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Reportable Judgement: Operation Sindoor के तहत श्रीगंगानगर में एयरबेस की राह हुई आसान, Rajasthan Highcourt ने एयरबेस के लिए भूमि अधिग्रहण को माना वैध, 59 याचिकाएं खारिज

Rajasthan High Court Clears Land Acquisition for Indian Air Force Airbase in Sri Ganganagar

जोधपुर/श्रीगंगानगर। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के तहत राजस्थान से लगते भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप श्रीगंगानगर जिले की सादुलशहर तहसील में प्रस्तावित भारतीय वायुसेना के नए एयरबेस के निर्माण का रास्ता आखिरकार पूरी तरह साफ हो गया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने इस महत्वाकांक्षी और रणनीतिक रक्षा परियोजना के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

हाईकोर्ट के इस फैसले को न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की एकलपीठ ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह परियोजना राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत हितों की तुलना में जनहित और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होते हैं।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई आपत्तियां मुख्यतः तकनीकी प्रकृति की थीं और उनका उद्देश्य एक अत्यंत महत्वपूर्ण रक्षा परियोजना को बाधित करना था, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

राजस्थान हाईकोर्ट ने एयरबेस के लिए अधिग्रहित की जा रही भूमि की कार्यवाही को वैध माना है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अधिग्रहण को चुनौती देने वाली 59 याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

132 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण

भारत सरकार की ओर से श्रीगंगानगर जिले की सादुलशहर तहसील के लालगढ़ जाटान और आसपास के क्षेत्र में करीब 130 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर यह एयरबेस बनाया जाना प्रस्तावित है।

इसके लिए सादुलशहर के पास चक 21 SDS में करीब 130.349 हेक्टेयर निजी भूमि और 2.476 हेक्टेयर सरकारी भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा था।

इस अधिग्रहण को सुरेश कुमार सहित कुल 59 किसानों और भूमिकालिकों ने याचिका दायर कर चुनौती दी थी।

जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी ने फॉरवर्ड कॉम्पोजिट एविएशन बेस (FCAB) के लिए भूमि अधिग्रहण को सही ठहराया है।

डॉ. जस्टिस नूपुर भाटी ने अपने रिपोर्टेबल फैसले में स्पष्ट कहा कि यह परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों से जुड़ी हुई है तथा इसके लिए भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के अनुरूप की गई है।

बॉर्डर से 40 किलोमीटर दूर

राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब पाकिस्तान से सटे बॉर्डर से केवल 40 किलोमीटर दूर यह एयरबेस बन सकेगा। श्रीगंगानगर जिले में यह दूसरा एयरफोर्स स्टेशन होगा। इससे पहले सूरतगढ़ एयरफोर्स स्टेशन यहां मौजूद है।

नए एयरबेस से युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान के जैकोबाबाद, भोलारी और रहीम यार खान एयरबेस तक फाइटर जेट तेजी से पहुंच सकते हैं।

फॉरवर्ड कॉम्पोज़िट एविएशन बेस (FCAB)

भारत सरकार ने देश की सुरक्षा को मजबूत करने के इरादे से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के तहत फॉरवर्ड कॉम्पोज़िट एविएशन बेस (FCAB) तैयार की थी।

इस योजना के तहत राजस्थान में बेहद महत्वपूर्ण सामरिक ठिकाने तैयार करने हैं।

इस महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की गई, जिसे 59 से अधिक याचिकाकर्ताओं ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी।

किसानों का आरोप

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में यह दावा किया था कि चक 21 एसडीएस, तहसील सादुलशहर स्थित उनकी कृषि भूमि को 130.349 हेक्टेयर निजी भूमि एवं 2.476 हेक्टेयर सरकारी भूमि सहित रक्षा मंत्रालय के अधीन डिफेंस एस्टेट ऑफिसर, बीकानेर सर्किल द्वारा अधिग्रहित किया जा रहा है।

उनका आरोप था कि इस अधिग्रहण से पूर्व सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (SIA) में अनिवार्य जनसुनवाई नहीं हुई और न ही धारा 12 के तहत प्रारंभिक सर्वे किया गया।

याचिका में आरोप लगाया गया कि भूमि अधिग्रहण को लेकर दायर की गई धारा 15 के तहत आपत्तियों का सही तरीके से निस्तारण नहीं किया गया।

याचिका में यह भी कहा गया कि इस मामले में किसानों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) योजना नहीं बनाई गई और जो मुआवजा निर्धारण किया गया, वह धारा 26 व 27 के विपरीत है।

किसानों ने इन बिंदुओं पर प्रारंभिक अधिसूचना (14.11.2023), घोषणा (12.11.2024) और अवॉर्ड (25.07.2025) सहित संपूर्ण अधिग्रहण प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की थी।

केंद्र और राज्य सरकार का पक्ष

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार (रक्षा मंत्रालय) और राजस्थान सरकार की ओर से दलीलें पेश कर बताया गया कि यह परियोजना भारत–पाक सीमा पर वायुसेना की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सरकार ने याचिका में लगाए गए सभी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि SIA अध्ययन विधिवत किया गया और 27 सितंबर 2022 को सार्वजनिक जनसुनवाई आयोजित हुई।

सरकार ने कहा कि विशेषज्ञों की स्वतंत्र बहुविषयक समिति ने परियोजना को राष्ट्रीय हित में आवश्यक माना, जिसके बाद भूमि अधिग्रहण में ₹22 करोड़ से अधिक मुआवजा निर्धारित किया गया।

सरकार ने कहा कि इस मामले में किसी भी प्रभावित परिवार के पुनर्वास की आवश्यकता नहीं पाई गई।

सरकार ने यह भी तर्क दिया कि इतने अंतिम चरण पर न्यायिक हस्तक्षेप से राष्ट्रीय सुरक्षा परियोजना बाधित होगी, जो स्वीकार्य नहीं है।

हाईकोर्ट का आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में बिंदुवार तथ्यों पर अपना फैसला दिया है।

SIA और जनसुनवाई पर कोर्ट की टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि 27 सितंबर 2022 को सार्वजनिक जनसुनवाई आयोजित की गई थी।

समाचार पत्रों में प्रकाशन, फोटोग्राफ्स और बैठक की कार्यवाही से यह प्रमाणित होता है कि प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया।

कोर्ट ने माना कि SIA प्रक्रिया पूरी तरह वैध और पारदर्शी रही।

विशेषज्ञ समिति की भूमिका

हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 7 के तहत गठित स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति ने परियोजना का स्थल निरीक्षण कर यह निष्कर्ष दिया कि FCAB परियोजना जनहित में है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

कोर्ट ने कहा कि भूमि का चयन न्यूनतम आवश्यकता के अनुसार किया गया है और विशेषज्ञ समिति की संस्तुति के बाद परियोजना को चुनौती देना अनुचित है।

प्रारंभिक अधिसूचना समयसीमा के भीतर

याचिकाकर्ताओं का यह तर्क था कि SIA रिपोर्ट समयावधि के कारण लैप्स हो गई, जिसे कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि—

“14 नवंबर 2023 को जारी अधिसूचना, SIA मूल्यांकन के 12 माह की वैधानिक अवधि के भीतर है, अतः इसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता।”

धारा 12 के सर्वे पर

हाईकोर्ट ने कहा कि 20 अगस्त 2024 को संयुक्त सर्वे के लिए नोटिस जारी हुए और 16 अक्टूबर 2024 को सर्वे किया गया।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में प्रारंभिक सर्वे हुआ है और धारा 12 का पूर्ण पालन किया गया है।

आपत्तियों के निस्तारण पर

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता किसानों की आपत्तियों को तहसीलदार, संबंधित विभाग और भूमि अधिग्रहण अधिकारी द्वारा बिंदुवार और कारण सहित निस्तारित किया गया। इसे “यांत्रिक” या मशीनी नहीं कहा जा सकता।

पुनर्वास योजना पर

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना कि इस पूरी प्रक्रिया में कोई आवासीय मकान प्रभावित नहीं हुआ।

किसी की आजीविका समाप्त नहीं हुई है, इसलिए R&R योजना आवश्यक नहीं थी। केवल भूमि अधिग्रहण होने से पुनर्वास स्वतः अनिवार्य नहीं हो जाता।

राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि

हाईकोर्ट ने अपने फैसले के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से में कहा कि—

“व्यक्तिगत अधिकार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों से जुड़ा हो, तब व्यक्तिगत आपत्तियां गौण हो जाती हैं।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को संयम और संतुलन के साथ निर्णय देना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कई सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया और कहा कि अंतिम चरण की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि मुआवजा ही मुख्य राहत है और राष्ट्रीय हित व्यक्तिगत हितों से ऊपर है।

याचिका खारिज, परियोजना को हरी झंडी

जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी ने दोनों पक्षों की दी गई दलीलों और कानूनी बिंदुओं पर लंबी सुनवाई के बाद रिपोर्टेबल जजमेंट में भूमि अधिग्रहण को पूरी तरह वैध ठहराते हुए सभी याचिकाएं खारिज करने का आदेश दिया।

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