जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एडवोकेट के रूप में एनरोलमेंट के लिए लंबित आवेदनों को लेकर बार काउंसिल ऑफ राजस्थान पर सख्त रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट ने एडवोकेट एनरोलमेंट में देरी को लेकर राजस्थान बार काउंसिल को डेडलाइन दी है और सभी लंबित एनरोलमेंट आवेदन तय प्रक्रिया के मुताबिक 9 सितंबर 2026 तक निपटाने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि एडवोकेट के रूप में एनरोलमेंट में देरी के कारण अभ्यर्थियों को कठिनाई हो रही है और उनके ‘राइट टू लाइवलीहुड’ यानी आजीविका के अधिकार पर असर पड़ रहा है।
यह आदेश जस्टिस शुभा मेहता ने सुरेंद्र खिंची की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ता ने वर्ष 2025 में डॉ. भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी, जयपुर से कानून की पढ़ाई पूरी की थी और बार काउंसिल ऑफ राजस्थान में एनरोलमेंट के लिए आवेदन किया था।
लेकिन जरूरी दस्तावेज और फीस जमा करने के बाद भी उनका आवेदन पेंडिंग रहा।
वहीं बार काउंसिल ने कोर्ट को बताया कि चुनाव के दौरान एनरोलमेंट का काम रुक गया था। मार्च 2026 में बनाई गई एड हॉक कमेटी भी बाद में रद्द कर दी गई।
हाईकोर्ट के सामने यह भी आया कि सिर्फ खिंची का आवेदन ही पेंडिंग नहीं है।
कई दूसरे कानून स्नातक भी अपने एनरोलमेंट का इंतजार कर रहे हैं। इस देरी की वजह से वे एडवोकेट के तौर पर आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं कर पा रहे थे।
हाईकोर्ट ने कहा कि एनरोलमेंट में देरी से अभ्यर्थियों का करियर के साथ उनकी आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
इसी को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए राजस्थान बार काउंसिल को 9 सितंबर तक सभी पेंडिंग एनरोलमेंट आवेदन तय प्रक्रिया के मुताबिक निपटाने और अभ्यर्थियों को इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया।
एनरोलमेंट अटका तो काम भी रुका
सुरेंद्र खिंची ने अपनी याचिका में बताया कि उन्होंने 2025 में कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद राजस्थान बार काउंसिल में एडवोकेट एनरोलमेंट के लिए आवेदन किया था।
आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज और फीस भी जमा की गई थी।
इसके बाद उन्होंने अपने आवेदन पर कार्रवाई के लिए ईमेल के जरिए भी बार काउंसिल को अनुरोध किया। इसके बावजूद उनका एनरोलमेंट नहीं हो सका और आवेदन लंबित रहा।
एनरोलमेंट लंबित रहने की वजह से वह एडवोकेट के रूप में अपना पेशेवर काम शुरू नहीं कर पा रहे थे।
उनका कहना था कि जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी उनके आवेदन पर फैसला नहीं लिया जा रहा है।
इसी देरी को लेकर उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया।
चुनाव के कारण रुका था एनरोलमेंट
वहीं सुनवाई के दौरान बार काउंसिल ऑफ राजस्थान की ओर से आवेदन लंबित रहने की वजह बताई गई।
बार काउंसिल का कहना है कि उस समय बार काउंसिल की चुनाव प्रक्रिया चल रही थी। चुनाव के दौरान एनरोलमेंट से जुड़ा काम नहीं किया जा रहा था।
बार काउंसिल की ओर से यह भी बताया गया कि उस समय एनरोलमेंट के आवेदनों पर फैसला लेने के लिए कोई कमेटी काम नहीं कर रही थी।
हाईकोर्ट को बताया गया कि इससे सिर्फ याचिकाकर्ता ही नहीं, बल्कि कई दूसरे कानून स्नातकों के आवेदन भी लंबित हो गए थे।
पहले बनी कमेटी भी कर दी गई थी रद्द
सुनवाई के दौरान बार काउंसिल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि एनरोलमेंट से जुड़े काम के लिए 24 फरवरी 2026 को एक एड हॉक कमेटी बनाई गई थी।
हालांकि, बाद में हाईलेवल इलेक्शन सुपरवाइजरी कमेटी ने 12 मार्च 2026 को इस कमेटी को रद्द कर दिया।
कमेटी के नहीं रहने की वजह से एनरोलमेंट से जुड़े काम आगे नहीं बढ़ पाए।
इसका असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा, जिन्होंने एडवोकेट के रूप में एनरोलमेंट के लिए आवेदन कर रखा था।
कई अभ्यर्थियों के आवेदन पेंडिंग
सुनवाई में यह भी सामने आया कि यह परेशानी सिर्फ सुरेंद्र खिंची तक सीमित नहीं थी। कई दूसरे अभ्यर्थियों के एनरोलमेंट आवेदन भी लंबित थे।
यानी कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद एडवोकेट के तौर पर आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे कई कानून स्नातकों के आवेदन पर फैसला नहीं हो पाया था।
हाईकोर्ट ने इसी स्थिति को ध्यान में रखा और सिर्फ याचिकाकर्ता के मामले तक आदेश को सीमित नहीं रखा। कोर्ट ने सभी पेंडिंग एनरोलमेंट आवेदनों को तय समय में निपटाने का निर्देश दिया।
अब इंतजार नहीं कराया जा सकता
जस्टिस शुभा मेहता ने एनरोलमेंट में देरी के असर को भी अहम माना।
हाईकोर्ट ने कहा कि एडवोकेट के रूप में एनरोलमेंट में देरी से अभ्यर्थियों को परेशानी हो रही है और इसका असर उनसे करियर पर पड़ रहा है।
हाईकोर्ट के सामने यह भी था कि जिस चुनाव प्रक्रिया को एनरोलमेंट में देरी की वजह बताया गया, वह अब पूरी हो चुकी है। बार काउंसिल के चुनाव के नतीजे भी घोषित किए जा चुके थे।
ऐसे में कोर्ट ने माना कि अब एनरोलमेंट के आवेदनों को लंबित रखने का कोई कारण नहीं है और इन्हें और इंतजार में रखने के बजाय उनके निपटारे के लिए समय सीमा तय करना जरूरी माना।
हाईकोर्ट ने इसी आधार पर सुरेंद्र खिंची की याचिका स्वीकार कर ली।
9 सितंबर तक सभी आवेदन निपटाने का आदेश
हाईकोर्ट ने राजस्थान बार काउंसिल को निर्देश दिया कि कोर्ट में सुनवाई के समय तक लंबित सभी एडवोकेट एनरोलमेंट आवेदन 9 सितंबर 2026 तक तय प्रक्रिया के मुताबिक निपटाए जाएं।
इसके साथ ही संबंधित अभ्यर्थियों को उनके आवेदन पर लिए गए फैसले की जानकारी देने को भी कहा गया है।
यानी अब बार काउंसिल को सिर्फ सुरेंद्र खिंची के आवेदन पर ही नहीं, बल्कि उस तारीख तक लंबित सभी एनरोलमेंट आवेदनों पर कार्रवाई करनी होगी।
इस आदेश का सीधा मतलब है कि एडवोकेट एनरोलमेंट के लिए आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को अब अपने आवेदन पर फैसले के लिए अनिश्चित समय तक इंतजार नहीं करना होगा।
हालांकि, कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि हर आवेदन को मंजूर ही किया जाए।
बार काउंसिल को तय नियमों और प्रक्रिया के मुताबिक हर आवेदन की जांच कर फैसला लेना होगा।
6 दिन में पूरी करनी होगी प्रक्रिया
हाईकोर्ट का यह आदेश इसलिए भी अहम है क्योंकि बार काउंसिल को लंबित आवेदनों के निस्तारण के लिए बेहद कम समय दिया गया है।
हाईकोर्ट ने 9 सितंबर 2026 की समयसीमा तय करते हुए स्पष्ट कर दिया कि चुनाव प्रक्रिया और प्रशासनिक दिक्कतों की वजह से कानून स्नातकों को अनिश्चित समय तक इंतजार नहीं कराया जा सकता।
कोर्ट ने सिर्फ इतना तय किया है कि लंबित आवेदनों को अब समय सीमा के भीतर निपटाया जाए और अभ्यर्थियों को उनके आवेदन पर लिए गए फैसले की जानकारी दी जाए।