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Rajasthan Highcourt का अहम फैसला: जज विशेषज्ञ नहीं होते, उत्तर कुंजी में विवाद पर अदालतें संयम बरते, विवाद में भूमिका सीमित

Rajasthan Highcourt

REPORTABLE JUDGMENT, जयपुर, 15 अक्टूबर

Rajasthan Highcourt ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी परीक्षा परिणाम और उसकी उत्तर कुंजी (Answer Key) से जुड़े विवादों में अदालतों की भूमिका सीमित है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने कहा कि जब तक परीक्षा नियमों में पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) या उत्तरपत्रों की जांच की अनुमति न दी गई हो, तब तक अदालत को इस क्षेत्र में दखल नहीं देना चाहिए

पीठ ने कहा कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों — जैसे Ran Vijay Singh बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, U.P. Public Service Commission बनाम राहुल सिंह, और Vikesh Kumar Gupta बनाम राज्य राजस्थान — में पहले से तय सिद्धांतों पर आधारित है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले

Rajasthan Highcourt ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के “Ran Vijay Singh” मामले (2018) का हवाला देते हुए कहा कि यदि परीक्षा से संबंधित किसी अधिनियम या नियम में पुनर्मूल्यांकन का अधिकार स्पष्ट रूप से न दिया गया हो, तो अदालत को केवल दुर्लभ और असाधारण मामलों में ही हस्तक्षेप करना चाहिए।

जब उत्तर कुंजी स्पष्ट रूप से गलत हो और उसे सिद्ध करने में किसी प्रकार की तर्क प्रक्रिया की आवश्यकता न हो, तभी न्यायिक हस्तक्षेप उचित है।

Rajasthan Highcourt ने कहा कि अदालतों को किसी भी उम्मीदवार की उत्तर पुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन स्वयं नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह शैक्षणिक विशेषज्ञता का विषय है और शैक्षणिक मामलों में निर्णय का अधिकार विशेषज्ञों के पास ही रहना चाहिए।

अदालतों को संयम बरतने की आवश्यकता

Rajasthan Highcourt ने अपने फैसले में अदालतों को संयम बरतने की सलाह दी है।

Rajasthan Highcourt ने कहा कि सहानुभूति या दया के आधार पर अदालत को पुनर्मूल्यांकन के आदेश नहीं देने चाहिए।
यदि परीक्षा प्राधिकारी से कोई त्रुटि होती है, तो उससे सभी परीक्षार्थी समान रूप से प्रभावित होते हैं।

परीक्षा प्रक्रिया को केवल कुछ असंतुष्ट उम्मीदवारों की शिकायतों के आधार पर बाधित नहीं किया जा सकता।

Rajasthan Highcourt ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बार-बार न्यायिक हस्तक्षेप से परीक्षा परिणामों की अंतिमता पर अनिश्चितता बनी रहती है, जिससे न केवल अभ्यर्थी बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाले संस्थान भी असमंजस में रहते हैं।

जज विशेषज्ञ नहीं होते

Rajasthan Highcourt ने अपने फैसले में राहुल सिंह केस का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि अदालतों को इस प्रकार के मामलों में अत्यंत संयम बरतना चाहिए क्योंकि जज विशेषज्ञ नहीं होते और उन्हें विशेषज्ञ समिति के निर्णय पर भरोसा करना चाहिए

Rajasthan Highcourt ने कहा कि “U.P. Public Service Commission बनाम राहुल सिंह” (2018) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर कुंजी को चुनौती देने वाले उम्मीदवार को न केवल यह दिखाना होगा कि उत्तर गलत है, बल्कि यह भी सिद्ध करना होगा कि यह गलती इतनी स्पष्ट और प्रत्यक्ष है कि उसे सिद्ध करने में किसी प्रकार की तर्क प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है

विशेषज्ञ समिति की राय सर्वोपरि

Rajasthan Highcourt ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रश्न या उत्तर को लेकर विवाद होता है, तो मामला विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) के पास भेजा जाना चाहिए।

यदि विशेषज्ञ समिति यह पाती है कि मॉडल उत्तर गलत है, तो सही उत्तर के आधार पर पुनर्मूल्यांकन किया जा सकता है
हालांकि, यदि प्रश्न में अस्पष्टता या बहुविकल्पीय उत्तर की संभावना हो, तो ऐसे प्रश्नों को हटा देना ही उचित उपाय है।

Rajasthan Highcourt ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2024 में दिए गए Mahendra Kumar Jat बनाम राज्य राजस्थान के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अगर किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर दो प्रामाणिक स्रोतों में अंतर है, तो संदेह की स्थिति में लाभ परीक्षा प्राधिकारी को दिया जाना चाहिए, उम्मीदवार को नहीं।

पुस्तकों तक सीमित न रहें विशेषज्ञ

याचिकाकर्ता का तर्क था कि उत्तर कुंजी में बदलाव करते समय विशेषज्ञ समिति ने NCERT और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की पुस्तकों को नज़रअंदाज़ किया।

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि परीक्षा प्राधिकारी के FAQ के अनुसार आपत्ति केवल इन पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी वेबसाइटों और अन्य प्रमाणिक स्रोतों से ली गई जानकारी भी मान्य है।

इस प्रकार, यदि किसी प्रश्न का उत्तर भारत सरकार की वेबसाइट या राज्य अभिलेखागार से लिया गया है, तो उसे सही माना जाएगा।

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालत विशेषज्ञ की भूमिका नहीं निभा सकती।

ये हैं मामला

यह पुरा मामला राजस्थान पंचायती राज विभाग की V.D.O.के लिए सीधी भर्ती से जुड़ा हैं

6 सितंबर 2021 को इस मामले में विज्ञप्ति जारी करते हुए आवेदन आमंत्रित किए गए थे.

परीक्षा परिणाम को लेकर फाइनल आंसर की जारी कि गयी.

याचिकाकर्ताओं ने यह कहते हुए मामले को हाईकोर्ट में चुनौति दी कि दो प्रश्नों के उत्तर सही नहीं होने से उनके नंबर कम आए हैं.

राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 7 जून 2023 को 70 से अधिक याचिकाओं का निस्तारण करते हुए अधिकांश प्रश्नों में Expert Committee द्वारा सुझाए गए उत्तरों को सही माना, लेकिन प्रश्न संख्या 132 और 144 दो प्रश्नों को पुनः मूल्यांकन के लिए Expert Committee को भेजने और नई उत्तर कुंजी व चयन सूची तैयार करने का निर्देश दिया.

राजस्थान स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड अपील दायर एकलपीठ के फैसले को खंडपीठ में चुनौति देते हुए कहा कि Expert Committee विशेषज्ञों की राय पर आधारित है और हाईकोर्ट का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए।

ऐसे में
अंततः यह मामला केवल प्रश्न संख्या 132 और 144 के पुनर्मूल्यांकन और उच्च न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप की सीमा पर केन्द्रित है.

राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अब इस मामले में अपना फैसला सुनाया है।.

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