नई दिल्ली, 18 सितंबर
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के ओएसडी यानी ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी राजीव दत्ता को सुप्रीम कोर्ट से फौरी तौर पर आशिंक राहत मिली हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वो राजीव दत्ता के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई किसी अन्य जज की बेंच के समक्ष सूचीबद्ध कराऐं.
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट कि एकलपीठ ने 31 जुलाई और 1 अगस्त को सुनवाई करते हुए राजीव दत्ता के खिलाफ मानव तस्करी, अधिवक्ता पर हमला सहित कई गंभीर आरोपों को लेकर दायर याचिका पर पुलिस को गहन जांच के आदेश दिए थे.
जल्दबाजी में सुनवाई
राजीव दत्ता ने राजस्थान हाईकोर्ट की एकनपीठ के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए रोस्टर बदलने के बावजूद उनके मामले की सुनवाई करने पर ऐतराज जताया.
सुप्रीम कोर्ट में दायर कि गयी याचिका में राजीव दत्ता की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि हाईकोर्ट की एकल पीठ ने मामले को अत्यधिक जल्दबाजी में निपटाया.
रोहतगी ने कहा कि जब मुख्य न्यायाधीश ने राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर में 4 अगस्त 2025 से रोस्टर बदलने की अधिसूचना जारी कर दी थी, तब भी एकलपीठ ने 31 जुलाई को आदेश पारित कर अगले ही दिन 1 अगस्त को सुनवाई तय कर दी.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि एकलपीठ द्वारा मामले की सुनवाई का तरीका कई सवाल खड़े करता है.
स्थापित कानून के खिलाफ
रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उस समय तक याचिकाकर्ता को मामले में पक्षकार तक नहीं बनाया गया था, बावजूद इसके उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए और 1 अगस्त को उन्हें पक्षकार बनाए जाने के बाद भी नोटिस जारी करने के साथ ही उनके हितों के प्रतिकूल कई आदेश पारित कर दिए गए.
याचिका में कहा गया कि यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले “मनहरिभाई मुलजीभाई काकाडिया बनाम शैलेशभाई मोहनभाई पटेल” (2012) 10 SCC 517 में स्थापित कानून के विपरीत है.
हम गहराई में नही जायेंगे
याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई बी आर गंवई ने कहा कि कोर्ट इस बात की गहराई में नहीं जाएगी कि एकल पीठ ने किस प्रकार मामले की सुनवाई की.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 4 अगस्त 2025 से राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर का रोस्टर बदल चुका है और अब यह मामला किसी जज के समक्ष आएगा.
दूसरी बेंच करे सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया हैं कि वे इस मामले को किसी अन्य न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध करे, ताकि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो सके.
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भी यह स्वतंत्रता दी है कि वे नए जज के समक्ष आवश्यक आवेदन दायर कर सकते हैं.
ये हैं मामला
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने एक अधिवक्ता की याचिका पर सुनवाई करते राजीव दत्ता और अन्य के खिलाफ अजमेर कोर्ट में लंबित परिवाद की निष्पक्ष जांच का आदेश दिया था.
कोर्ट ने दत्ता को पक्षकार बनाते हुए जवाब मांगा और कोटा, बूंदी व पाली में दर्ज एफआईआर में दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी.
इसके साथ ही एडीजी क्राइम दिनेश एमएन को जांच की निगरानी कर आठ सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे.