जयपुर, 23 अक्टूबर
Rajasthan Highcourt ने बहरोड़ के पुलिस थाने में दर्ज एक हत्या मामले के दो आरोपियों को जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा मिली हुई जमानत को रद्द कर दिया है।
Rajasthan Highcourt ने आरोपी रामप्रताप और कपिल को जिला न्यायालय द्वारा दी गई जमानत को बिना विचार के पारित किया गया आदेश बताया है।
Justice Sameer Jain की एकलपीठ ने दोनों आरोपियों की मिली हुई जमानत को रद्द करते हुए कहा कि अधिनस्थ अदालत का फैसला अप्रासंगिक तथ्यों पर आधारित है और इससे न्याय की विफलता (miscarriage of justice) हुई है।
Rajasthan Highcourt ने कहा कि इस मामले की परिस्थितियों में विवादित जमानत आदेश स्पष्ट रूप से अनुचित हैं, क्योंकि इनमें अपराध की गंभीर और जघन्य प्रकृति तथा आरोपियों की सक्रिय भूमिका की अनदेखी की गई।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के इस बात पर जोर दिया कि जमानत रद्द करने की शक्ति, प्रारंभिक चरण में जमानत खारिज करने की शक्ति से भिन्न होती है।
एक बार दी गई जमानत को रद्द किया जा सकता है, यदि वह आदेश विकृति (perversity) से ग्रसित हो, महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी में पारित किया गया हो, या अदालत ने अपराध की गंभीरता और साक्ष्यों पर विचार नहीं किया हो।
पीड़ित के अधिवक्ता की दलील
मामले में मृतक के पुत्र अजीत सिंह की ओर से अधिवक्ता अश्विन गर्ग ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि आरोपियों ने याचिकाकर्ता के पिता पर बहुत ही क्रूरता से जानलेवा हमला कर मृत्यु कराई है।
अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि हत्या के समय के CCTV फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चार्जशीट में स्पष्ट रूप से सामने आया है कि मृतक विजय सिंह को सात चोटें लगी थीं, जिनमें से तीन गंभीर सिर की चोटें थीं और मृत्यु का कारण “गंभीर सिर में चोट” बताया गया है।
अधिवक्ता ने कहा कि हत्या में आरोपी रामप्रताप और कपिल की मुख्य भूमिका रही और दोनों ने ही क्रूरता से हमला कर मृत्यु कराई।
अधिवक्ता ने यह भी बताया कि ट्रायल कोर्ट ने जमानत देते समय न तो अपराध की गंभीरता पर विचार किया और न ही उनकी सक्रिय भूमिका का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने महिला आरोपी मुकेश देवी के मामले में दी गई जमानत का गलत रूप से समानता का आधार बना लिया, जबकि मुकेश देवी के मामले में मानवीय व लिंग आधारित आधारों पर राहत दी गई थी।
बचाव पक्ष की दलील
मामले में आरोपी रामप्रताप और कपिल की ओर से जमानत रद्द करने की याचिका का विरोध किया गया।
अधिवक्ताओं ने पैरवी करते हुए कहा कि दर्ज कराए गए मुकदमों में किसी भी व्यक्ति की विशेष भूमिका नहीं बताई गई है, बल्कि उन्हें केवल अवैध भीड़ (unlawful assembly) का हिस्सा बताया गया है, जिसमें आरोपी की मां मुकेश देवी भी शामिल थीं।
अधिवक्ता ने कहा कि निचली अदालत ने हिरासत की अवधि को उचित रूप से ध्यान में रखते हुए तथा खेत सिंह एवं अन्य बनाम राज्य सरकार फैसले में दिए गए सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए जमानत दी थी।
उन्होंने यह भी दलील दी कि जमानत रद्द करने का आदेश केवल असाधारण परिस्थितियों में ही दिया जा सकता है।
अधिवक्ता ने कहा कि जमानत मिलने के बाद आरोपियों ने न तो अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है और न ही किसी जमानत शर्त का उल्लंघन किया है।
हाईकोर्ट का फैसला
सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद Rajasthan Highcourt ने कहा कि अधिनस्थ अदालत द्वारा दिए गए दोनों जमानत आदेश कानूनी रूप से अस्थिर हैं और गंभीर अपराध की अनदेखी करते हैं।
Rajasthan Highcourt ने कहा कि अधिनस्थ अदालत ने समानता के सिद्धांत को गलत रूप से प्रयोग करते हुए दोनों आरोपियों को जमानत दी है।
Rajasthan Highcourt ने कहा कि दोनों आरोपियों को 21 जुलाई 2025 और 30 जुलाई 2025 को जमानत दी गई थी, जिसे पारित करते समय निचली अदालत ने केवल समानता के सिद्धांत का मशीनी पालन किया, बिना यह जांचे कि प्रत्येक आरोपी की भूमिका कितनी सक्रिय थी।
Rajasthan Highcourt ने केस रिकॉर्ड, केस डायरी, अंतिम रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, और सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए कहा कि मृतक विजय सिंह को सात चोटें लगीं, जिनमें से तीन गंभीर सिर की चोटें थीं।
मामले में मृत्यु का कारण “गंभीर सिर का आघात” बताया गया। सीसीटीवी फुटेज और खून लगी लोहे की रॉड की बरामदगी से स्पष्ट हुआ कि रामप्रताप और कपिल ने हमले में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
Rajasthan Highcourt ने कहा कि मुकेश देवी के मामले में जमानत केवल मानवीय और महिला होने पर दी गई थी, जबकि रामप्रताप और कपिल की भूमिका अत्यंत गंभीर और सक्रिय थी।
बिना विचार जमानत
Rajasthan Highcourt ने कहा कि अधिनस्थ अदालत ने इनके व्यक्तिगत कृत्यों पर विचार किए बिना जमानत दे दी, जिससे आदेश त्रुटिपूर्ण और बिना विचार के सिद्ध हुआ।
Rajasthan Highcourt ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जमानत को रद्द करना और प्रारंभिक चरण में जमानत खारिज करना अलग शक्तियां हैं। यदि आदेश साक्ष्यों की अनदेखी, विकृति, या गंभीर अपराध की गंभीरता पर विचार न करने से पारित किया गया हो, तो जमानत रद्द की जा सकती है।
Rajasthan Highcourt ने इसके साथ ही हत्या के आरोपी रामप्रताप और कपिल को बहरोड़ जिला अदालत द्वारा मिली हुई जमानत रद्द कर दी।
Rajasthan Highcourt ने दोनों आरोपियों को तत्काल रूप से सरेंडर करने के आदेश दिए।
जमानत रद्द कर दी गई, उनके जमानती बॉन्ड निरस्त किए गए और उन्हें निर्देश दिया कि वे तुरंत आत्मसमर्पण करें, अन्यथा ट्रायल कोर्ट उनकी गिरफ्तारी कर न्यायिक हिरासत में भेजेगा।