जोधपुर, 30 सितम्बर
Rajasthan Highcourt ने वर्ष 1994 के एक हत्या के मामले में 28 साल बाद अहम फैसला सुनाते हुए हत्या के आरोपी देवी सिंह को भुगती हुई सजा के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया है।
Rajasthan Highcourt ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी का सीधा इरादा हत्या करने का नहीं था, बल्कि हत्या उस समय हुए अचानक झगड़े और उकसावे का परिणाम थी।
जस्टिस मनोज कुमार गर्ग और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में दी गई उम्रकैद की सजा को घटाकर गैर-इरादतन हत्या में बदल दिया।
Rajasthan Highcourt ने आरोपी देवी सिंह की आजीवन कारावास की सजा को घटाकर पहले से भुगती गई अवधि, लगभग 5 वर्ष, तक सीमित करते हुए जेल से रिहा करने के आदेश दिए हैं।
अचानक हुई घटना
आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष शिशोदिया ने दलीलें पेश करते हुए अदालत को बताया कि घटना अचानक हुई झड़प का नतीजा थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से भी यह स्पष्ट नहीं था कि देवी सिंह ने जान से मारने की नीयत से वार किया।
गवाहों ने यह भी कहा कि देवी सिंह ने कुल्हाड़ी के उल्टे हिस्से से चोट पहुंचाई थी। इसके अलावा झगड़े के दौरान मान सिंह को भी चोटें आई थीं।
सरकार ने किया विरोध
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही बताते हुए अपील खारिज करने का अनुरोध किया।
सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि मृतक को सिर पर गंभीर चोटें आई थीं, जो उसकी मौत का कारण बनीं। ऐसे में निचली अदालत का फैसला सही है।
यह है मामला
21 अप्रैल 1994 की रात को राजसमंद जिले के भीम थाना क्षेत्र में बाबू सिंह की हत्या कर दी गई थी।
उसकी पत्नी द्वारा इस मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
आरोप था कि जमीन विवाद और घरेलू कहासुनी के चलते आरोपीगण ने बाबू सिंह पर हमला किया।
शिकायत के अनुसार, बाबू सिंह को लाठियों और कुल्हाड़ी से गंभीर चोटें पहुंचाई गईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
ट्रायल कोर्ट का फैसला
राजसमंद की सेशन कोर्ट ने 20 जनवरी 1997 को सुनाए फैसले में आरोपी देवी सिंह को हत्या (302 आईपीसी) का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
इस मामले के सह-आरोपी अमर सिंह और मोहन सिंह को बरी कर दिया गया था।
एक अन्य आरोपी मान सिंह का मामला अपील लंबित रहते हुए उसकी मृत्यु के कारण समाप्त कर दिया गया।