टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

आनंदपाल सिंह एनकाउंटर : मालासर हिंसा मामले में ट्रायल कोर्ट का चार्ज आदेश सही, Highcourt ने हस्तक्षेप से किया इंकार

Justice Chandra Shekhar Sharma

जोधपुर, 24 अक्टूबर।

जुलाई 2017 में नागौर के मालासर में आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर के बाद हुई हिंसा के मामले में Rajasthan Highcourt ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

Rajasthan Highcourt ने मालासर में हुई हिंसा में अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को सही मानते हुए चार्ज आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।

जस्टिस चन्द्रशेखर शर्मा की एकल पीठ ने आरोपी रणजीत सिंह गेडिया की ओर से दायर आपराधिक निगरानी याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया है।

निगरानी याचिका के जरिए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय, जोधपुर महानगर के 8 अगस्त 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी।

जिला अदालत ने आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 109 सहपठित धारा 147, 148, 283, 307, 325, 326, 332, 342, 353, 354, 397, 435 एवं सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 3/5 के तहत आरोप तय किए थे।

याचिकाकर्ता का पक्ष

याचिकाकर्ता रणजीत सिंह गेडिया की ओर से अधिवक्ता धीरेन्द्र सिंह और प्रियंका बोराणा ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि इस मामले में संपूर्ण कार्यवाही राजनीतिक प्रेरणा से की गई है और याचिकाकर्ता घटनास्थल पर मौजूद भी नहीं थे।

अधिवक्ताओं ने कहा कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, तथा निचली अदालत ने बिना ठोस आधार के आरोप तय किए हैं।

CBI की दलील

CBI की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता श्याम सुंदर लादरेचा ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि निचली अदालत ने सभी तथ्यों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करते हुए उचित आदेश पारित किया है।

सीबीआई ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा याचिकाकर्ता के विरुद्ध आरोप तय करने का आदेश विधिसंगत है, क्योंकि इस चरण पर विस्तृत विश्लेषण या गहन जांच (roving inquiry) की आवश्यकता नहीं होती।

हाईकोर्ट का आदेश

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद Rajasthan Highcourt ने जिला अदालत द्वारा आरोप तय करने के आदेश को सही ठहराया और निगरानी याचिका को खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह विधि का स्थापित सिद्धांत है कि आरोप तय करने के चरण पर, यदि उपलब्ध साक्ष्यों से ऐसा गंभीर संदेह उत्पन्न होता है जिससे न्यायालय यह मानने लगे कि अभियुक्त द्वारा अपराध किए जाने की प्राथमिक संभावना (prima facie case) है, तो अदालत को ट्रायल की कार्यवाही आगे बढ़ानी चाहिए।

Rajasthan Highcourt ने कहा कि यदि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री यह स्पष्ट संकेत देती है कि आरोप तय किए जाने योग्य हैं, तो अदालत आरोप तय कर सकती है और आरोपी को ट्रायल का सामना करना होगा।

Rajasthan Highcourt ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट को इस स्तर पर यह विचार करने की आवश्यकता नहीं है कि क्या आरोपी के दोषसिद्ध होने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है या यह कि ट्रायल निश्चित रूप से दोषसिद्धि पर समाप्त होगा।

Rajasthan Highcourt ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अभियोजन द्वारा पेश किए गए गवाहों के आधार पर यदि गंभीर संदेह उत्पन्न होता है, तो आरोप तय करना उचित है।

इस मामले में सभी प्रमुख गवाहों शंभू सिंह, इन्द्रराज मेरटिया, परेश देशमुख, राकेश मीणा और मालिनी अग्रवाल — के बयानों में आरोपी का नाम स्पष्ट रूप से शामिल किया गया था।

यह है मामला

24 जून 2017 को गांव मालासर, थाना रतनगढ़, जिला चुरू में पुलिस ने आनंदपाल सिंह का एनकाउंटर किया था।

शव का अंतिम संस्कार कराने को लेकर पुलिस ने आनंदपाल के परिजनों को नोटिस भेजा था, लेकिन परिजनों ने नोटिस स्वीकार नहीं किए और मृतक का शव लेने से भी इनकार कर दिया

1 जुलाई 2017 को शव परिजनों को सौंपा गया, किंतु उन्होंने दाह संस्कार करने के बजाय प्रशासन के विरुद्ध आंदोलन शुरू कर दिया।

बाद में स्वर्गीय लोकेन्द्र सिंह कालवी की मध्यस्थता में एक समिति बनाई गई, लेकिन मामला समझौते के बजाय प्रशासन के विरोध में बड़े आंदोलन की घोषणा के साथ बढ़ गया।

12 जुलाई 2017 को हुई सभा के दौरान भीड़ ने पुलिस कर्मियों पर हमला करते हुए कई वाहनों में आग लगा दी और हथियार लूट लिए।

SP परेश देशमुख और अन्य अधिकारियों पर भी हमला हुआ। ए.के.-47 राइफल, पिस्तौलें और अन्य हथियार लूट लिए गए। बाद में कई पुलिसकर्मी घायल पाए गए और सरकारी जीप जला दी गई।

इस मामले में मालासर एसएचओ ने 13 जुलाई 2017 को जसवंतगढ़ थाने में राजमार्ग जाम करने, पुलिस पर हमला करने, हथियार लूटने सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कराया था.

सबसे अधिक लोकप्रिय