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Breaking News: हाईकोर्ट की निगरानी के बीच ‘गुप्त एमओयू’ का खेल उजागर, सांभर झील सोलर प्रोजेक्ट मामले में अफसरों पर अवमानना की कार्रवाई

Rajasthan High Court Cracks Down on Secret MoU During Court Monitoring, Initiates Contempt Action in Sambhar Lake Solar Project Case

जब राजस्थान हाईकोर्ट सांभर झील संरक्षण की मॉनिटरिंग कर रहा था, उसी दौरान अधिकारियों ने चोरी-छिपे सोलर प्रोजेक्ट के लिए एमओयू कर लिया; कोर्ट ने मशीनें जब्त करने और व्यक्तिगत पेशी के आदेश दिए

जयपुर। राजस्थान की पर्यावरणीय धरोहर और अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट ‘सांभर झील’ को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने ऐसा सख्त और ऐतिहासिक रुख अपनाया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर केंद्र व राज्य सरकार से जुड़ी एजेंसियों तक में हलचल मचा दी है।

सोलर पावर प्रोजेक्ट के नाम पर झील क्षेत्र में कथित अवैध गतिविधियों, पेड़ों की कटाई, भारी मशीनों की आवाजाही और अदालत के आदेशों के बावजूद तथ्यों को छिपाने जैसे गंभीर आरोपों पर हाईकोर्ट ने न केवल कड़ा संज्ञान लिया, बल्कि हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड (HSL) के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ स्वप्रेरणा संज्ञान से अवमानना कार्यवाही शुरू करने के आदेश देते हुए समन जारी करने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर गुपचुप तरीके से एमओयू (MoU) करना प्रथम दृष्टया न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है।

कोर्ट ने कहा कि जब मामला न्यायालय के समक्ष लंबित हो और उसकी लगातार निगरानी की जा रही हो, तब इस प्रकार के कदम अस्वीकार्य हैं।

अवमानना की तलवार-कौन-कौन घेरे में?

हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया अवमानना मानते हुए जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है, उनमें हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर कमोडोर (सेवानिवृत्त) कमलेश कुमार, SJVN ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के सीईओ अजय कुमार सिंह और सांभर साल्ट्स लिमिटेड के नए सीईओ हर्ष वर्मा शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 की धारा 12 के तहत कार्रवाई का आधार मानते हुए इन सभी अधिकारियों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला सीधे-सीधे सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2001 के फैसले से जुड़ा है, जिसमें देशभर की रामसर साइट्स और वेटलैंड्स की सुरक्षा को लेकर देशभर के हाईकोर्ट को स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर निगरानी करने के आदेश दिए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना में राजस्थान हाईकोर्ट में भी सुओ मोटो रिट याचिका संख्या 6539/2017 दर्ज हुई, जिसमें सांभर झील के संरक्षण, अतिक्रमण रोकने और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए गए।

कोर्ट ने इस जनहित याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता आर.बी. माथुर को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) यानी न्यायमित्र नियुक्त किया, ताकि मामले की निष्पक्ष निगरानी हो सके और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

सोलर प्लांट की आड़ में खतरा?

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि भारत सरकार की कंपनी हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड (HSL) द्वारा सांभर झील क्षेत्र में बड़े स्तर पर सोलर पावर प्लांट स्थापित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही थीं।

हालांकि कोर्ट ने पहले ही 20 दिसंबर 2021 को अंतरिम आदेश पारित करते हुए साफ कर दिया था कि बिड स्वीकार करने की अंतिम तिथि तक प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन उसके बाद बिना अदालत की अनुमति कोई भी कदम नहीं उठाया जाएगा और न ही बिड खोली जाएगी।

हाईकोर्ट की दो टूक-अनुमति के बिना कोई ठेका नहीं

बाद में 25 जनवरी 2022 को कोर्ट ने अपने आदेश को और स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रित किया जा सकता है।

कोई ठेका या अनुबंध बिना कोर्ट की अनुमति के नहीं दिया जा सकता और EOI खोलने से किसी भी पक्ष के पक्ष में कोई अधिकार उत्पन्न नहीं होगा।

कोर्ट का स्पष्ट उद्देश्य था कि रामसर साइट की पर्यावरणीय सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

चोरी-छिपे एमओयू और कोर्ट से ‘चुप्पी’

इस मामले में बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता आर.बी. माथुर ने कोर्ट के समक्ष बताया कि कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड ने SJVN ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के साथ एमओयू कर लिया।

यह एमओयू 09 अगस्त 2023 को किया गया, जब मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित था और जब कोर्ट लगातार सांभर झील संरक्षण से जुड़े निर्देश जारी कर रहा था।

कोर्ट ने इसे “Surreptitious act” यानी चोरी-छिपे किया गया कृत्य करार देते हुए कहा कि यह अदालत को गुमराह करने का प्रयास है।

मशीनें, जेसीबी और ‘पक्का निर्माण’

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आर.बी. माथुर ने याचिका के साथ पेश की गई फोटोग्राफ्स और वीडियो में भारी मशीनें, जेसीबी, ट्रक, ग्रेवल मिक्स और पक्का निर्माण जैसी गतिविधियां स्पष्ट रूप से दिखाई देने की जानकारी कोर्ट को दी।

कोर्ट ने माना कि संरक्षित सांभर झील क्षेत्र में निर्माण की तैयारी चल रही थी। इस पर कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए एसएचओ, सांभर झील और संबंधित एसपी को आदेश दिए कि वे तुरंत सभी मशीनें हटवाएं, पूरे क्षेत्र की फोटो और वीडियो रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें और वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

4000 मेगावाट की योजना

वरिष्ठ अधिवक्ता आर.बी. माथुर ने अदालत को बताया कि कोर्ट आदेश के बावजूद अदालत की जानकारी में लाए बिना हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड ने एक अन्य कंपनी SJVN ग्रीन एनर्जी लिमिटेड, जो कि SJVN (सतलुज जल विद्युत निगम) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी तथा भारत सरकार की कंपनी है, के साथ सोलर पावर प्रोजेक्ट स्थापित करने हेतु एक समझौता (MoU) किया है।

यहां तक कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 4000 मेगावाट क्षमता का सोलर प्रोजेक्ट प्रस्तावित बताया गया।

अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि यह MoU, SJVN ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (SGEL) को सांभर साल्ट्स लिमिटेड की अविवादित (Encumbrance Free) भूमि, जो सोलर पावर विकास के लिए उपयुक्त है, का उपयोग करने में सक्षम बनाएगा, बशर्ते इसके लिए राजस्थान सरकार एवं भारत सरकार/डीएचआई से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त हों।

अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सांभर साल्ट्स लिमिटेड द्वारा नमक उत्खनन के उद्देश्य से जो भूमि पट्टे पर ली गई है, वह मूलतः सांभर झील क्षेत्र ही है।

हाईकोर्ट की सख्त नाराजगी

न्यायमित्र द्वारा दी गई जानकारी पर हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि जहां एक ओर हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट द्वारा आर्द्रभूमियों की सुरक्षा को लेकर दिए गए आदेशों का पालन सुनिश्चित कर रहा था, वहीं दूसरी ओर हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर कमोडोर कमलेश कुमार (सेवानिवृत्त) द्वारा 09.08.2023 को SJVN ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के सीईओ अजय कुमार सिंह के साथ MoU किया गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि जब उस अवधि के दौरान मामला पहले से ही इस अदालत में लंबित था और लगातार आदेश पारित किए जा रहे थे, फिर भी कोर्ट को MoU के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई।

हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट को गुमराह करने के उद्देश्य से तथा गुप्त रूप से, पहले से MoU में प्रविष्ट हो जाने के तथ्य को छिपाते हुए आवेदन प्रस्तुत किए गए।

कोर्ट की अवमानना

हाईकोर्ट ने इसे कोर्ट की अवमानना मानते हुए तीनों अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया।

राजस्थान हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार को आदेश दिया कि वह स्वतः संज्ञान (Suo Motu) अवमानना याचिका पंजीबद्ध करे तथा तत्पश्चात उक्त अधिकारियों को समन जारी कर अदालत में पेश होने का आदेश दे।

हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि तीनों अधिकारियों को यह स्पष्ट करने हेतु कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए कि उनके विरुद्ध अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 12 के अंतर्गत दंड क्यों न लगाया जाए।

पेड़ों की कटाई और बफर जोन का सवालमामले से जुड़ी एक अन्य याचिका दिनेश कुमावत बनाम भारत संघ में आरोप लगाया गया कि वन क्षेत्र और बफर जोन में अवैध पेड़ कटाई हो रही है। यह क्षेत्र सांभर झील की पारिस्थितिकी के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है।

कोर्ट ने इस याचिका को भी मुख्य सुओ मोटो मामले के साथ टैग करते हुए गंभीरता से सुना।

राज्य और केंद्र को भी चेतावनी

इस मामले में SJVN औपचारिक पक्षकार नहीं है, इसके बावजूद कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को चेतावनी दी है।

कोर्ट ने कहा कि—
“जब यह एक भारत सरकार की कंपनी है और कोर्ट पहले ही आदेश पारित कर चुका है, तब एमओयू की जानकारी कोर्ट को देना अनिवार्य था।”

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल राजेंद्र प्रसाद और केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भारत व्यास ने पक्ष रखा।

अंतरिम आदेश जारी

राजस्थान हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2025 के अंतरिम आदेश जारी रहने का आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि 11 फरवरी तक सब कुछ फ्रीज़ रहेगा।

इस दौरान इस साइट पर कोई भी निर्माण, सोलर प्रोजेक्ट या भूमि उपयोग परिवर्तन कोर्ट की अनुमति बिना नहीं होगा।

मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी 2026 को होगी।

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