जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट के नए भवन में सामने आई निर्माण संबंधी दिक्कतों के बीच राज्य सरकार ने अब मरम्मत और पुनर्निर्माण के काम को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
इसी के मद्देनजर राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास शनिवार को जोधपुर के दौरे पर पहुंचे और हाईकोर्ट भवन का निरीक्षण किया।
उन्होंने म्यूजियम, डोम क्षेत्र और जीर्णोद्धार कार्यों का जायजा लिया और निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करने के निर्देश दिए।
इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक की और भवन की स्थिति, क्षतिग्रस्त हिस्सों और अब तक हुए काम की जानकारी ली।
साथ ही भवन की सुरक्षा, निर्माण की गुणवत्ता और आगे किए जाने वाले काम को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को मरम्मत और पुनर्निर्माण के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों के साथ बैठक में साफ किया कि भवन के निर्माण में सामने आई कमियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
साथ ही कहा कि काम की नियमित निगरानी के लिए अलग इंजीनियरिंग टीम लगाई जाएगी, ताकि निर्माण की गुणवत्ता पर नजर बनी रहे और काम में किसी तरह की कमी दोबारा सामने न आए।
वहीं सरकार के सामने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से 50 नए कोर्ट रूम वाली बिल्डिंग का प्रस्ताव भी आया है, जिसे आगे बढ़ाने की तैयारी है।

हाईकोर्ट भवन में चल रहे काम का लिया जायजा
हाईकोर्ट भवन में इस समय मरम्मत और पुनर्निर्माण से जुड़े कई काम चल रहे हैं।
मुख्य सचिव ने हाईकोर्ट के नए भवन का निरीक्षण कर वहां चल रहे मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य को देखा।
अधिकारियों ने उन्हें भवन की मौजूदा स्थिति और अब तक किए गए काम की जानकारी दी। साथ ही भवन के क्षतिग्रस्त हिस्सों और चल रहे काम की पूरी स्थिति बताई।
बैठक में भवन की सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि मरम्मत के दौरान गुणवत्ता के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अभी जो काम चल रहा है, उसकी नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि काम तय मानकों के मुताबिक हो।
फिलहाल भवन में तीन कोर्ट रूम और करीब 150 पैनल से जुड़े काम चल रहे हैं। इन कामों की प्रगति की भी मुख्य सचिव ने जानकारी ली।

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काम की निगरानी के लिए बनेगी टीम
मुख्य सचिव ने कहा कि हाईकोर्ट भवन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सरकार ने काम की निगरानी को और मजबूत करने का फैसला किया है।
इसके लिए एक डेडिकेटेड इंजीनियरिंग विंग बनाया जाएगा। इसमें चार AEN, एक XEN और एक SE स्तर के अधिकारी शामिल होंगे।
यह टीम हाईकोर्ट भवन में चल रहे मरम्मत और पुनर्निर्माण के काम की लगातार निगरानी करेगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि काम की रफ्तार के साथ उसकी गुणवत्ता और भवन की सुरक्षा पर भी बराबर ध्यान रहे।
मुख्य सचिव ने बताया कि फिलहाल भवन में तीन कोर्ट रूम और करीब 150 पैनलों पर काम चल रहा है। काम को और तेज करने के लिए अतिरिक्त इंजीनियर और श्रमिक लगाए जाएंगे।
यानी सरकार अब सिर्फ काम पूरा कराने पर ही जोर नहीं दे रही, बल्कि उसके लिए अलग स्तर पर तकनीकी निगरानी की व्यवस्था भी तैयार कर रही है।
50 कोर्ट रूम वाली नई इमारत पर आगे बढ़ेगी सरकार
हाईकोर्ट भवन से जुड़ी समीक्षा के दौरान भविष्य की जरूरतों पर भी चर्चा हुई।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से करीब 1.5 करोड़ रुपये की DPR सरकार को भेजी गई है। इसमें 50 कोर्ट रूम वाली नई बिल्डिंग तैयार करने का प्रस्ताव है।
मुख्य सचिव ने संकेत दिया कि सरकार अब इस प्रस्ताव को आगे की प्रक्रिया में ले जाएगी।
यानी मौजूदा भवन की मरम्मत के साथ-साथ हाईकोर्ट के लिए अतिरिक्त कोर्ट रूम की जरूरत को भी अलग स्तर पर देखा जा रहा है।
यह प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाईकोर्ट परिसर में कोर्ट रूम और दूसरी सुविधाओं की जरूरत लगातार बनी हुई है।
नई बिल्डिंग का प्रस्ताव आगे बढ़ने से भविष्य में कोर्ट रूम से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में भी काम आगे बढ़ेगा
मुख्य सचिव ने कहा कि जयपुर पहुंचकर वो मामले की जानकारी मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे। इसके बाद सरकार की ओर से आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
निर्माण की खामियों की जिम्मेदारी भी तय होगी
हाईकोर्ट भवन की मौजूदा स्थिति की समीक्षा के दौरान निर्माण में सामने आई कमियों का मुद्दा भी उठा।
मुख्य सचिव ने कहा कि जहां भी लापरवाही या निर्माण से जुड़ी खामी सामने आई है, उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सरकार की ओर से इस पूरे मामले में उपलब्ध तथ्यों और अब तक हुए काम की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यानी इस मामले में सरकार के सामने दो अहम काम हैं- एक तरफ भवन की मरम्मत और सुरक्षा का काम जल्द पूरा करना और दूसरी तरफ पहले सामने आई कमियों की जिम्मेदारी तय करना।
15 सितंबर को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक
हाईकोर्ट भवन से जुड़े मामले में 15 सितंबर को भी अहम बैठक होनी है।
इसमें राजस्थान के मुख्य सचिव और DGP समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार की ओर से मामले में अब तक किए गए काम और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
मुख्य सचिव के जयपुर लौटने के बाद इस पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री के सामने भी रखी जाएगी।
इसके बाद राजस्थान सरकार की ओर से हाईकोर्ट भवन की मरम्मत और पुनर्निर्माण को लेकर हाईकोर्ट में एफिडेविट भी दाखिल किया जाएगा।
इस तरह हाईकोर्ट भवन को लेकर सरकार अब मरम्मत, सुरक्षा, निर्माण की गुणवत्ता और जवाबदेही-चारों पहलुओं पर एक साथ काम कर रही है।
मौजूदा काम को जल्द पूरा करने पर जोर
मुख्य सचिव के निरीक्षण के बाद अब हाईकोर्ट भवन में चल रहे काम को तेज करने और उसकी निगरानी मजबूत करने पर जोर है।
इसके लिए अतिरिक्त इंजीनियर और श्रमिक लगाए जाएंगे। साथ ही अलग इंजीनियरिंग विंग बनाकर काम की नियमित निगरानी की जाएगी।
वहीं, 50 नए कोर्ट रूम वाली बिल्डिंग का प्रस्ताव सरकार के सामने है। इसे भी आगे बढ़ाने की तैयारी है।
यानी मौजूदा भवन की मरम्मत के साथ हाईकोर्ट की भविष्य की जरूरतों पर भी काम किया जा रहा है।
फिलहाल सरकार का फोकस हाईकोर्ट भवन की मरम्मत और पुनर्निर्माण को जल्द पूरा करने, सुरक्षा सुनिश्चित करने और निर्माण की कमियों की जिम्मेदारी तय करने पर है।
15 सितंबर की बैठक के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा और साफ होगी। इसके बाद सरकार की ओर से हाईकोर्ट में एफिडेविट भी दाखिल किया जाएगा।