550 फ्लैटों की परियोजना और करोड़ों के कथित लेन-देन से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट से राहत; जांच में सहयोग और विदेश नहीं जाने की शर्त
जयपुर। एसएनजी ग्रुप के डायरेक्टर सत्यनारायण गुप्ता को राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ से अग्रिम जमानत मिल गई है।
करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन और रियल एस्टेट परियोजना से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने गुप्ता को शर्तों के साथ राहत देते हुए कहा कि मामले की प्रकृति और रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए केवल आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर अग्रिम जमानत आवेदन खारिज करना उचित नहीं होगा।
जस्टिस उमा शंकर व्यास की एकलपीठ ने 12 अगस्त को यह आदेश पारित किया।
मामला जयपुर के कोतवाली थाने में दर्ज वर्ष 2019 की एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 406 के तहत आरोप लगाए गए थे।
इससे पहले सत्यनारायण गुप्ता से जुड़े मामलों की सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट में लंबे समय तक चर्चा का विषय रही थी।
गुप्ता की एफआईआर रद्द करने और जमानत से जुड़ी याचिकाओं में पांच न्यायाधीश अलग-अलग मामलों में सुनवाई से स्वयं को अलग कर चुके थे, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और प्रशासनिक निर्णय के बाद एक जमानत याचिका को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की विशेष एकलपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था।
550 फ्लैट का प्रोजेक्ट और भूमि विवाद से जुड़ा मामला
हाईकोर्ट के समक्ष दायर याचिकाओं में पेश किए गए तथ्यों के अनुसार, विवाद एक भूमि पर रियल एस्टेट परियोजना और करीब 550 फ्लैटों के निर्माण से संबंधित है।
आदेश में Star Valley Real Estate Pvt. Ltd. का उल्लेख है। मामले में दोनों पक्षों के बीच वर्ष 2017 में करार होने और फ्लैट बुकिंग के माध्यम से राशि प्राप्त होने का भी हवाला दिया गया हैं.
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि विवाद मूल रूप से व्यावसायिक और दीवानी प्रकृति का है तथा दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विभिन्न लेन-देन और समझौते रहे हैं।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी की गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है और वह जांच में सहयोग करने को तैयार है।
परिवादी ने लगाए करोड़ों की राशि के गबन के आरोप
वहीं, परिवादी पक्ष ने गुप्ता की अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि फ्लैट खरीदारों से प्राप्त बड़ी राशि का उचित हिसाब नहीं दिया गया और वित्तीय अनियमितताएं की गईं।
अदालत के आदेश में आरोपी के व्यक्तिगत खाते में करीब 5.67 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर किए जाने से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख है।
परिवादी पक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि मामले में बड़ी संख्या में फ्लैट खरीदारों की राशि और हित जुड़े हुए हैं।
हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत पर विचार करते समय मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की जा रही है।
पहले नकारात्मक अंतिम रिपोर्ट, फिर शुरू हुई आगे की जांच
मामले की जांच के संबंध में अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि पुलिस ने एक चरण में आरोप प्रमाणित नहीं मानते हुए नकारात्मक अंतिम रिपोर्ट पेश की थी।
बाद में आगे की जांच के आदेश के बाद पुनः अनुसंधान शुरू किया गया और गिरफ्तारी की आशंका के चलते अग्रिम जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया।
हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से विवाद सुलझाने के प्रयास हुए थे।
समझौते में राशि का भुगतान नहीं होने की स्थिति में वसूली की कार्रवाई का उल्लेख भी किया गया था।
5 जजों के ‘एक्सेप्शन’ के बाद विशेष पीठ तक पहुंचा था मामला
सत्यनारायण गुप्ता के खिलाफ जयपुर के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज मामलों को लेकर हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने और जमानत से संबंधित अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं।
इन मामलों में अब तक पांच न्यायाधीशों द्वारा सुनवाई से स्वयं को अलग करने की स्थिति सामने आई थी।
एफआईआर रद्द करने की एक याचिका में जस्टिस अनूप कुमार ढंड, आनंद शर्मा और अनिल उपमन सहित न्यायाधीशों द्वारा अलग-अलग तारीखों पर सुनवाई से इनकार किया गया था।
एक अवसर पर मामला दोबारा उसी न्यायाधीश की अदालत में सूचीबद्ध होने पर उन्होंने पुनः इसे अन्य पीठ के समक्ष भेजने के निर्देश दिए थे।
जमानत याचिका में भी दो न्यायाधीशों ने सुनवाई से किया था इनकार
गुप्ता की ओर से दायर एक अन्य जमानत याचिका में भी जस्टिस समीर जैन और जस्टिस भुवन गोयल ने सुनवाई से स्वयं को अलग करते हुए मामले को अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए थे।
बार-बार ‘एक्सेप्शन’ और सुनवाई में आ रही कठिनाइयों के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर 2025 को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रशासनिक आवेदन प्रस्तुत करने की छूट दी थी।
इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्यवाही करते हुए तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की विशेष एकलपीठ गठित की गई थी, जिसके समक्ष गुप्ता की जमानत याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
84 आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड भी रहा चर्चा में
गुप्ता के खिलाफ जयपुर के विभिन्न पुलिस थानों में बड़ी संख्या में आपराधिक मामले दर्ज होने का मुद्दा भी पूर्व की सुनवाइयों में सामने आया था।
रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ 84 आपराधिक मामले दर्ज होने और विद्याधर नगर थाने में हिस्ट्रीशीट खोले जाने का भी हवाला दिया गया था.
हाईकोर्ट के समक्ष वर्तमान अग्रिम जमानत मामले में भी अभियोजन पक्ष ने आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।
लेकिन अदालत ने कहा कि केवल आपराधिक मामलों की संख्या के आधार पर, मामले की अन्य परिस्थितियों पर विचार किए बिना, अग्रिम जमानत से इनकार करना उचित नहीं होगा।
हाईकोर्ट ने एक लाख के मुचलके पर दी राहत
हाईकोर्ट ने सत्यनारायण गुप्ता को एक लाख रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें पेश करने पर अग्रिम जमानत का लाभ देने के निर्देश दिए हैं, यदि उन्हें संबंधित मामले में गिरफ्तार किया जाता है।
जमानत के साथ लगाईं ये शर्तें
हाईकोर्ट ने गुप्ता को जमानत देते हुए पुलिस या जांच अधिकारी द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर जांच में सहयोग करने, मामले के तथ्यों से परिचित किसी व्यक्ति को प्रभावित, प्रलोभित या धमकाने का प्रयास नहीं करने की शर्त लगाई हैं.
साथ ही अदालत की अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ने के आदेश दिए गए हैं.
