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दो जमानती लाने की शर्त से 14 साल से जेल में बंद कैदी पैरोल पर नहीं हो पाया रिहा, अब Highcourt ने बदली शर्त

जयपुर, 3 अक्टूबर।

जेल में करीब 14 साल 7 माह की अवधि बिताने के बाद अच्छे व्यवहार के चलते मिली स्थाई पैरोल के बावजूद एक कैदी जेल से बाहर नहीं आ पाया.

स्थायी पैरोल के साथ लगी एक शर्त के चलते कैदी दो जमानतदारों की व्यवस्था नहीं कर सकता.

Rajasthan Highcourt ने अब आजीवन कारावास की सजा काट रहे इस कैदी को उसकी कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए स्थायी पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया.

अदालत ने पहले दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए कैदी को केवल ₹50,000 के निजी मुचलके (Personal Bond)पर छोड़े जाने की अनुमति दी है.

मामला क्या है

याचिकाकर्ता को गंभीर अपराध के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील भी खारिज होने के बाद अब तक वह 14 साल 7 महीने से अधिक की जेल की सज़ा काट चुका है.

उसके अच्छे व्यवहार के चलते कुछ समय पूव्र उसे ओपन एयर कैंप, सांगानेर​ शिफ्ट कर दिया गया.

उसके बाद भी उसके व्यवहार और जेल मेन्यूअल के अनुसार स्थायी पैरोल की अर्जी को 8 अगस्त 2025 को मंजूर कर लिया गया. लेकिन दो जमानतदार (₹50,000 प्रत्येक) और एक निजी मुचलका भरने की शर्त पर ही रिहाई का आदेश दिया गया था.

आर्थिक स्थिति पर अदालत की नजर

याचिकाकर्ता भीलवाड़ा निवासी सांवरमल के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि कैदी की कोई संपत्ति नहीं है और उसकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, इस कारण वह दो जमानतदार प्रस्तुत नहीं कर सकता.

अदालत में कहा गया कि हालांकि, वह व्यक्तिगत मुचलका भरने को तैयार है.

मामले में सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष द्वारा पेश कि गयी रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट किया गया कि याचिकाकर्ता के नाम कोई संपत्ति दर्ज नहीं है.

हाईकोर्ट का फैसला

Highcourt ने रिपोर्ट और कैदी के जेल में अच्छे आचरण को ध्यान में रखते हुए आदेश में संशोधन करना मंजूर किया.

Highcourt ने याचिकाकर्ता को केवल ₹50,000 के निजी मुचलका भरने पर स्थायी पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया हैं.

Highcourt ने पूर्व में लगाई गयी दो जमानतदार पेश करने की शर्त को हटा दिया गया.

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