जोधपुर, 9 अक्टूबर
Rajasthan Highcourt ने पाली जिले के सिरियारी थाना क्षेत्र में नाबालिग दो मासूम भाई-बहन की हत्या और दुष्कर्म के मामले में आरोपी अर्जुन सिंह को दी गई मृत्युदंड की सजा रद्द करते हुए बरी करने का फैसला सुनाया है।
जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने पॉक्सो कोर्ट, पाली द्वारा 11 दिसंबर 2023 को दिए गए फैसले को पलटते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ कोई ठोस और निर्णायक सबूत पेश नहीं कर सका और पूरा मामला कमजोर परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था।
Highcourt की सख्त टिप्पणी
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में यह भी स्पष्ट किया कि धारा 313 दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत आरोपी का बयान सजा का आधार नहीं बन सकता, जब तक कि अभियोजन पक्ष स्वतंत्र रूप से आरोप साबित न करे।
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अत्यंत आश्चर्यजनक है कि ऐसे मामले में, जहाँ अदालत को अभियोजन की कहानी में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, ट्रायल कोर्ट ने मृत्युदंड जैसी कठोर सजा सुना दी।
हाईकोर्ट ने 11 दिसंबर 2023 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यदि आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए।
वैज्ञानिक साक्ष्यों पर सवाल
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में ट्रायल कोर्ट के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि डीएनए प्रोफाइलिंग करने वाले वैज्ञानिक विशेषज्ञ की गवाही के बिना वैज्ञानिक रिपोर्ट को साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस और भरोसेमंद सबूत पेश करने में असफल रहा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और अधूरी वैज्ञानिक जांच के आधार पर किसी आरोपी को मृत्युदंड देना न्यायसंगत नहीं है।
अदालत ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण “ब्लंट फोर्स” (कठोर वस्तु से लगी चोटें) बताया गया था, जबकि पुलिस ने जो आयरन कूट (पेड़ की शाखाएं काटने का औजार) बरामद किया, वह तेजधार हथियार था।
इससे अभियोजन की कहानी पूरी तरह खारिज होती है।
ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी प्राकृतिक जीवन की सजा
पाली की पॉक्सो कोर्ट संख्या-03 के विशेष न्यायाधीश ने 11 दिसंबर 2023 को फैसला सुनाते हुए आरोपी को हत्या के मामले में मृत्युदंड की सजा और
नाबालिग के साथ दुष्कर्म कर हत्या के मामले में प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
सरकार के रेफरेंस पर सुनवाई
ट्रायल कोर्ट द्वारा मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद राज्य सरकार ने Highcourt को रेफरेंस भेजकर सजा पर मुहर लगाने का अनुरोध किया।
राज्य सरकार की ओर से मृत्युदंड की पुष्टि के लिए रेफरेंस प्रस्तुत किया गया, वहीं आरोपी ने सजा के खिलाफ अपील दायर की थी।
Rajasthan Highcourt ने सरकार के रेफरेंस और दोषी की अपील — दोनों पर एक साथ सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष घटना के किसी भी पहलू को ठोस साक्ष्य से जोड़ने में असफल रहा है। न तो कोई प्रत्यक्षदर्शी था और न ही अपराध से आरोपी का सीधा संबंध सिद्ध हुआ है।
हाईकोर्ट ने माना कि ऐसे गंभीर मामलों में केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि उचित नहीं है।
Rajasthan Highcourt ने पॉक्सो कोर्ट के 11 दिसंबर 2023 के आदेश को निरस्त करते हुए अर्जुन सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
ये है मामला
पाली जिले के सिरियारी थाना क्षेत्र में 1 मई 2023 को 13 वर्षीय बालिका और उसके 10 वर्षीय भाई के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
दोनों बकरियां चराने निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। दो दिन बाद दोनों के शव अलग-अलग स्थानों से बरामद हुए।
पुलिस ने जांच के दौरान अर्जुन सिंह को 9 मई 2023 को गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम की धाराओं में चार्जशीट दायर की।