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राज्य के सभी जिलों में साइबर कोर्ट खोलने को सरकार ने दी प्रशासनिक मंजूरी, साइबर मामलों में सरकार के प्रयासों की हाईकोर्ट ने की सराहना, लेकिन कहा ‘बहुत कुछ करना बाकी’?

Rajasthan Government Approves Cyber Courts in All Districts; High Court Appreciates Efforts but Says “Much More Needs to Be Done”

जयपुर। राजस्थान में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है।

साइबर अपराध से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों की अनुपालना रिपोर्ट (एफिडेविट) समय पर प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है।

हालांकि, राज्य सरकार के अनुरोध पर हाईकोर्ट ने दस दिन का अतिरिक्त समय प्रदान करते हुए मामले को 5 मार्च 2026 को सूचीबद्ध किया है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल युग में अपराध के बदलते स्वरूप से निपटने के लिए पारंपरिक व्यवस्था पर्याप्त नहीं है और राज्य को मजबूत साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना ही होगा।

जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने यह आदेश रसीद व एक अन्य याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।

आदेश की पालना नहीं, कोर्ट ने जताई नाराजगी

राजस्थान हाईकोर्ट ने 6 फरवरी 2026 को गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS Home), डीजीपी, डीजी साइबर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में विस्तृत फैसला दिया था।

इस फैसले में 27 नवंबर 2025 को जारी निर्देशों की अनुपालना में उठाए गए कदमों पर विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत करने को कहा गया था।

23 फरवरी की निर्धारित तिथि तक यह शपथपत्र दाखिल नहीं किया गया।

राज्य सरकार की ओर से मामले में आदेशों की पालना के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा गया।

कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि साइबर अपराध जैसे गंभीर मुद्दे पर अनुपालना में ढिलाई स्वीकार्य नहीं है। फिर भी अदालत ने न्यायहित में 10 दिन का अंतिम अवसर देते हुए मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च तय की है।

साइबर अपराध: राज्य के लिए बड़ी चुनौती

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध केवल आर्थिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह संगठित अपराध, फर्जी निवेश योजनाएं, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, सोशल मीडिया के माध्यम से आपराधिक गतिविधियां, डेटा चोरी और राष्ट्रीय सुरक्षा तक को प्रभावित करने लगा है।

राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराध के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी और तकनीकी संसाधनों का अभाव जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती है।

हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों में जांच अधिकारियों के पास न तो पर्याप्त तकनीकी प्रशिक्षण है और न ही आधुनिक उपकरण। कई मामलों में एफआईआर तो दर्ज हो जाती है, लेकिन डिजिटल साक्ष्य के संरक्षण और विश्लेषण में देरी के कारण अभियोजन कमजोर पड़ जाता है।

अभियोजन और जांच में तकनीकी विशेषज्ञता की कमी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि केवल जांच अधिकारी ही नहीं, बल्कि अभियोजन पक्ष भी पर्याप्त तकनीकी दक्षता से लैस नहीं है।

अक्सर देखा गया है कि डिजिटल साक्ष्य को अदालत में पेश करने के दौरान विधिक औपचारिकताओं का पालन नहीं किया जाता, जिससे आरोपी को लाभ मिल जाता है।

कोर्ट ने कहा कि जब तक जांच, अभियोजन और न्यायालय – तीनों स्तरों पर तकनीकी क्षमता विकसित नहीं की जाएगी, तब तक साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।

जयपुर-जोधपुर-कोटा में साइबर पुलिस थाने

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने हाईकोर्ट को बताया कि सरकार ने राज्य में जोधपुर ग्रामीण, जयपुर ग्रामीण, कोटा ग्रामीण, जोधपुर और जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में नए साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इन साइबर थानों का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं, बल्कि तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल फॉरेंसिक, बैंकिंग समन्वय और इंटर-स्टेट नेटवर्किंग के माध्यम से अपराधियों तक पहुंच बनाना है।

इसके साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत जोधपुर, भरतपुर, कोटा और जयपुर में क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में साइबर डिवीजन स्थापित किए जा रहे हैं।

सभी जिलों में साइबर कोर्ट खोलने को मंजूरी

याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान GA-cum-AAG राजेश चौधरी ने हाईकोर्ट को जानकारी दी कि राज्य सरकार ने सभी जिलों में साइबर कोर्ट खोलने का निर्णय लिया है। इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन साइबर कोर्टों में न्यायिक अधिकारियों एवं अन्य स्टाफ की नियुक्ति आवंटित बजट प्राप्त होने के बाद ही संभव हो सकेगी।

गौरतलब हैं कि हाल ही में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित तीन दिवसीय साइबर सुरक्षा कॉन्फ्रेस के उद्घाटन समारोह में राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसकी घोषणा की हैं.

राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना

यद्यपि कोर्ट ने शपथपत्र में देरी पर असंतोष जताया, लेकिन राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना भी की।

कोर्ट ने कहा कि साइबर पुलिस स्टेशन, साइबर फॉरेंसिक लैब, विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति और साइबर कोर्ट की घोषणा सकारात्मक पहल हैं।

फिर भी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभी यह प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा।

बजट आवंटन और व्यावहारिक चुनौतियां

राज्य सरकार ने बताया कि साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए राज्य बजट में धनराशि आवंटित की जा चुकी है, लेकिन संबंधित विभागों को अभी राशि प्राप्त नहीं हुई है।

कोर्ट ने कहा कि केवल बजट घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि समयबद्ध क्रियान्वयन आवश्यक है।

5 मार्च को होगी अगली सुनवाई

कोर्ट ने राज्य सरकार को 10 दिन का अतिरिक्त समय देते हुए निर्देश दिया है कि 6 फरवरी 2026 के आदेश के अनुरूप विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत किया जाए।

मामले को 5 मार्च 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।

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