जयपुर, 19 सितंबर।
राजस्थान हाईकोर्ट ने पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की ओर से दायर जनहित याचिका पर यूडीएच सचिव, पाँच बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशकों और 23 अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा कि बिजली कंपनियों में नियुक्त इंजीनियरों को नगरीय विकास विभाग में क्यों नियुक्त किया गया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पांच बिजली कंपनियों ने कनिष्ठ अभियंताओं की भर्ती करने के बाद नियमों का उल्लंघन करते हुए उन्हें नगरीय विकास विभाग में समाहित कर दिया।
याचिका में कहा गया कि ऐसी नियुक्तियां राजस्थान सेवा नियमों और RAPSAR Act के तहत अवैध हैं।
संस्था की ओर से अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी और डॉ. टी.एन. शर्मा ने अदालत को बताया कि नियमों के अनुसार केवल सरप्लस होने की स्थिति में ही समाहित (Absorption) संभव है, लेकिन सीधे किसी निगम या बोर्ड से सरकार में नियुक्ति करना नियमों के खिलाफ है।
याचिका में कहा गया कि ये नियुक्तियां सरकार ने पिछले दरवाजे से की हैं।
बहस सुनने के बाद जस्टिस एस.पी. शर्मा और जस्टिस संजीव पुरोहित की खंडपीठ ने यूडीएच सचिव सहित कुल 31 अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
हाईकोर्ट ने यूडीएच सचिव को अगली सुनवाई पर शपथपत्र पेश करने के आदेश दिए हैं। ऐसा न करने पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होकर स्पष्टीकरण देना होगा।