जस्टिस फरजंद अली को जन्मदिन पर देशभर से मिल रही हैं बधाई
जोधपुर, 15 दिसंबर
राजस्थान हाईकोर्ट की न्यायिक व्यवस्था को सशक्त बनाने वाले सम्मानित जजों में एक नाम ऐसा भी है, जिनका संपूर्ण जीवन विधि, न्याय और लोकहित के प्रति समर्पित रहा है.
15 दिसंबर 1968 को जन्मे जस्टिस फरजंद अली ने विधि के क्षेत्र में लगभग तीन दशकों तक अधिवक्ता के रूप में उल्लेखनीय सेवाएं देने के बाद 18 अक्टूबर 2021 को राजस्थान हाईकोर्ट के जज के रूप में पदभार ग्रहण किया.
राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में सेवारत जस्टिस फरजंद अली का आज जन्मदिन हैं. इस मौके पर उन्हे देश—प्रदेश के विधि जगत से लगातार बधाईयां प्रेषित हो रही हैं.
जस्टिस फरजंद अली ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात बी.ए. और एल.एल.बी. की उपाधि प्राप्त की.
विधि शिक्षा पूर्ण करने के बाद 6 सितंबर 1992 को वे बार काउंसिल ऑफ राजस्थान में अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए.
इसके साथ ही उन्होंने विधि व्यवसाय में अपने लंबे और प्रतिष्ठित करियर की शुरुआत की।
चित्तौड़गढ़ से जोधपुर तक का न्यायिक सफर
अधिवक्ता के रूप में अपने करियर के शुरुआती वर्षों में जस्टिस फरजंद अली ने चित्तौड़गढ़ न्यायिक क्षेत्र एवं आसपास के क्षेत्रों में प्रैक्टिस प्रारंभ की.
वर्ष 1992 से 2005 तक उन्होंने चित्तौड़गढ़ में रहते हुए विभिन्न प्रकार के मामलों में पक्षकारों का प्रतिनिधित्व किया.
इस दौरान उन्हें जमीनी स्तर पर न्यायिक व्यवस्था को समझने का व्यापक अवसर मिला और ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों की समस्याओं से वे प्रत्यक्ष रूप से रूबरू हुए.
वर्ष 2005 में उन्होंने चित्तौड़गढ़ से जोधपुर आकर राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ में प्रैक्टिस शुरू की.
हाईकोर्ट में प्रैक्टिस के दौरान उन्होंने आपराधिक, दीवानी, संवैधानिक और प्रशासनिक कानून से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में प्रभावी पैरवी की और शीघ्र ही एक विशेषज्ञ और भरोसेमंद अधिवक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई।
केंद्र और राज्य सरकार के लिए सेवाएं
अपने अधिवक्ता कैरियर के दौरान जस्टिस फरजंद अली ने विभिन्न सरकारी और अर्द्ध-सरकारी संस्थाओं का प्रतिनिधित्व किया.
वे केंद्र सरकार की ओर से हाईकोर्ट और विभिन्न ट्रिब्यूनल में स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में कार्यरत रहे.
इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), नगरपालिका बोर्ड और वक्फ बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के लिए भी विधिक सेवाएं प्रदान कीं.
सरकारी पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने न केवल कानून की तकनीकी समझ का परिचय दिया, बल्कि लोकहित और संवैधानिक मूल्यों को भी सदैव प्राथमिकता दी.
मध्यस्थता और लोकहित में योगदान
जस्टिस फरजंद अली ने केवल वाद-विवाद तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि वैकल्पिक विवाद समाधान के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई.
वे राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर स्थित मध्यस्थता केंद्र में एक प्रशिक्षित मध्यस्थ (Trained Mediator) के रूप में सेवाएं देते रहे.
इस भूमिका में उन्होंने अनेक मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान करवाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे न्यायिक प्रणाली पर बोझ कम हुआ और पक्षकारों को त्वरित न्याय मिला।
अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में जिम्मेदारी
हाईकोर्ट में जज नियुक्त होने से पूर्व जनवरी 2019 में उन्हे राज्य सरकार द्वारा सरकारी अधिवक्ता-सह-अपर महाधिवक्ता के पद पर नियुक्त किया गया.
इस दायित्व के तहत उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट की प्रधान पीठ, जोधपुर में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व किया.
इस अवधि में उन्होंने आपराधिक मामलों के साथ-साथ दीवानी, संवैधानिक और जनहित याचिकाओं (PIL) में भी राज्य सरकार का पक्ष प्रभावी रूप से रखा।
सरकारी अधिवक्ता के रूप में उनके कार्यकाल को विधिक स्पष्टता, निष्पक्ष दृष्टिकोण और संवैधानिक मर्यादाओं के पालन के लिए जाना जाता है। उन्होंने नीतिगत और संवेदनशील मामलों में भी संतुलित एवं जिम्मेदार पक्ष पेश किया.
चलती कोर्ट में इस्तीफा
जस्टिस फरजंद अली को एक सम्मानित अधिवक्ता के साथ गौरवशाली अधिवक्ता के तौर पर भी याद किया जाता हैं.
अतिरिक्त महाधिवक्ता रहने के दौरान एक मामले के दौरान सरकार के रवैये के चलते चलती कोर्ट में ही अपने पद से इस्तिफा दे दिया था.
हनुमान बेनीवाल की पार्टी से जुड़े दो विधायकों के इस मामले में सरकार के लोकहित के स्टैंड से अलग जाकर स्टैंड लेना तत्कालिन अतिरिक्त महाधिवक्ता फरजंद अली को गंवारा नहीं हुआ, जिसके बाद उन्होने चलती कोर्ट में ही अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी.
इस मामले को अदालत ने अपने फैसले में भी जिक्र किया था.
न्यायाधीश के रूप में नई भूमिका
लंबे, विविध और समृद्ध विधिक अनुभव के आधार पर 18 अक्टूबर 2021 को उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत किया गया.
हाईकोर्ट जज के रूप में वे कानून के शासन, न्यायिक निष्पक्षता और नागरिक अधिकारों की रक्षा के प्रति पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं.
उनके कई फैसले देशभर में चर्चा में रहे हैं जिनमें हाल ही में पूर्व चीफ जस्टिस प्रकाश चंद टाटिया के पेंशन से जुड़ा विवाद भी शामिल हैं.
जस्टिस फरजंद अली का जीवन इस बात का उदाहरण है कि निरंतर परिश्रम, विधि के प्रति समर्पण और लोकहित की भावना के साथ न्यायिक व्यवस्था में उत्कृष्ट योगदान दिया जा सकता है.
उनका न्यायिक सफर युवा अधिवक्ताओं और विधि छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो कानून को केवल पेशा नहीं बल्कि समाज सेवा का माध्यम मानते हैं.