टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

सुप्रीम कोर्ट में गूंजा गोपालपुरा मेन रोड पर अवैध कोचिंग का मुद्दा, JDA से पूछा-350 करोड़ खर्च कर बनाए कोचिंग हब का क्या हुआ?

Supreme Court Seeks Response on Plea Alleging Medical Data Leak of 1.5 Lakh People

10-बी स्कीम विकास समिति की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, अनधिकृत कोचिंग संस्थानों को डेडिकेटेड कोचिंग हब में शिफ्ट करने की मांग; JDA को नोटिस

नई दिल्ली। जयपुर के गोपालपुरा मेन रोड पर संचालित हो रहे अनधिकृत कोचिंग संस्थानों का मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।

10-बी स्कीम विकास समिति की ओर से याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष गोपालपुरा मेन रोड पर चल रहे कोचिंग संस्थानों, मास्टर प्लान के विपरीत गतिविधियों और स्थानीय निवासियों को हो रही परेशानियों का मुद्दा उठाया गया।

समिति की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ ​अधिवक्ता आर डी रस्तोगी पेश हुए.

वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि गोपालपुरा मेन रोड पर बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं, जबकि इनका संचालन निर्धारित भूमि उपयोग और मास्टर प्लान के अनुरूप नहीं है। इसके चलते क्षेत्र में लगातार ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या, भीड़भाड़ और स्थानीय निवासियों को अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

350 करोड़ के कोचिंग हब का इस्तेमाल क्यों नहीं?

सुनवाई के दौरान सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठाया गया कि जब राज्य सरकार ने विद्यार्थियों और कोचिंग संस्थानों के लिए करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से एक डेडिकेटेड कोचिंग हब विकसित किया है, तो फिर गोपालपुरा मेन रोड पर संचालित कोचिंग संस्थानों को वहां शिफ्ट क्यों नहीं किया जा रहा?

समिति की ओर से कोर्ट में यह भी कहा गया कि जिस सुविधा को विशेष रूप से कोचिंग गतिविधियों के लिए विकसित किया गया है, उसका उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य आवंटनों के लिए किए जाने का प्रयास क्यों किया जा रहा है।

वहीं, दूसरी ओर गोपालपुरा मेन रोड पर मास्टर प्लान और निर्धारित भूमि उपयोग के विपरीत संचालित हो रहे कोचिंग संस्थानों को नियमित करने के प्रयासों पर भी सवाल उठाए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने JDA से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई लंबी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने समिति की ओर से रखे गए तर्कों को गंभीरता से सुना।

अदालत ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के अधिवक्ता को बुलाकर मामले पर जवाब देने को कहा और नोटिस जारी किया।

सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि जब सरकार ने इतनी बड़ी राशि खर्च कर कोचिंग हब विकसित किया है, तो उस सुविधा को दूसरे उपयोग के लिए कैसे आवंटित किया जा सकता है।

इसके साथ ही अदालत के समक्ष मास्टर प्लान के विपरीत संचालित हो रही कोचिंग गतिविधियों और इसके कारण स्थानीय निवासियों को हो रही परेशानियों का मुद्दा भी रखा गया।

याचिका में मांग कि गयी कि यदि सरकार ने कोचिंग संस्थानों के लिए विशेष रूप से डेडिकेटेड कोचिंग हब विकसित किया है, तो मास्टर प्लान और निर्धारित नीति के अनुसार गोपालपुरा मेन रोड पर संचालित अनधिकृत कोचिंग संस्थानों को वहां शिफ्ट किया जाना चाहिए।

इससे एक ओर शहर के मास्टर प्लान और भूमि उपयोग नियमों का पालन सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर गोपालपुरा मेन रोड के निवासियों को ट्रैफिक, पार्किंग, भीड़भाड़ और अन्य नागरिक समस्याओं से राहत मिल सकती है।

सबसे अधिक लोकप्रिय