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National Workshop on New Criminal Laws : नए कानूनों ने आसान किया अदालतों का काम, बारिकियां समझने के लिए जरूरी हैं कि हम अपडेट रहें

जयपुर, 11 अक्टूबर

देश में लागू हुए नए अपराधिक कानूनों को लेकर राजस्थान विश्वविद्यालय में ‘न्यू क्रिमिनल लॉ’ विषय पर नेशनल वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा हैं.

लीगल संस्थान और राजस्थान विश्वविद्यालय के विधि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का आयोजन राजस्थान विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के सेमिनार हॉल में आयोजित हुआ.

National Workshop में IULER गोवा के कुलपति प्रो. (डॉ.) आर. वेंकट राव ने नए अपराधिका कानूनों पर जानकारी देते हुए कई बारिकियों पर चर्चा की.

वर्कशॉप में क्राइस्ट विश्वविद्यालय, बेंगलुरु की सहायक प्रोफेसर अस्वथी मधुकुमारन ने शैक्षणिक सत्र को संबोधित किया.

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रुप में प्रोफेसर डॉ. आर. वेंकट राव रहे, जो “इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च” के कुलपति हैं.

प्रोफेसर राव ने ऑनलाइन जुड़ कर वर्क शॉप को संबोधित किया.

कार्यक्रम की शुरूआत राजस्थान विश्वविद्यालय की डॉ. संजुला थानवी के स्वागत भाषण कि गयी. अपने संबोधन में न्याय और विधिक शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कानून केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि उन व्यक्तियों के विचारों और कर्मों से जीवंत होता है, जो इसे ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपनाते हैं.

उद्घाटन सत्र को राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस वी एस दवे, जस्टिस जे के रांका, राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष महेन्द्र शांडिल्य और सच बेधड़क TV के सीईओ मेघराज सिंह रतनू ने भी संबोधित किया.

जस्टिस वी एस. दवे ने लॉ स्टूडेंट को संबोधित करते हुए कहा कि न्यायपालिका में योग्य और सक्षम अधिवक्ताओं की आवश्यकता है.

उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि सीधे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जाने की बजाय अपने करियर की शुरुआत ट्रायल कोर्ट्स से करें, क्योंकि यहीं से कानूनी अभ्यास की वास्तविक नींव रखी जाती है.

समारोह में जस्टिस जे के रांका ने भी अपने अनुभव साझा किए और विद्यार्थियों को याद दिलाया कि समर्पण, निष्ठा और अनुशासन ही विधिक पेशे में सफलता के मुख्य स्तंभ हैं.

पूर्व IAS अधिकारी और “सच बेधड़क” के सीईओ मेघराज सिंह रतनू ने कार्यशाला को संबोधित किया. उन्होने अपने संबोधन में कहा कि “जब भी कोई कानून बनता है, वह जिस व्यक्ति के लिए होता है, उसी तक नहीं पहुंच पाता है.

हमें ऐसा कोई मैकेनिज़्म बनाना होगा जिससे कानून की जानकारी आम व्यक्ति तक सरलता से पहुंचे.

” उन्होंने न्यायिक प्रणाली की विलंबिता पर भी चिंता जताई और कहा कि आम आदमी को कानूनी जानकारी सुलभ कराना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है.

उद्घाटन सत्र के बाद प्रथम विशेष शैक्षणिक सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. अस्वथी मधुकुमार ने नए आपराधिक कानूनों पर एक जानकारीपूर्ण सत्र का संचालन किया, जिसमें उन्होंने संगठित अपराध, आतंकवाद, वोयूरिज़्म और झूठे विवाह के वादों के खिलाफ कानूनी उपायों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की.

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