जयपुर। राजस्थान सरकार ने बजट 2026-27 में न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में न्यायिक तंत्र के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए 200 करोड़ की घोषणा की है।
सरकार ने विभिन्न जिलों और कस्बों में नए न्यायालय खोलने तथा मौजूदा न्यायालयों को क्रमोन्नत करने का निर्णय लिया है, जिससे आम नागरिकों को न्याय तक आसान और तेज पहुंच मिल सकेगी।

साथ ही न्यायालयों के आधारभूत ढांचे के विकास पर 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान किया गया है।
बजट घोषणाओं के अनुसार राज्य के कई क्षेत्रों में वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय स्थापित किए जाएंगे।
राज्य में 5 नए वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय की घोषणा कि गयी है। जिसमें भीनमाल-बागोड़ा, नीमराना-कोटपुतली बैराठ, इटावा-कोटा, तारानगर-चूरू, खासखुर्द-बीकानेर शामिल है।.
राज्य में 3 अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायाधीश न्यायालय खोले जायेंगे जो कि रूपवास-भरतपुर, जहाजपुर-भीलवाड़ा, किशनगंज-बारां में होंगे.
वही राज्य में 2 विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) न्यायालय बीकानेर और चित्तौड़गढ़ में खोले जायेंगे.
इसके साथ ही कुचामन सिटी-डीडवाना, पाली जिले में 2 विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (एनआई एक्ट) न्यायालय खोले जायेंगे.
शाहाबाद-बारां में विशेष अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायाधीश का कैंप कोर्ट स्थापित किया जायेगा.
सांगोद-कोटा, सोजत-जोधपुर में सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय स्थापित होंगे.
इसके साथ ही प्रदेश में विभिन्न न्यायालयों की आधारभूत संरचना संबंधी कार्य पर 200 करोड़ रुपये का व्यय किया जायेगा।
इन न्यायालयों के शुरू होने से गंभीर आपराधिक और दीवानी मामलों की सुनवाई स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगी, जिससे लोगों को बड़े शहरों की अदालतों तक जाने की आवश्यकता कम होगी।
उपभोक्ता न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा और अभियोजन कार्यालयों के नए भवन:
राज्य सरकार ने न्यायिक सेवाओं को अधिक सुगम और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उपभोक्ता न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा शुरू करने तथा किराये के भवनों में संचालित अभियोजन कार्यालयों के लिए नए भवन निर्माण का प्रस्ताव रखा है।

सरकार के प्रस्ताव के अनुसार राज्य एवं जिला स्तर के उपभोक्ता आयोगों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उपभोक्ता अब अपने घर या निकटतम केंद्र से ही न्यायालय की कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे।
इससे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी, समय और खर्च दोनों की बचत होगी तथा न्याय तक पहुंच आसान बनेगी।
इसके साथ ही सरकार ने प्रदेश में किराये के भवनों में संचालित 15 अभियोजन कार्यालयों के लिए नए भवनों के निर्माण का प्रस्ताव भी रखा है। वर्तमान में कई अभियोजन कार्यालय अस्थायी या किराये के भवनों में संचालित होने के कारण आधारभूत सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं।