जयपुर। प्रदेश में खनन पट्टें जारी करने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने अहम फैसला सुनाते हुए करीब 93 खनन लीजों को समाप्त करने के आदेश दिए हैं।
इसके साथ ही राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने और संबंधित पक्षों को जमा कराई गई अमानत राशि लौटाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बी.एस. संधू की खंडपीठ ने मंगलवार को फैसला सुनाया हैं.
डॉ. बृजमोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान द्वारा दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा हुआ हैं, जिसमें प्रदेश में खनन पट्टों के आवंटन की प्रक्रिया, उसकी वैधता और पर्यावरणीय एवं कानूनी मानकों के पालन पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
याचिका में कहा गया था कि राज्य में जिन खनन लीजों को जारी किया गया, उनमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्देशों की समुचित पालना नहीं की गई।
इसके चलते न केवल पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हुआ, बल्कि खनन नीति और नियमों की अनदेखी भी सामने आई।
याचिकाकर्ता संस्था ने अदालत से मांग की थी कि ऐसी सभी लीजों को निरस्त किया जाए, जो कानून और न्यायिक आदेशों के अनुरूप नहीं हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा गया, वहीं याचिकाकर्ता की तरफ से विस्तृत तर्क प्रस्तुत किए गए।
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 31 अक्टूबर 2025 को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे मंगलवार को खुली अदालत में सुनाया गया.
मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के विस्तृत फैसले का इंतजार किया जा रहा हैं.