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तय समय के बाद भर्ती फॉर्म में नहीं बदली जा सकती कैटेगरी, राजस्थान हाईकोर्ट ने अभ्यर्थी की अपील खारिज की; कहा- सुधार का मौका पहले मिला था

Rajasthan HC Rejects Plea to Change Recruitment Category After Deadline

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी भर्ती में आवेदन के दौरान गलत कैटेगरी भरने के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवार को आवेदन की गलती सुधारने के पर्याप्त मौके दिए गए हों, तो बाद में रिजल्ट आने के बाद कैटेगरी बदलने की मांग नहीं की जा सकती।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि एक बार आवेदन में कैटेगरी दर्ज हो जाने के बाद तय समय के भीतर ही उसमें सुधार करना होगा।

इसी आधार पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने क्लास-IV भर्ती में कैटेगरी बदलने की मांग करने वाली महिला अभ्यर्थी की अपील खारिज कर दी।

महिला का कहना था कि ऑनलाइन फॉर्म में E-Mitra ऑपरेटर से उनकी कैटेगरी जनरल की जगह OBC दर्ज हो गई। उन्होंने परीक्षा से पहले ही बोर्ड को इसकी जानकारी देकर जनरल विडो कैटेगरी में सुधार की मांग की थी। बाद में उन्हें 72.9512 अंक मिलने के बावजूद उनकी कैटेगरी नहीं बदली गई।

सुनवाई के दौरान जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस संदीप शाह की बेंच ने कहा कि महिला को फॉर्म में हुई गलती सुधारने के लिए पर्याप्त मौके दिए गए थे। इसके बावजूद उन्होंने तय समय में कैटेगरी नहीं बदली। कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद इस तरह कैटेगरी बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

इसी के साथ हाईकोर्ट ने महिला की अपील खारिज कर दी और 1 अप्रैल 2026 के सिंगल जज के आदेश को बरकरार रखा।

पति की मौत के बाद Widow कैटेगरी में किया था आवेदन

याचिकाकर्ता अभ्यर्थी मुन्नी देवी राजस्थान की स्थायी निवासी हैं और जनरल कैटेगरी से आती हैं। उनके पति ओमप्रकाश की 3 फरवरी 2018 को मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उन्होंने क्लास-IV भर्ती में विधवा कैटेगरी के तहत ऑनलाइन आवेदन किया। भर्ती का विज्ञापन 12 दिसंबर 2024 को जारी हुआ था और उन्होंने 12 अप्रैल 2025 को आवेदन किया था।

मुन्नी देवी का कहना था कि ऑनलाइन फॉर्म भरते समय E-Mitra ऑपरेटर ने उनकी कैटेगरी General की जगह गलती से OBC दर्ज कर दी। उनका यह भी दावा था कि यह गलती जानबूझकर नहीं हुई थी। भर्ती बोर्ड की ओर से जारी एडमिट कार्ड में भी उनकी कैटेगरी OBC Widow दर्ज थी।

परीक्षा से पहले बोर्ड को बताई थी गलती

मुन्नी देवी ने कहा कि एडमिट कार्ड में कैटेगरी गलत दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने लिखित परीक्षा से पहले ही भर्ती बोर्ड से संपर्क किया था। उन्होंने OBC विडो की जगह जनरल विडो कैटेगरी दर्ज करने का अनुरोध किया।

हालांकि, बोर्ड ने कैटेगरी में बदलाव नहीं किया। इसके बाद मुन्नी देवी ने 20 सितंबर 2025 को लिखित परीक्षा दी। 16 जनवरी 2026 को भर्ती बोर्ड ने रिजल्ट जारी किया।

इस भर्ती में OBC विडो कैटेगरी की कटऑफ 0.0033 और जनरल विडो कैटेगरी की कटऑफ 32.6964 थी। मुन्नी देवी के 72.9512 सामान्यीकृत अंक थे, जो दोनों कैटेगरी की कटऑफ से ज्यादा थे। इसके बावजूद मेरिट लिस्ट और रिकॉर्ड में उनकी कैटेगरी OBC विडो ही दर्ज रही।

रिजल्ट के बाद फिर कैटेगरी बदलने की मांग की

मुन्नी देवी का कहना था कि फॉर्म में OBC दर्ज होना E-Mitra ऑपरेटर की गलती थी। वह जनरल कैटेगरी से हैं, इसलिए उन्होंने अपनी कैटेगरी जनरल विडो करने और इसी आधार पर उनकी उम्मीदवारी पर विचार करने की मांग की।

रिजल्ट और मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद उन्होंने भर्ती बोर्ड को फिर लिखित आवेदन दिया। हालांकि बोर्ड की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट की सिंगल जज ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की।

उनका तर्क था कि गलती जानबूझकर नहीं हुई थी और उन्होंने समय रहते बोर्ड को इसकी जानकारी दे दी थी। उनकी ओर से यह भी कहा गया कि भर्ती प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी और किसी दूसरे उम्मीदवार का अधिकार प्रभावित किए बिना कैटेगरी सुधारी जा सकती थी।

हाईकोर्ट ने कहा- कैटेगरी सुधारने के कई मौके मिले थे

डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान भर्ती विज्ञापन की शर्तों पर विशेष ध्यान दिया। कोर्ट ने कहा कि भर्ती के विज्ञापन में आवेदन में दर्ज जानकारी में बदलाव करने का मौका दिया गया था।

क्लॉज 17(i) के तहत आवेदन की आखिरी तारीख के 7 दिन के भीतर 300 रुपये जमा कर कैटेगरी समेत जरूरी बदलाव किए जा सकते थे। इसके अलावा क्लॉज 17(ii) में भी सुधार का एक और मौका दिया गया था।

इसके बाद भर्ती बोर्ड ने 7 अक्टूबर 2025 को प्रेस नोट जारी कर 6 अक्टूबर से 16 अक्टूबर 2025 तक आवेदन में जरूरी बदलाव करने का मौका दिया। कोर्ट ने कहा कि मुन्नी देवी इन मौकों का इस्तेमाल कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने तय समय में कैटेगरी नहीं बदली।

‘तय समय के बाद कैटेगरी नहीं बदली जा सकती’

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के J&K Public Service Commission बनाम Israr Ahmad और Rajasthan High Court, Jodhpur बनाम Neetu Harsh के फैसलों का भी हवाला दिया।

इन फैसलों के आधार पर कोर्ट ने कहा कि उम्मीदवार को कैटेगरी में बदलाव का मौका तय समय में ही लेना होता है। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ जाने पर कैटेगरी बदलने की मांग नहीं की जा सकती।

डिवीजन बेंच ने कहा कि मुन्नी देवी को कैटेगरी सुधारने के लिए पर्याप्त अवसर मिले थे। लेकिन उन्होंने रिजल्ट आने तक इंतजार किया और उसके बाद कैटेगरी बदलने की मांग की।

हाईकोर्ट ने अभ्यर्थी की अपील खारिज की

इसी आधार पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मुन्नी देवी की विशेष अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही सिंगल जज के आदेश को बरकरार रखा।

हाईकोर्ट ने लंबित स्टे याचिका और दूसरे सभी आवेदन भी खारिज कर दिए। हाईकोर्ट ने माना कि आवेदन में कैटेगरी दर्ज करना और तय समय के भीतर उसमें सुधार करना भर्ती प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

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