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राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण के खाली पद एक हफ्ते में भरें: राजस्थान हाईकोर्ट का सरकार को अल्टीमेटम, नहीं तो कार्मिक सचिव होंगे पेश

Rajasthan High Court Seeks Complete Details on Dravyavati River Encroachments and Pending Cases

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण (रेट) में अध्यक्ष और सदस्यों के खाली पदों को लेकर राज्य सरकार पर कड़ा रुख अपनाया है।

हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सरकार को एक सप्ताह के अंदर सभी रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने का आदेश दिया है।

साथ ही साफ कर दिया कि यदि तय समय में नियुक्तियां नहीं हुईं तो कार्मिक सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देना होगा।

जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

हाईकोर्ट के सामने बताया गया कि अधिकरण में लंबे समय से अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली होने की वजह से 1300 से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों की अपीलों पर सुनवाई अटकी हुई है।

इनमें तबादले, पदोन्नति, वरिष्ठता, पेंशन और अन्य सेवा संबंधी विवाद शामिल हैं। नियमित नियुक्तियां नहीं होने से इन मामलों का समय पर निपटारा नहीं हो पा रहा है।

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अध्यक्ष का पद मार्च से खाली

यह जनहित याचिका अधिवक्ता दिलीप कुरका और अन्य की ओर से दायर की गई है।

याचिका में कहा गया कि राजस्थान सरकार के कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों की सुनवाई के लिए राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण का गठन किया गया है।

नियमों के मुताबिक इसमें एक अध्यक्ष और कम से कम दो सदस्य होना जरूरी है।

याचिका में बताया गया कि अधिकरण में नियमित अध्यक्ष का पद मार्च से खाली है। अंतिम नियमित अध्यक्ष विकास सीताराम भाले के तबादले के बाद एक सदस्य को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है।

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1300 से ज्यादा अपीलें लंबित

याचिका के बताया गया कि अधिकरण में प्रभावी रूप से केवल एक न्यायिक सदस्य ही कार्यरत हैं।

जब वे अवकाश पर रहते हैं या किसी कारण से सुनवाई नहीं कर पाते, तो अधिकरण का कामकाज लगभग ठप हो जाता है जिससे मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है।

इसी वजह से 1300 से अधिक सरकारी कर्मचारियों की अपीलें लंबित हैं। इनमें कर्मचारियों के तबादले, पदोन्नति, वरिष्ठता, पेंशन और अन्य सेवा संबंधी विवाद शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि अधिकरण के खाली पद भरने के लिए राज्य सरकार से कई बार नियुक्तियां करने की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जब लंबे समय तक कोई फैसला नहीं हुआ, तब जनहित याचिका दायर की गई।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से अधिकरण में नियमित नियुक्तियां कराने का निर्देश देने की मांग की, ताकि लंबित मामलों की सुनवाई फिर से नियमित हो सके।

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हाईकोर्ट का निर्देश

हाईकोर्ट ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना है।

सुनवाई के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर अधिकरण के सभी रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि तय समय के भीतर नियुक्तियां नहीं हुईं, तो कार्मिक सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर देरी का कारण बताना होगा।

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