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कोटकासिम पंचायत समिति विनोद कुमारी संगवान का निलंबन बरकरार, Rajasthan Highcourt ने याचिका की खारिज

Justice Sanjeet Purohit

जयपुर, 17 अक्टूबर

कोटकासिम पंचायत समिति की प्रधान डॉ. विनोद कुमारी सांगवान को Rajasthan Highcourt से बड़ा झटका लगा है।

Rajasthan Highcourt की जयपुर पीठ ने एक अहम फैसले में अलवर जिले की कोटकासिम पंचायत समिति की प्रधान डॉ. विनोद कुमारी संगवान के निलंबन को सही ठहराया है।

जस्टिस संजीत पुरोहित की एकलपीठ ने रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए विनोद कुमारी सांगवान की याचिका को खारिज करते हुए उनके खिलाफ की गई चार्जशीट और निलंबन आदेश को विधिसम्मत बताया है।

Rajasthan Highcourt ने कहा कि निलंबन आदेश में किसी प्रकार की मनमानी नहीं की गई है। अदालत ने यह भी कहा कि एक लोक प्रतिनिधि से उच्च नैतिक आचरण की अपेक्षा की जाती है, और इस मामले में उनका व्यवहार “अपमानजनक एवं अस्वीकार्य” था।

ये है मामला

डॉ. विनोद कुमारी संगवान 30 अक्टूबर 2021 को कोटकासिम पंचायत समिति की प्रधान चुनी गई थीं।
21 अप्रैल 2025 को ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर संजय यादव की शिकायत पर उनके खिलाफ राजकार्य में बाधा सहित अधिकारी को धमकाने का मुकदमा दर्ज कराया गया।

इसके बाद अलवर जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई, जिसने 24 अप्रैल 2025 को रिपोर्ट देकर उन्हें दुर्व्यवहार और अपमानजनक आचरण का दोषी माना।

राज्य सरकार ने इस रिपोर्ट के आधार पर 28 अप्रैल 2025 को चार्जशीट जारी कर उन्हें निलंबित कर दिया।

इस दौरान पहले निलंबन आदेश को अदालत में चुनौती देने पर सरकार ने उसे वापस ले लिया।

Rajasthan Highcourt से मिले स्टे आदेश के बाद विनोद कुमारी ने पदभार ग्रहण किया था, लेकिन दोपहर में ही सरकार ने नए आदेश जारी कर उन्हें पद से हटा दिया।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता निलंबित प्रधान विनोद कुमारी संगवान की ओर से अधिवक्ता प्रदीप कलवाणिया ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को बिना पर्याप्त कारण बताए दोबारा निलंबन आदेश जारी किया गया।

याचिका में कहा गया कि प्राथमिक जांच एकतरफा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ थी। किसी भी चुने हुए प्रतिनिधि को सरकारी कर्मचारी की तरह निलंबित नहीं किया जा सकता।

राज्य सरकार की दलील

मामले में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कपिल प्रकाश माथुर ने कहा कि निलंबित प्रधान सांगवान का आचरण “लोक प्रतिनिधि के पद की गरिमा के विपरीत” रहा है।

सरकार ने कहा कि जांच समिति ने उन्हें अपनी सफाई देने का पर्याप्त अवसर दिया, पर उन्होंने उस जांच प्रक्रिया में भाग नहीं लिया।

सरकार ने कहा कि उनके पद पर रहते हुए साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका थी।

हाईकोर्ट का आदेश

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस संजीत पुरोहित की एकलपीठ ने कहा कि इस मामले में जांच प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत की गई और निलंबन से पहले चार्जशीट जारी की जा चुकी थी।

अदालत ने कहा कि केवल एफआईआर लंबित होने से विभागीय कार्रवाई पर रोक नहीं लगती।

अदालत ने यह भी कहा कि एक लोक प्रतिनिधि से उच्च नैतिक आचरण की अपेक्षा की जाती है, और इस मामले में उनका व्यवहार “अपमानजनक एवं अस्वीकार्य” था।

Rajasthan Highcourt ने डॉ. विनोद कुमारी सांगवान की याचिका को खारिज करते हुए उनके खिलाफ जांच को निष्पक्ष रूप से जारी रखने का आदेश दिया है।

को अस्वीकृत करते हुए अदालत ने कहा कि जांच निष्पक्ष रूप से जारी रहेगी। इसके साथ ही सभी लंबित प्रार्थना पत्र भी निस्तारित कर दिए गए।

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