हाईकोर्ट ने कहा कि जर्जर स्कूल भवनों में बच्चों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, कोर्ट में पेश किया अखबार
जयपुर। प्रदेश में सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत और उससे जुड़े गंभीर खतरों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने कोर्ट आदेश के बाद भी जर्जर स्कूल संचालित होने के मामले में राज्य के शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं.
इसके साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के निदेशक माध्यमिक शिक्षा और निदेशक प्राथमिक शिक्षा को भी कोर्ट में पेश होकर स्पष्टीकरण पेश करने के आदेश दिए हैं.
जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की विशेष खंडपीठ ने स्वप्रेणा से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया हैं.
बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने स्पष्ट किया है कि जर्जर स्कूल भवनों का उपयोग न केवल अदालत के आदेशों की अवहेलना है, बल्कि यह छात्रों के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।
स्वप्रेणा से लिया था प्रसंज्ञान
जुलाई 2025 में झालावाड़ जिले में स्कूल भवन गिरने से सात विद्यार्थियों की मौत और कई के घायल होने की दुखद घटना के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वप्रेणा प्रसंज्ञान लिया था.
अखबार की रिपोर्ट पेश
मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायमित्र ने 14 जनवरी 2026 के दैनिक भास्कर अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि बूंदी जिले के भैंसखेड़ा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत अचानक गिर गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि सौभाग्य से विद्यालय में मौजूद लगभग 30 छात्र कुछ ही मिनट पहले वहां से निकलकर खुले मैदान में बैठ गए थे, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर कर दिया।
अदालत के आदेशों की अवहेलना
न्यायमित्र ने अखबार की रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि 22 अगस्त 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेश के तहत राज्य सरकार को जर्जर स्कूल भवनों/कमरों के उपयोग से रोका गया था।
राज्य की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया था कि आदेश का अक्षरशः पालन किया जा रहा है।
इसके बावजूद भैंसखेड़ा स्कूल की घटना ने यह साबित कर दिया कि आदेशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
हलफनामा नहीं, जवाब नहीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले में नाराजगी जताते हुए कहा कि 6 नवंबर 2025 को दिए गए निर्देश के बावजूद मामले में प्रतिवादी द्वारा अब तक हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल हलफनामा दाखिल करने का समय बढ़ाने के लिए 1 दिसंबर 2025 को आवेदन भी किया गया, लेकिन उसके बाद भी न तो हलफनामा प्रस्तुत किया गया और न ही देरी का कोई संतोषजनक कारण बताया गया।
देना होगा स्पष्टीकरण
राजस्थान हाईकोर्ट ने अब इस मामले में राज्य के शिक्षा सचिव को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
हलफनामे में यह स्पष्ट करना होगा कि भैंसखेड़ा स्कूल की छत किन परिस्थितियों में गिरी और न्यायालय के रोक आदेश के बावजूद उस भवन का उपयोग क्यों किया जा रहा था। इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षा निदेशक और प्राथमिक शिक्षा निदेशक को भी अगली तारीख पर उपस्थित रहने के आदेश दिए गए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी 2026 को तय की गई है।