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NEET-PG एडमिशन सिस्टम की होगी पूरी जांच: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- 12 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी बनी, 8 हफ्ते में देगी रिपोर्ट

12-Member Expert Committee to Audit NEET-PG Admission System, Centre Tells Supreme Court

नई दिल्ली: NEET-PG एडमिशन सिस्टम की पूरी जांच अब 12 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी करेगी।

सुप्रीम कोर्ट में NEET-PG 2025 की कटऑफ घटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई।

सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने बताया कि कोर्ट के पहले के निर्देशों के बाद इसके लिए 12 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी का गठन कर दिया गया है।

यह समिति नीट-पीजी एडमिशन सिस्टम की पूरी समीक्षा करेगी, मौजूदा प्रवेश व्यवस्था का पूरा ऑडिट करेगी, सिस्टम की खामियों की पहचान करेगी और उन्हें दूर करने के लिए व्यवहारिक सुझाव देगी।

सुप्रीम कोर्ट ने समिति को सभी संबंधित पक्षों से सुझाव लेकर 8 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के सामने केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 12 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी का गठन कर दिया है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने समिति को सभी संबंधित पक्षों से सुझाव लेने और 8 सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद मामले की आगे सुनवाई की जाएगी।

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पूरा मामला क्या है?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में NEET-PG 2025 की कटऑफ घटाने के फैसले को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 13 जनवरी को जारी अधिसूचना के जरिए न्यूनतम क्वालिफाइंग कटऑफ में भारी बदलाव किया।

नई व्यवस्था के तहत सामान्य वर्ग के लिए कटऑफ स्कोर 276 से घटाकर 103 कर दिया गया। वहीं, एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए भी पहले के मुकाबले काफी कम अंक पर उम्मीदवारों को पात्र घोषित किया गया।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस फैसले से ऐसे उम्मीदवार भी स्नातकोत्तर मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के योग्य हो जाएंगे, जो पहले तय न्यूनतम मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे थे।

उनका तर्क है कि इससे मेडिकल शिक्षा में मेरिट आधारित प्रवेश व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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कटऑफ घटाने पर विवाद क्यों?

याचिकाओं में कहा गया है कि स्नातकोत्तर मेडिकल शिक्षा में न्यूनतम योग्यता का स्तर इस तरह कम करना मनमाना है और इससे मेरिट आधारित प्रवेश व्यवस्था प्रभावित होती है।

याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि यदि न्यूनतम मानकों से समझौता किया गया तो इसका असर केवल मेडिकल शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि NEET-PG कटऑफ घटाने का फैसला गंभीर मुद्दा है और इसकी न्यायिक समीक्षा जरूरी है।

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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने क्या बताया

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसके पहले के निर्देशों के बाद 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन कर दिया गया है।

यह समिति NEET-PG की मौजूदा प्रवेश व्यवस्था की पूरी जांच करेगी और इसमें मौजूद कमियों की पहचान करेगी।

केंद्र सरकार ने बताया कि समिति सभी संबंधित पक्षों से सुझाव लेने के बाद ऐसी सिफारिशें तैयार करेगी, जिन्हें व्यवहार में लागू किया जा सके।

इसका इसका प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, भरोसेमंद और प्रभावी बनाना है।

12 सदस्यीय समिति क्या करेगी?

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति NEET-PG एडमिशन सिस्टम की पूरी पड़ताल करेगी।

इसके लिए मेडिकल संस्थानों, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे।

समिति यह पता लगाएगी कि मौजूदा प्रवेश प्रक्रिया में कहां दिक्कतें हैं और उन्हें दूर करने के लिए क्या बदलाव किए जा सकते हैं।

इसके आधार पर वह ऐसी सिफारिशें तैयार करेगी, जिन्हें व्यवहार में आसानी से लागू किया जा सके।

सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने पूछा कि पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगेगा और यह प्रक्रिया कब तक पूरी होगी, तब केंद्र सरकार ने बताया कि सुझाव लेने और रिपोर्ट तैयार करने में करीब 8 सप्ताह का समय लगेगा।

इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करेगी।

समिति में कौन-कौन शामिल

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह समिति डीजीएचएस के डी. लोवनीश जी. कृष्णा की अध्यक्षता में काम करेगी।

इसके सदस्य सचिव डॉ. प्रवीण कुमार दास होंगे।

समिति में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी), नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए), नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस (एनबीई) और स्वास्थ्य मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद ने पूछा कि क्या इस मामले में किसी एमिकस क्यूरी की नियुक्ति की जाएगी।

इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह पहले से ही इस मामले में एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त हैं।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति को सभी संबंधित पक्षों से सुझाव लेने और 8 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

अब समिति की रिपोर्ट आने के बाद सुप्रीम कोर्ट मामले की आगे सुनवाई करेगा।

उसी रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट यह देखेगा कि मौजूदा NEET-PG एडमिशन सिस्टम में किन बदलावों की जरूरत है और कटऑफ घटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आगे क्या आदेश दिया जाना चाहिए।

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