जोधपुर, 19 नवंबर
जोधपुर महानगर की स्थायी लोक अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बीमाधारक के निधन के बाद बैंक उसके वारिसों से ऋण की वसूली नहीं कर सकता।
अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक PNB को निर्देश दिया है कि बीमाधारक से ऋण के समय लिए गए सभी मूल दस्तावेज उसके वारिसों को वापस लौटाए जाएँ।
यह आदेश स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष सुकेश कुमार जैन और सदस्य माणकलाल चाण्डक की खंडपीठ ने रितेश सोलंकी की ओर से दायर आवेदन पर दिया है।
लोन पर थी बीमा पॉलिसी
प्रार्थी रितेश सोलंकी की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता गजेन्द्र पंवार ने अदालत को बताया कि प्रार्थी के दिवंगत पिता राजेश्वर सोलंकी ने पंजाब नेशनल बैंक से होम लोन और टॉप-अप लोन लिया था।
लोन की सुरक्षा के लिए बैंक ने उनके नाम से लोन प्रोटेक्शन इंश्योरेंस पॉलिसी जारी करवाई थी।
3 अगस्त 2024 को बीमाधारक यानी प्रार्थी के पिता का निधन हो गया।
प्रार्थी रितेश सोलंकी ने बीमा कंपनी के समक्ष मृत्यु लाभ (डेथ क्लेम) का दावा प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने प्रीमियम राशि लौटाते हुए दावा खारिज कर दिया।
बीमारी छिपाने का आरोप
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की ओर से कहा गया कि बीमित व्यक्ति पहले से हृदय रोग, डायबिटीज से पीड़ित था तथा वर्ष 2016 में उसकी एंजियोप्लास्टी कराई गई थी।
बीमा कंपनी का कहना था कि बीमा के समय यह जानकारी प्रपोज़ल फॉर्म में नहीं दी गई।
कंपनी ने दावा किया कि तथ्यों को छिपाने के कारण मृतक के पुत्र का दावा खारिज किया गया है।
बैंक का पक्ष
बैंक की ओर से अदालत को बताया गया कि पॉलिसी बीमा कंपनी के अधिकृत एजेंट ने जारी की थी और ऋण की अदायगी रुकने से खाते में भारी बकाया हो गया है।
लोक अदालत का फैसला
सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद स्थायी लोक अदालत ने यह माना कि बीमा कंपनी ने प्रपोज़ल फॉर्म ही पेश नहीं किया, जो दावा अस्वीकार करने का आधार नहीं बन सकता।
अदालत ने कहा कि न तो बीमित के हस्ताक्षरयुक्त कोई फॉर्म रिकॉर्ड पर उपलब्ध है और न ही कोई ऐसा दस्तावेज जिसमें गलत जानकारी दर्ज हो।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कंपनी ने पॉलिसी जारी करते समय बीमाधारक की स्वास्थ्य जांच भी नहीं करवाई थी।
इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि तथ्यों के छुपाव का आरोप सिद्ध नहीं होता, इसलिए दावा खारिज करना उचित नहीं है।
वसूली रोकने और दस्तावेज लौटाने के आदेश
जोधपुर महानगर की स्थायी लोक अदालत ने प्रार्थी का प्रार्थना-पत्र स्वीकार करते हुए मृतक बीमाधारक के पुत्र से आगे कोई ऋण वसूली न करने के आदेश दिए हैं।
साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि बैंक द्वारा लिए गए सभी मूल दस्तावेज तुरंत प्रार्थी को लौटा दिए जाएँ।
अदालत ने बीमा कंपनी और बैंक को प्रार्थी को ₹5,000 परिवाद व्यय देने के भी आदेश दिए हैं।