जोधपुर, 29 अगस्त।
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने विकलांगता प्रमाणीकरण मेडीकल कॉलेज’ से विकलांग आरक्षण के लिए पात्र घोषित किये गए याचिकाकर्ता को भी NEET UG Counselling 2025 Phase 2 में शामिल करने के अंतरिम आदेश दिए हैं.
जस्टिस नुपूर भाटी की एकलपीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता ओसियन गुप्ता कि ओर से दायर याचिका पर दिया हैं.
अधिवक्ता यशपाल ख़िलेरी ने याचिकाकर्ता ओसियन गुप्ता की ओर से पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता एक कृत्रिम आंख और बायें हाथ मे गैर-कार्यात्मक अंगूठा व दाएं हाथ के अंगूठे में अनुप्रस्थ कमी तथा बौनापन होने से विशेष योग्यजन श्रेणी में शामिल होता हैं.
72 प्रतिशत विकलांगता
याचिकाकर्ता कि कुल विकलांगता 72 प्रतिशत होने से विकलांग कोटे के तहत नीट —2025 के लिए लिखित परीक्षा दी.
14 जून 2025 को जारी किए गए रिजल्ट में याचिकाकर्ता ने विकलांग श्रेणी में 1078 वी आल इंडिया रैंक हासिल की.
जिसके बाद यूडिआईडी नंबर प्राप्त करते हुए ऑनलाइन डिसएबिलिटी प्रमाण पत्र बनवाया. राजस्थान राज्य काउंसलिंग बोर्ड एसएमएस मेडीकल कॉलेज ने याचिकाकर्ता को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली से अपनी डिसएबिलिटी जांच करवाने और मेडिकल कोर्स कर सकने में क्रियात्मक सक्षमता परखने के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र लाने के लिए कहा गया.
शारीरिक परीक्षण करने के बाद लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली ने डिसएबिलिटी प्रमाण पत्र दिनाँक 28 जुलाई 2025 जारी करते हुए याची को PwD (पर्सन विथ डिसएबिलिटी) आरक्षण के लिए योग्य/पात्र माना.
आवश्चक प्रमाण पत्र होने के बाद भी राज्य काउंसलिंग बोर्ड ने याचिकाकर्ता को काउंसलिंग में शामिल नहीं किया.
अदालत को बताया गया किग एमबीबीएस कोर्स के लिए PwD श्रेणी में सीट मैट्रिक्स के अनुसार राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजो में कुल 119 राजकीय सीट आरक्षित है, जबकि लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण विकलांग छात्रों की संख्या केवल 81 है, जिसमे याचिकाकर्ता को पहले पात्र मानते हुए दिनाँक 01 अगस्त 2025 को जारी लिस्ट में शामिल किया गया.
लेकिन बाद में दिनाँक 12 अगस्त 2025 को जारी विकलांग श्रेणी लिस्ट में से उसका नाम बिना किसी ठोस वजह के हटा दिया गया.
बहस सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस नूपुर भाटी की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को द्वितीय राउंड की काउंसलिंग में शामिल करने के आदेश दिए.