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Rajasthan Highcourt का अहम फैसला: ACP केवल एक वित्तीय लाभ है, इसे वास्तविक पदोन्नति नहीं माना जा सकता

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Rajasthan Highcourt नियम 4-A में वे अधिकारी भी पात्र होंगे जो Judicial Assistant के समकक्ष या उससे उच्च वेतन स्तर (Pay Level) के पद पर कार्यरत हैं.

जयपुर, 4 नवंबर 2025

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट सहित प्रदेश की अन्य न्यायिक सेवाओं के कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने कर्मचारियों की पदोन्नति के मामले में फैसला देते हुए स्पष्ट किया है कि “एसीपी केवल एक वित्तीय लाभ है, इसे वास्तविक पदोन्नति नहीं माना जा सकता।”

हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक कर्मचारी को विधिवत रूप से उच्च पद पर पदोन्नत नहीं किया जाता, तब तक वह उस पद के समकक्ष नहीं माना जा सकता।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने यह आदेश जय सिंह व अन्य बनाम राजस्थान हाईकोर्ट के मामले में दिया है.

सभी अधिकारी पात्र, जब..

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट के Assistant Stamp Reporter और Court Fee Examiner पदों पर पदोन्नति को लेकर दायर याचिका में फैसला सुनाते हुए कहा हैं कि सभी कर्मचारी इन पदों के लिए स्वतः पात्र नहीं माने जा सकते, बल्कि उनके पद और सेवा स्थिति के आधार पर पात्रता तय होगी.

हाईकोर्ट ने Rajasthan High Court Staff Service Rules, 2002 के नियम 4-A का हवाला देते हुए पदोन्नति पात्रता से जुड़ी महत्वपूर्ण व्याख्या की हैं.

हाईकोर्ट ने कहा कि Assistant Stamp Reporter और Court Fee Examiner पदों पर पदोन्नति के लिए केवल Part-I Ministerial Staff Cadre के सदस्य ही नहीं, बल्कि वे अधिकारी भी पात्र होंगे जो Judicial Assistant के समकक्ष या उससे उच्च वेतन स्तर (Pay Level) के पद पर कार्यरत हैं.

हाईकोर्ट ने 7 याचिकाकर्ताओं में से 6 याचिकाकर्ता को जो Library Restorer हैं, को पदोन्नति के लिए अयोग्य माना है.

उच्च पद का दर्जा नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि उन्हें केवल ACP लाभ (Assured Career Progression) प्रदान किया गया था, जो वास्तविक पदोन्नति नहीं मानी जाती.

इसलिए उन्हें Judicial Assistant के समकक्ष या उच्च पद का दर्जा प्राप्त नहीं है, अतः वे Assistant Stamp Reporter या Court Fee Examiner पदों पर पदोन्नति हेतु पात्र नहीं हैं.

याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ता सात कर्मचारी राजस्थान हाईकोर्ट के लाइब्रेरी रेस्टोरर पद पर कार्यरत हैं और असिस्टेंट स्टाम्प रिपोर्टर एवं कोर्ट फीस एग्जामिनर के पद पर प्रमोशन के लिए पात्रता मांग रहे थे।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता त्रिभुवन नारायण सिंह ने पैरवी करते हुए अदालत से कहा कि सभी याचिकाकर्ता लंबे समय से न्यायिक प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा हैं और उन्हें सेवा अनुभव के आधार पर पदोन्नति का अवसर दिया जाना चाहिए.

उन्हें पहला एसीपी मिलने के बाद उनका वेतन स्तर (Pay Level-08) न्यायिक सहायक (Judicial Assistant) के समान हो गया है, इसलिए उन्हें भी प्रमोशन के लिए योग्य माना जाए।

हाईकोर्ट प्रशासन का जवाब

याचिका का विरोध करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से कहा गया कि यह पदोन्नति राजस्थान हाईकोर्ट स्टाफ सर्विस रूल्स, 2002 के तहत केवल मंत्रालयिक स्टाफ (Ministerial Staff) के लिए है।

लाइब्रेरी रेस्टोरर, जो पार्ट-IV (लाइब्रेरी स्टाफ) कैडर में आते हैं, उन्हें पार्ट-I (मंत्रालयिक स्टाफ) के पदों के लिए पात्र नहीं माना जा सकता।

साथ ही यह भी कहा गया कि एसीपी केवल वित्तीय लाभ है, वास्तविक पदोन्नति नहीं। इसलिए ऐसे कर्मचारी को “ज्यूडिशियल असिस्टेंट” के समकक्ष नहीं माना जा सकता।

दलील खारिज

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलील को खारिज करते हुए कहा कि एसीपी केवल एक वित्तीय लाभ है

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि क्लॉज (4-A) के अनुसार, प्रमोशन केवल उन्हीं अधिकारियों को मिल सकता है जो न्यायिक सहायक या समकक्ष ग्रेड पर वास्तविक रूप से कार्यरत हैं।

इस प्रकार, लाइब्रेरी रेस्टोरर्स, जिन्हें केवल एसीपी लाभ मिला था, इस प्रमोशन के लिए पात्र नहीं होंगे।

एक याचिकाकर्ता का अलग मामला

हालांकि हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता गायत्री शर्मा के मामले में अलग दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि वह पहले से कैटलॉगर-कम-क्लासिफायर पद पर नियमित रूप से पदोन्नत हो चुकी थीं और Pay Level-08 पर कार्यरत थीं।

हाईकोर्ट ने माना कि वह वास्तविक रूप से समकक्ष ग्रेड पर हैं, परंतु चूंकि वह परिवीक्षा अवधि (probation) पर थीं,

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता Gayatri Sharma के मामले में स्थिती स्पष्ट करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता Cataloguer-cum-Classifier के पद पर कार्यरत हैं और अभी परिवीक्षा अवधि (Probation Period) में हैं.

हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक प्रोबेशन पीरियड पूर्ण नहीं होता और नियुक्ति की पुष्टि (Confirmation) नहीं हो जाती, तब तक उन्हें पदोन्नति के लिए विचार नहीं किया जा सकता.

कोर्ट ने कहा कि प्रोबेशन पीरियड पूर्ण होने और पुष्टि होने के बाद वे इस पदोन्नति के लिए पात्र मानी जाएंगी.

हाईकोर्ट ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में यह स्पष्ट किया कि केवल ACP (Assured Career Progression) का लाभ पाने वाले कर्मचारी को वास्तविक पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सकता और ऐसे कर्मचारी आगे की पदोन्नति के पात्र नहीं माने जाएंगे।

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