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राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर बेंच के लिए 44 अधिवक्ताओं को न्यायमित्र पैनल में मिली जगह

Rajasthan High Court Recommends 44 Advocates for Amicus Curiae Panel at Jaipur Bench for 2026

रेखा जैन, प्रतीक कासलीवाल से लेकर त्रिभुवन नारायण सिंह तक 44 अधिवक्ताओं को पैनल में जगह, मृत्युदंड रेफरेंस मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ताओं की होगी नियुक्ति

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने वर्ष 2026 के लिए अदालतों की सहायता हेतु एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) के रूप में नियुक्ति के लिए अधिवक्ताओं के पैनल की सिफारिश की है

राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार जयपुर बेंच के लिए कुल 44 अधिवक्ताओं के नाम शामिल किए गए हैं।

यह पैनल वर्ष 2026 के दौरान एमिकस क्यूरी की नियुक्ति के लिए अनुशंसित किया गया है।

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, न्यायालय के समक्ष ऐसे मामलों में जहां किसी पक्ष की ओर से प्रभावी कानूनी सहायता की आवश्यकता हो या अदालत को स्वतंत्र कानूनी सहयोग की जरूरत हो, वहीं एमिकस क्यूरी यानी न्यायमित्र नियुक्ति किए जा सकेंगे।

इन 44 अधिवक्ताओं के नाम शामिल

हाईकोर्ट द्वारा जारी सूची में रेखा जैन, मोहम्मद अशफाक खान, शमा खान, अजय सिंह, तनुज गुप्ता, अभिषेक पाराशर, ओम प्रकाश मिश्रा, राहुल अग्रवाल, श्याम कांत शर्मा, गर्वित खंडेलवाल, राज कमल शर्मा, सिद्धार्थ सिंह सामोर, हेम सिंह, उज्मा इलियास, अनिल अग्रवाल, सीमा चौहान, चंद्रिका कुम्पावत, राणावत हरेंद्रपाल सिंह, कांता शर्मा, पीयूष राठौड़, अमित गुप्ता, अरविंद कुमार अरोड़ा, योगेश कुमार शर्मा, सुनील विजय और अतुल शर्मा के नाम शामिल हैं।

एडवोकेट प्रतीक कासलीवाल

इसके साथ ही सूची में प्रांजल व्यास, नीलम चौधरी, राजेंद्र प्रसाद यादव, मनजीत कौर, धर्मेंद्र अग्रवाल, शालिनी जोशी, प्रतीक कासलीवाल, अभिषेक हावर, मनीष कुमार शर्मा, निर्मला सोनी, हिमांशु शर्मा, प्रज्ञा सेठिया, जमिला खान, अनिल कुमार शर्मा, जितेंद्र कुमार शर्मा, वीरेंद्र कुमार अग्रवाल, हिमांशु थोलिया, शुभम कोठारी और त्रिभुवन नारायण सिंह को शामिल किया गया है।

आदेश में कुल 44 अधिवक्ताओं का पैनल वर्ष 2026 के लिए जयपुर बेंच में एमिकस क्यूरी नियुक्ति के उद्देश्य से अनुशंसित किया गया है।

त्रिभुवन नारायण सिंह

मृत्युदंड के मामलों में सीनियर एडवोकेट की होगी नियुक्ति

राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन के आदेश में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले अनोक्खीलाल बनाम मध्य प्रदेश राज्य, (2020) 20 SCC 660 का भी हवाला दिया गया है

आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मानदंडों के पालन में मृत्युदंड की सजा की पुष्टि से संबंधित सभी मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ताओं को न्यायमित्र नियुक्त करने पर पहले विचार किया जाएगा।

केवल सामान्य मामलों में ही हाईकोर्ट के इस पैनल से अधिवक्ताओं की सेवाएं ली जा सकती हैं, वहीं मृत्युदंड की पुष्टि जैसे अत्यंत गंभीर मामलों में अनुभवी और वरिष्ठ कानूनी सहायता को प्राथमिकता देने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा।

गौरतलब है कि एमिकस क्यूरी न्यायालय की सहायता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ऐसे मामलों में जहां न्यायालय को कानूनी प्रश्नों पर विशेष सहायता की आवश्यकता होती है, नियुक्त एमिकस क्यूरी कानून और मामले के विभिन्न पहलुओं पर न्यायालय की सहायता करते हैं।

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