जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा प्रत्येक माह के दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित किए जाने के निर्णय के खिलाफ जोधपुर की प्रमुख बार एसोसिएशनों ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई है.
हाल ही में जैसलमेर में आयोजित हुई राजस्थान हाईकोर्ट की फुल कोर्ट की बैठक में कार्यदिवस बढाने को लेकर फैसला लेने की जानकारी सामने आई थी.
जिसके बाद से जोधपुर और जयपुर हाईकोर्ट के अधिवक्ता इस फैसले का विरोध कर रहे हैं.

राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर और राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर के अध्यक्षों ने इस संबंध में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को संयुक्त पत्र भेजकर निर्णय को वापस लेने की मांग की है.
पत्र में बार पदाधिकारियों ने कहा कि यह फैसला एकतरफा है और इसे लेते समय अधिवक्ताओं से कोई परामर्श नहीं किया गया।.

समानता की भावना के विपरित
बार एसोसिएशन ने फुल कोर्ट के इस फैसले को मनमाना और अधिवक्ताओं की वास्तविक परिस्थितियों के प्रति असंवेदनशील बताया हैं.
बार का कहना है कि न्याय व्यवस्था में बार और बेंच को समान भागीदार माना जाता है, लेकिन इस प्रकार का निर्णय उस भावना के विपरीत है.
बार एसोसिएशनों ने तर्क दिया कि अधिवक्ता पहले से ही न्यायालयीन कार्य, ड्राफ्टिंग, क्लाइंट मीटिंग, यात्रा और सामाजिक दायित्वों के कारण अत्यधिक कार्यभार में हैं.
शनिवार का दिन अधिवक्ताओं के लिए परिवार, स्वास्थ्य, पेशेवर उन्नयन और सामाजिक जिम्मेदारियों के लिए एकमात्र समय होता है। इसे भी कार्यदिवस बना देना अधिवक्ताओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा.
फैसले को विड्रा करने की मांग
पत्र में यह भी कहा गया हैं कि राज्य सरकार के अधिकांश कर्मचारी पांच दिवसीय कार्य सप्ताह का पालन कर रहे हैं, ऐसे में न्यायालयों का कैलेंडर भी राज्य सरकार के कार्यदिवसों के अनुरूप होना चाहिए.
बार का मत है कि थके हुए और दबाव में काम कर रहे अधिवक्ता न्याय की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं, जिसका प्रत्यक्ष नुकसान पक्षकारों और न्याय प्रणाली को होगा।
अंत में बार एसोसिएशनों ने इस निर्णय को बार की गरिमा और स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए इसे अविलंब वापस लेने तथा बार–बेंच संबंधों की मजबूती के लिए आपसी संवाद से निर्णय लेने की अपील की है.