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जयपुर में नवनियुक्त मध्यस्थों के लिए RLSA का एक दिवसीय रोल-प्ले प्रशिक्षण सत्र आयोजित

One-Day Role-Play Training Session Organised for Newly Appointed Mediators in Jaipur

जयपुर। प्रदेश में वैकल्पिक विवाद निवारण (ADR) व्यवस्था को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक बनाने की दिशा में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण RLSA की ओर से शनिवार नवनियु​क्त मध्यस्थों के लिए एक दिवसीय रोल-प्ले आधारित प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया.

मध्यस्थता एवं कॉन्सिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी (MCPC), सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली के निर्देश पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण RLSA की ओर से जयपुर महानगर स्थित एडीआर कॉन्फ्रेंस हॉल में कार्यशाला का आयोजन किया गया.

प्रशिक्षण सत्र का उद्घाटन राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण RLSA के सदस्य सचिव हरिओम शर्मा ने द्वी प प्रज्ज्वलित कर किया. उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सदस्य सचिव हरिओम शर्मा ने कहा कि न्यायिक प्रणाली पर बढ़ते बोझ को कम करने और पक्षकारों को शीघ्र व सौहार्दपूर्ण समाधान उपलब्ध कराने में मध्यस्थता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने नवनियुक्त मध्यस्थों से अपेक्षा जताई कि वे संवेदनशीलता, निष्पक्षता और संवाद कौशल के साथ विवाद समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।

सदसय सचिव ने कहा कि रालसा के कार्यकारी अध्यक्ष और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के निर्देशानुसार मध्यस्थों को मजबूत करने की दिशा में ​कई कदम उठाए जा रहे हैं.

सदस्य सचिव ने अपने संबोधन में जानकारी दी कि मध्यस्था सफल होने पर प्रत्येक मामले में अब 3500 की जगह 7000 रूपए की प्रोत्साहित राशि मध्यस्थ को दी जाएगी.

मध्यस्थता के सिद्धांत और चरणों पर सत्र

उद्घाटन के पश्चात प्रशिक्षण सत्रों की श्रृंखला प्रारंभ हुई, जिनमें मध्यस्थता की मूल अवधारणाओं, इसके विभिन्न चरणों तथा मध्यस्थ की भूमिका और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि मध्यस्थता केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवाद, विश्वास और समाधान की कला है। विशेष रूप से यह रेखांकित किया गया कि एक प्रभावी मध्यस्थ को कानूनी ज्ञान के साथ-साथ संचार कौशल, भावनात्मक समझ और तटस्थ दृष्टिकोण भी विकसित करना आवश्यक है।

रोल-प्ले के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण

प्रशिक्षण का मुख्य आकर्षण रोल-प्ले आधारित अभ्यास रहे, जिनके माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों के निकट अनुभव प्रदान किया गया।

इस दौरान तीन प्रमुख रोल-प्ले कराए गए— मीना बनाम सुधीर, रॉबर्ट बनाम अरुण और राम बनाम सुनील.इन अभ्यासों में प्रतिभागियों ने पक्षकारों और मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

प्रत्येक रोल-प्ले के बाद वरिष्ठ प्रशिक्षकों द्वारा विस्तृत अवलोकन, आलोचनात्मक विश्लेषण तथा प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए गए।

प्रशिक्षकों ने यह बताया कि किस प्रकार संवाद की शैली, प्रश्न पूछने की तकनीक और समाधान की दिशा तय करने की रणनीति विवाद के परिणाम को प्रभावित करती है।

वरिष्ठ प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन

प्रशिक्षण सत्र में वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी नीरज कुमार भारद्वाज और बालकृष्ण गोयल ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मध्यस्थता में सफलता का आधार पक्षकारों का विश्वास जीतना और उन्हें समाधान की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाना है। प्रशिक्षकों ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्यस्थ का दायित्व किसी एक पक्ष के पक्ष में निर्णय देना नहीं, बल्कि दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान तक पहुंचाना है।

कार्यक्रम में रालसा के निदेशक नीरज कुमार भारद्वाज, संयुक्त सचिव योगेश शर्मा, विशेष सचिव (मध्यस्थता) महेंद्र प्रताप बेनीवाल, उप सचिव प्रथम रश्मि नवल, उप सचिव द्वितीय अनुभूति मिश्रा, उप सचिव (एपी एवं एडीआर) कोमल मोटयार सहित रालसा के अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

सेवानिवृत अधिकारी भी बने मध्यस्थ

इस एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 57 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें 26 अधिवक्ता, 18 सेवानिवृत्त एवं सेवारत अधिकारी, और 13 सेवारत न्यायिक अधिकारी शामिल रहे।

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