जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार को एक प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए 17 न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है।
रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा की ओर से जारी किए गए आदेश के अनुसार ब्यावर, भरतपुर, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, चूरू, जयपुर मेट्रोपोलिटन-I, जयपुर मेट्रोपोलिटन-II, प्रतापगढ़, सीकर, टोंक और उदयपुर न्यायिक जिलों में ये जिम्मेदारी दी गई है।
इन जिलों में वरिष्ठ सिविल जज, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विशेष POCSO न्यायालयों के जज तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े विशेष न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को रिक्त अदालतों का प्रभार सौंपा गया है।
17 अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार
ब्यावर
पंकज सांखला ➝ सीनियर सिविल जज-कम-अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ब्यावर
भरतपुर
रेखा वाधवा ➝ सेशन जज, विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम प्रकरण), भरतपुर
बीकानेर
अनु अग्रवाल ➝ जज, विशेष न्यायालय POCSO एक्ट प्रकरण संख्या-2, बीकानेर
चित्तौड़गढ़
मान सिंह चुंडावत ➝ सेशन जज, विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), चित्तौड़गढ़
चूरू
अनिल कुमार गुप्ता ➝ जज, विशेष न्यायालय POCSO एक्ट प्रकरण, संख्या-1, चूरू
शिवानी ➝ सिविल जज एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट, चूरू
जयपुर मेट्रोपोलिटन-I
खेतपाल सिंह चारण ➝ विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (NI Act प्रकरण), कोर्ट संख्या-13, जयपुर
स्वाति व्यास ➝ अतिरिक्त सिविल जज एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-19, जयपुर (चकसू मुख्यालय)
जयपुर मेट्रोपोलिटन-II
लोकेंद्र सिंह शेखावत ➝ अतिरिक्त सत्र न्यायालय, महिला अत्याचार प्रकरण, जयपुर
कन्हैया लाल पारीक ➝ अतिरिक्त सीनियर सिविल जज-कम-अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-7, जयपुर
प्रतापगढ़
शिवानी जोहरी भटनागर ➝ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, छोटीसादड़ी, प्रतापगढ़
सीकर
विक्रम चौधरी ➝ जज, विशेष न्यायालय POCSO एक्ट प्रकरण संख्या-2, सीकर
सत्य प्रकाश सोनी ➝ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या-1, सीकर
टोंक
महावीर महावर ➝ जिला एवं सत्र न्यायाधीश, टोंक
महावीर महावर ➝ सेशन जज, विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम प्रकरण), टोंक
उदयपुर
आशीष बैंदारा ➝ सीनियर सिविल जज-कम-अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, खेरवाड़ा, उदयपुर
अजय मीणा ➝ सीनियर सिविल जज-कम-अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (दक्षिण), उदयपुर
40 प्रतिशत अतिरिक्त न्यायिक कार्य
हाईकोर्ट ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि जिन न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, उन्हें कम से कम 40 प्रतिशत अतिरिक्त न्यायिक कार्य का निस्तारण करना होगा।

साथ ही, जिन अधिकारियों को अपने मूल स्थान से बाहर स्थित अदालतों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, उन्हें वैकल्पिक सप्ताह में कम से कम तीन दिन संबंधित स्थान पर जाकर अदालत संचालन करना अनिवार्य होगा।

हिरासत वाले मामलों को प्राथमिकता
हाईकोर्ट ने आदेश में यह भी कहा है कि जिन मामलों में आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं अथवा जिन मामलों के निस्तारण के लिए हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय-सीमा निर्धारित की गई है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।