जोधपुर, 30 सितंबर।
Rajasthan High Court ने डिडवाना जिले के निंबी कलां गांव के ग्रामीणों को बड़ी राहत देते हुए पंचायत द्वारा उनके मकानों को तोड़ने और बेदखल करने की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है.
जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता भगवान अग्रवाल एवं अन्य ग्रामीणों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए हैं.
तकनीकी त्रुटि से दर्शाया
अधिवक्ता श्याम पालीवाल ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि निंबी कलां गांव की खसरा संख्या 377 और 378/536 की जमीन पूर्व में एक निजी व्यक्ति के नाम दर्ज थी.
लेकिन तकनीकी त्रुटि के चलते उसे “गैर मुमकिन गोचर भूमि” दर्शा दिया गया.
अधिवक्ता ने कहा कि इसी आधार पर कुछ लोगों ने राजनीतिक द्वेषवश झूठी शिकायतें कीं और प्रशासन ने ग्रामीणों को नोटिस जारी कर दिया.
सरकार को भेजा है प्रस्ताव
याचिका में कहा गया कि ग्राम पंचायत क्षेत्र की आबादी भूमि सीमित है, जिस पर वर्षों से उनके मकान बने हुए हैं। उनके पूर्वज आजादी से पहले से ही इस भूमि पर काबिज रहे हैं और बाद में सक्षम प्राधिकारी से पट्टे भी प्राप्त किए गए.
याचिका में कहा गया कि उक्त भूमि पर सरकारी भवन भी बने हुए हैं। ग्राम पंचायत ने आबादी क्षेत्र के विस्तार के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा हुआ है, जो विचाराधीन है.
हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश
बहस सुनने के बाद Rajasthan High Court ने ग्राम पंचायत और जिला प्रशासन को आदेश दिया हैं कि याचिकाकर्ताओं के मकान न तोड़े जाएं और उन्हें कब्जे से बेदखल न किया जाए.
Rajasthan High Court ने अपने आदेश में कहा कि यदि इस बीच प्रशासन अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करता है तो यह न केवल ग्रामीणों के मौलिक आवास अधिकार का हनन होगा, बल्कि कब्जे के नियमितीकरण के अधिकार में भी बाधा उत्पन्न होगी.