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होली के रंग, जजों के संग: लॉयर्स एसोसिएशन के स्नेह मिलन में दिखा न्यायिक जगत का आत्मीय चेहरा

Holi with the Bench: Lawyers Association’s Grand Get-Together Strengthens Bar-Bench Bond in Jodhpur

जोधपुर। “जज भी इंसान होते हैं और उनकी भी भावनाएं होती हैं, अगर आप उन्हें अलग करते हैं तो वे भी आपसे अलग हो जाएंगे।” यह भाव सोमवार की शाम शब्दों में ही नहीं, बल्कि माहौल में भी महसूस किया गया, जब होली के अवसर पर राजस्थान जोधपुर लॉयर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित स्नेह मिलन समारोह में बार और बेंच के रिश्तों की मिठास खुलकर सामने आई।

होली का त्योहार आपसी प्रेम, सद्भाव, संवेदनशीलता और त्याग का प्रतीक है।

इसी भावना को साकार करती सोमवार की शाम राजस्थान की न्यायपालिका के लिए बेहद खास रही। लंबे समय बाद ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसकी प्रतीक्षा हर अधिवक्ता और न्यायिक अधिकारी को थी।

पिछले कुछ समय से बार और बेंच के बीच बढ़ती दूरियों को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन सोमवार की इस रंग-बिरंगी और आत्मीय शाम ने उन दूरियों को कम करने की एक सकारात्मक पहल की।

Holi with the Bench: Lawyers Association’s Grand Get-Together Strengthens Bar-Bench Bond in Jodhpur
Rajasthan High Court judges and advocates celebrate Holi during the Lawyers Association’s Holi Milan ceremony in Jodhpur.

समारोह में राजस्थान के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा, सीनियर मोस्ट जज पुष्पेन्द्रसिंह भाटी, जस्टिस फरजंद अली, जस्टिस रेखा बोराणा, जस्टिस संजित पुरोहित, जस्टिस मुकेश राजपुरोहित, जस्टिस संदीप शाह तथा सुनील बेनीवाल की मौजूदगी ने होली मिलन को एक भव्य रूप दे दिया।

समारोह की शुरुआत सौहार्दपूर्ण अभिवादन और रंगों के हल्के गुलाल से हुई। वातावरण में न केवल होली के रंग थे, बल्कि आत्मीयता और अपनत्व की खुशबू भी थी।

अधिवक्ताओं और न्यायाधीशों ने एक-दूसरे को फूलों का गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम का सबसे खास क्षण वह रहा जब एक्टिंग चीफ जस्टिस ने होली के पारंपरिक गीत गुनगुनाए। उनकी स्वर लहरियों का साथ जस्टिस पुष्पेन्द्रसिंह भाटी ने भी दिया। समारोह में एक्टिंग चीफ जस्टिस ने सभी अधिवक्ताओं को होली की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं और कहा कि यह पर्व आपसी विश्वास को मजबूत करने का अवसर है।

न्यायालय की गंभीर कार्यवाही में सदा संयमित और औपचारिक दिखने वाले न्यायाधीशों का यह सहज रूप उपस्थित अधिवक्ताओं के लिए सुखद आश्चर्य से कम नहीं था।

इसके बाद एक और भावुक और संगीतमय पल आया, जब जस्टिस संजित पुरोहित और मुकेश राजपुरोहित ने अपने गीतों से समा बांध दिया।

जस्टिस मुकेश राजपुरोहित ने “मुसाफिर हूं यारो” और “पल भर के लिए” जैसे सदाबहार गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

वहीं जस्टिस संजित पुरोहित ने भी “पल भर के लिए” को अपने अंदाज में प्रस्तुत कर तालियों की गड़गड़ाहट बटोरी।

समारोह में जस्टिस फरजंद अली ने अपने ओजपूर्ण अंदाज में महाभारत की प्रसिद्ध पंक्तियां “जब नाश मनुष्य पर छाता है…” सुनाते हुए सभी को गहरे चिंतन की ओर प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विवेक और संयम जीवन के सबसे बड़े रंग हैं। यदि जीवन में संतुलन और धैर्य बना रहे, तो हर परिस्थिति को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।

समारोह में जस्टिस पुष्पेन्द्रसिंह भाटी ने भी बेहतर आयोजन के लिए अधिवक्ता परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न्यायिक परिवार को एक सूत्र में बांधने का कार्य करते हैं। साथ ही उन्होंने सभी को होली की शुभकामनाएं देते हुए आपसी सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया।

सिर्फ न्यायाधीश ही नहीं, अधिवक्ताओं ने भी मंच संभाला और पारंपरिक होली गीतों पर जमकर थिरके। रंग, संगीत और मुस्कुराहटों के बीच ऐसा लगा मानो अदालत की औपचारिक दीवारें भी उस शाम पिघल गई हों।

समारोह के दौरान एक भावुक दृश्य तब सामने आया, जब न्यायाधीशों ने बेहद स्नेहपूर्वक युवा अधिवक्ताओं को आशीर्वाद दिया। जवाब में अधिवक्ताओं ने भी फूलों की वर्षा कर अपना सम्मान और प्रेम प्रकट किया। यह दृश्य केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि परस्पर विश्वास और सम्मान की पुनर्स्थापना का प्रतीक बन गया।

कार्यक्रम के संचालन में अधिवक्ता देवकीनंदन व्यास की एंकरिंग सबसे खास रही। उनकी रोचक शैली और सधे हुए शब्दों ने पूरे आयोजन को जीवंत बनाए रखा।

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