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राज्य के खिलाड़ियों को RAJASTHAN HIGHCOURT से बड़ी राहत : हाईकोर्ट ने तय कि आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्सपर्सन कोटा में पाँच-स्तरीय जांच प्रक्रिया, नर्सिंग ऑफिसर अभ्यर्थियों के मामलों पर पुनर्विचार के आदेश

Rajasthan High Court Directs Fair Review of Outstanding Sportsperson Claims in Nursing Officer Recruitment 2023

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2023 में आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्स पर्सन (Outstanding Sportsperson) श्रेणी से जुड़े एक बड़े और महत्वपूर्ण विवाद पर अहम फैसला सुनाया है।

जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि खेल कोटे के अंतर्गत अभ्यर्थियों के दावों को मशीनी ढंग से खारिज नहीं किया जा सकता, बल्कि राज्य सरकार की नीति और नियमों के अनुसार प्रत्येक मामले की गहन और न्यायसंगत जांच अनिवार्य है।

एकलपीठ ने इस संबंध में दायर करीब दो दर्जन से अधिक रिट याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए राज्य सरकार, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और संबंधित चयन एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे खेल प्रमाणपत्रों की वैधता, आयोजन संस्था की मान्यता और अभ्यर्थी की भागीदारी के स्तर की समुचित समीक्षा करें।

हाईकोर्ट के इस फैसले से उन खिलाड़ियों को बड़ी राहत मिली है, जिन्होंने वर्षों की मेहनत से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, लेकिन कागजी प्रक्रियाओं और मान्यता विवादों के कारण नौकरी से वंचित रह गए थे।

क्या है पूरा मामला

राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2023 के तहत कई अभ्यर्थियों ने स्वयं को आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्स पर्सन बताते हुए चयन का दावा किया था।

इन अभ्यर्थियों ने विभिन्न राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य स्तरीय, अंतर-विश्वविद्यालय और स्कूल स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी के प्रमाणपत्र पेश किए।

लेकिन चयन प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के खेल प्रमाणपत्र यह कहकर अस्वीकार कर दिए गए कि संबंधित खेल संघ या प्रतियोगिता भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) या राज्य की अधिसूचित खेल नीति के अंतर्गत मान्यता प्राप्त नहीं है।

सरकार के इस निर्णय को प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की।

याचिका में आरोप लगाया गया कि उनसे कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को खेल कोटे में नियुक्ति दे दी गई, जबकि उनके वैध प्रमाणपत्रों की सही तरीके से जांच तक नहीं की गई।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियां

जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्स पर्सन श्रेणी के दावों की जांच करते समय केवल तकनीकी आधार पर आवेदन खारिज करना उचित नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती एजेंसी को यह देखना होगा कि—

अभ्यर्थी ने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य, स्कूल या विश्वविद्यालय स्तर में से किस स्तर की प्रतियोगिता में भाग लिया है।

यह भी कि प्रतियोगिता किस खेल संस्था या संघ द्वारा आयोजित की गई थी तथा वह संस्था राज्य सरकार की खेल नीति या 27 मई 2022 को जारी कार्मिक विभाग (DOP) के परिपत्र के अनुसार मान्यता प्राप्त है या नहीं।

और अभ्यर्थी का प्रदर्शन और वास्तविक भागीदारी क्या रही है।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी खेल संघ की मान्यता को लेकर संदेह है, तो संबंधित विभाग को उसकी जांच करनी चाहिए, न कि सीधे अभ्यर्थी के दावे को खारिज कर देना चाहिए।

मेरिट के आधार पर दी जाएगी नियुक्ति

हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ताओं को चार सप्ताह के भीतर संबंधित विभाग के समक्ष विस्तृत Representation देने की छूट दी है।

साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए हैं कि वह प्रत्येक अभ्यर्थी के खेल प्रमाणपत्र, प्रतियोगिता और आयोजन संस्था की मान्यता की जांच राज्य की नीति के अनुरूप करे।

यदि किसी अभ्यर्थी का दावा सही पाया जाता है, तो उसे मेरिट के आधार पर आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्स पर्सन श्रेणी में विचार कर नियुक्ति दी जाएगी।

किसी भी दावे को खारिज करने की स्थिति में संबंधित प्राधिकारी को कारण सहित लिखित और स्पष्ट आदेश पारित करना होगा।

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