जोधपुर। राजस्थान हाई कोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में शुक्रवार को अंतिम कार्यदिवस के मौके पर अधिवक्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया.
अंतिम कार्यदिवस पर 1348 जमानत याचिकाएं एक साथ सूचीबद्ध किए जाने से अधिवक्ताओं ने विरोध जताया.
इसको लेकर अधिवक्ताओं ने स्वेच्छा से न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया और हाई कोर्ट प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
अधिवक्ता संगठनों का कहना है कि वे हर माह के अंतिम कार्यदिवस को एकीकृत हाई कोर्ट (Integrated High Court) की मांग को लेकर प्रतीकात्मक रूप से कार्य बहिष्कार करते हैं.

परंपरागत रूप से इस दिन मुकदमों की सूची सीमित रखी जाती है, ताकि अधिवक्ता शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को रख सकें.
इसके बावजूद इस बार अंतिम कार्यदिवस पर 1348 जमानत याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध कर दिया गया, जिसे अधिवक्ताओं ने अनुचित करार दिया।
शुक्रवार सुबह जैसे ही न्यायालय का समय शुरू हुआ, सैकड़ों अधिवक्ता हाई कोर्ट परिसर में मुख्य डोम के नीचे एकत्रित हो गए.
अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और जोरदार नारेबाजी की.
इस दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ भी नारे लगाए गए, जिससे माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।
अधिवक्ताओं का कहना है कि एकीकृत हाई कोर्ट की मांग वर्षों पुरानी है, लेकिन बार-बार ज्ञापन और शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है.
ऐसे में जब अंतिम कार्यदिवस जैसे संवेदनशील दिन पर भी भारी संख्या में मामलों की सूची जारी कर दी जाती है, तो यह अधिवक्ताओं की भावनाओं की अनदेखी है।
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जमानत याचिकाओं की इतनी बड़ी संख्या में सूचीबद्धता से न केवल अधिवक्ताओं पर अनावश्यक दबाव पड़ता है, बल्कि न्यायिक कार्य की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है.
उन्होंने मांग की कि भविष्य में अंतिम कार्यदिवस पर मुकदमों की सूची सीमित रखी जाए और एकीकृत हाई कोर्ट की मांग पर गंभीरता से विचार किया जाए।