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जामिया और अलीगढ़ द्वारा जारी अदीब (Adeeb) की डिग्री की मान्यता का पुनः परीक्षण करने का आदेश, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को किया रद्द

Rajasthan High Court Cancels Single Bench Order on Adeeb Qualification in Health Worker Recruitment, Orders Fresh Review

नर्सिंग/हेल्थ वर्कर भर्ती मामलों में राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, राज्य सरकार की अपीलें मंजूर, एकल पीठ का आदेश निरस्त

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में जामिया और अलीगढ़ द्वारा जारी ADEEB (अदीब) योग्यता 10वीं कक्षा (माध्यमिक) के समकक्ष मान्यता देने और नियुक्तियों के लिए पात्र माने जाने के एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया है

जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर की गई विशेष अपीलों को स्वीकार करते हुए एकल पीठ द्वारा पारित आदेश को निरस्त करते हुए मामले को पुनः विचार हेतु एकल पीठ को वापस भेज दिया है।

यह फैसला उन सैकड़ों याचिकाओं और अपीलों से जुड़ा है, जिनमें शैक्षणिक योग्यता, विज्ञापन की शर्तों, नियम 1965 (Rules of 1965) और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों की व्याख्या को लेकर गंभीर कानूनी सवाल खड़े किए गए थे।

ये है मामला

राज्य सरकार द्वारा हेल्थ वर्कर (महिला) एवं संबंधित पदों पर भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया गया था।

भर्ती प्रक्रिया के दौरान कई अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, जिनकी योग्यता को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। विशेष रूप से ADEEB/उर्दू सहित कुछ अन्य शैक्षणिक योग्यताओं को 10वीं के समकक्ष मानने को लेकर प्रश्न उठे।

कुछ अभ्यर्थियों के आवेदन अस्वीकार कर दिए गए, जबकि कुछ को चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया। इससे असंतुष्ट होकर अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की एकल पीठ में याचिकाएं दायर कीं।

एकल पीठ का निर्णय

राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पूर्व में दिए गए कुछ निर्णयों, विशेषकर Ms. Firdos Tarannum बनाम राज्य सरकार से संबंधित निर्णयों पर भरोसा करते हुए कई याचिकाओं को स्वीकार कर लिया था।

एकल पीठ ने अंतरिम आदेशों के माध्यम से कुछ अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में शामिल करने और मेरिट सूची में स्थान देने के आदेश भी दिए थे।

इसी आदेश को राज्य सरकार ने चुनौती देते हुए खंडपीठ में विशेष अपीलें दायर कीं।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियां

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि एकल पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेशों और तथ्यों पर स्वतंत्र रूप से विचार नहीं किया।

केवल पूर्व फैसलों पर निर्भर रहते हुए मामले का निपटारा कर दिया गया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र मेरिट पर निर्णय लिया जाए।

विशेष रूप से State of Rajasthan & Ors. vs. Gomi (Civil Appeal No. 6559/2023) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का समुचित पालन नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला

राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया, जिनमें
Ms. Firdos Tarannum, Gomi, Jahida Salma जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह स्पष्ट किया गया था कि—
“ADEEB जैसी योग्यताओं को स्वतः 10वीं के समकक्ष नहीं माना जा सकता, जब तक कि संबंधित नियमों में इसका स्पष्ट प्रावधान न हो।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि Rules of 1965 में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जो ADEEB योग्यता को 10वीं के समकक्ष मानती हो।

राज्य सरकार की दलीलें

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) विज्ञान शाह ने अदालत में दलील दी कि भर्ती विज्ञापन और नियमों में स्पष्ट रूप से निर्धारित योग्यताओं का पालन अनिवार्य है।

एकल पीठ ने न तो नियमों की सही व्याख्या की और न ही सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम आदेशों का पालन किया।

ADEEB या समान योग्यताओं को मान्यता देने से भर्ती प्रक्रिया में असमानता उत्पन्न होगी।

हाईकोर्ट का फैसला

सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपीलें स्वीकार करते हुए एकल पीठ के अक्टूबर 2022 के आदेश को रद्द कर दिया है

साथ ही मामले को पुनः एकल पीठ को भेजते हुए पुनः सुनवाई के आदेश दिए हैं

एकल पीठ अब मामलों का फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और नियम 1965 के अनुसार स्वतंत्र रूप से मेरिट पर करेगी।

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अंतरिम आदेश अंतिम निर्णय में विलीन हो जाते हैं। चयन प्रक्रिया में केवल अंतरिम आदेश के आधार पर किसी को स्थायी अधिकार प्राप्त नहीं होता।

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