की, लेकिन रात भर कोई सुराग नहीं मिला।
अगले दिन सुबह बालिका घर से काफी दूर एक सुनसान स्थान पर गंभीर हालत में घायल अवस्था में मिली। उसकी स्थिति देखकर परिजन और स्थानीय लोग स्तब्ध रह गए।
तत्काल पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की. जांच के बाद पुलिस ने आरोपी कालिया को मासूम से दुष्कर्म के आरोप में गिरफतार किया.
32 गवाहों के बयान
अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को मजबूती से रखते हुए कुल 32 गवाहों के बयान न्यायालय में कराए गए।
इसके साथ ही चिकित्सकीय साक्ष्य, एफएसएल रिपोर्ट एवं अन्य भौतिक साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए, जिससे अभियोजन का मामला और अधिक मजबूत हुआ.
कैमरा ट्रायल में सुनवाई
सुनवाई के दौरान नाबालिग पीड़िता की बंद अदालत में कराई गई गवाही को अदालत ने अत्यंत महत्वपूर्ण माना।
अदालत ने कहा कि पीड़िता की गवाही स्वाभाविक, निष्कपट और विश्वास के योग्य है तथा वह संपूर्ण घटनाक्रम की सच्चाई को स्पष्ट रूप से सामने लाती है।
अदालत ने यह भी माना कि नाबालिग पीड़िताओं के मामलों में उनकी गवाही को संवेदनशीलता और विशेष सावधानी के साथ परखा जाना आवश्यक है।