पटवारी भर्ती में चयन के बावजूद नाम निरस्त करने पर हाईकोर्ट ने सरकार और RSMSSB को जारी किया नोटिस , जनरल-विधवा श्रेणी का एक पद रिक्त रखने के निर्देश
जोधपुर। राराजस्थान हाईकोर्ट ने पटवारी भर्ती प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया है कि विवाह के समय आयु कम होने के आधार पर किसी महिला को विधवा आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता, यदि उसका विवाह कभी चुनौती नहीं दिया गया हो और वह कानूनन वैध माना जाता हो।
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी खारिज किए जाने को prima facie अस्थिर और नियमों के विपरीत मानते हुए राज्य सरकार और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को नोटिस जारी करते हुए जनरल-विधवा श्रेणी के अंतर्गत एक पद रिक्त रखने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता प्रीति गुर्जर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया हैं.
क्या है पूरा मामला
राजसमंद जिले के नाथद्वारा निवासी प्रीति गुर्जर ने पटवारी पद हेतु आवेदन किया था।
उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के साथ-साथ जनरल–विधवा श्रेणी में भी आरक्षण का दावा किया। विज्ञापन के अनुसार चयन प्रक्रिया में भाग लेने के बाद प्रीति गुर्जर को मेधावी पाते हुए अस्थायी रूप से चयनित सूची में शामिल किया गया।
हालांकि, 31 दिसंबर 2025 को पारित एक सामान्य आदेश के जरिए चयन बोर्ड ने उनका नाम सूची से हटा दिया।
कारण बताया गया कि विवाह के समय उनकी आयु विवाह योग्य नहीं थी, इसलिए वे विधवा आरक्षण की पात्र नहीं हैं।
इसी निर्णय को चुनौती देते हुए प्रीति गुर्जर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आयुषी सोलंकी ने हाईकोर्ट के समक्ष तर्क रखा कि याचिकाकर्ता विधिक रूप से विधवा हैं।
उनका विवाह कभी किसी अदालत में चुनौती नहीं दिया गया। भर्ती विज्ञापन में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके अनुसार कम उम्र में विवाह करने वाली विधवा को आरक्षण से वंचित किया जा सके।
उम्मीदवार की पात्रता का मूल्यांकन भर्ती नियमों और विज्ञापन की शर्तों के अनुसार होना चाहिए, न कि ऐसे आधार पर जो विज्ञापन में उल्लेखित ही न हों।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 5(iii) और धारा 12 का विस्तृत उल्लेख किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि कानून के अनुसार दुल्हन की विवाह योग्य आयु 18 वर्ष और दूल्हे की 21 वर्ष निर्धारित है, लेकिन यदि इस शर्त का उल्लंघन होता भी है तो ऐसा विवाह शून्य नहीं बल्कि शून्यकरणीय (Voidable) होता है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा विवाह तभी निरस्त किया जा सकता है, जब संबंधित पक्ष द्वारा इसे चुनौती दी जाए। वर्तमान मामले में विवाह को कभी चुनौती नहीं दी गई, इसलिए वह सभी प्रयोजनों के लिए वैध माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि विवाह के समय आयु कम होने का तथ्य, महिला के विधवा होने की स्थिति या विधवा आरक्षण की पात्रता को प्रभावित नहीं करता।
विज्ञापन शर्तों पर भी उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने भर्ती विज्ञापन की शर्तों को लेकर कहा कि कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि यदि किसी विधवा का विवाह कम उम्र में हुआ हो, तो वह आरक्षण की पात्र नहीं होगी।
विज्ञापन की शर्तों के अनुसार, विधवा आरक्षण के लिए केवल विधवा होना ही आवश्यक शर्त है, इसके अतिरिक्त कोई और अर्हता निर्धारित नहीं की गई।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब विज्ञापन में ऐसी कोई शर्त नहीं है, तो चयन बोर्ड द्वारा इस आधार पर उम्मीदवारी खारिज करना prima facie नियमविरुद्ध और अस्थिर प्रतीत होता है।
अंतरिम राहत और आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को पटवारी भर्ती में जनरल-विधवा श्रेणी के अंतर्गत एक पद रिक्त रखने का आदेश दिया हैं.
इसके साथ ही सरकार और बोर्ड को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब पेश करने का आदेश दिया हैं.