कुचेरा के तेजपाल मिर्धा से शुरू हुआ राहत का सिलसिला, श्रीविजयनगर के सुशील मूंदड़ा और हनुमानगढ़ की मंजू रणवा को भी गिरफ्तारी से संरक्षण; श्रीगंगानगर के संजय मूंदड़ा को भी मिली अंतरिम राहत
जोधपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनावों से ठीक पहले प्रत्याशियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों और गिरफ्तारी की आशंका ने रविवार को कानूनी हलचल तेज कर दी।
सोमवार को विभिन्न नगर निकायों में चेयरमैन और सभापति पद के चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव से ठीक पहले दर्ज मामलों और गिरफ्तारी की आशंका के चलते रविवार को राजस्थान हाईकोर्ट में कई प्रत्याशियों की याचिकाओं पर विशेष और तत्काल सुनवाई हुई।
दिनभर चली सुनवाइयों में आधा दर्जन से अधिक नेताओं और प्रत्याशियों ने हाईकोर्ट से राहत की मांग की, जिनमें कई को अदालत से अंतरिम संरक्षण मिला।
इन मामलों की सुनवाई के लिए जस्टिस कुलदीप माथुर और जस्टिस सुनील बेनीवाल की विशेष अदालतों का भी गठन किया गया है।
रविवार को अवकाश के बावजूद चुनावी तात्कालिकता को देखते हुए हाईकोर्ट में विशेष सुनवाई का सिलसिला चला।
कुचेरा के तेजपाल मिर्धा से शुरू हुई रविवार की विशेष सुनवाई
रविवार को राजस्थान हाईकोर्ट में विशेष सुनवाई की शुरुआत नागौर जिले की कुचेरा नगर पालिका के चेयरमैन पद के उम्मीदवार एवं पूर्व अध्यक्ष तेजपाल मिर्धा की याचिका से हुई।
तेजपाल मिर्धा के खिलाफ हाल ही में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में मामला दर्ज हुआ था। गिरफ्तारी की आशंका के बीच उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया और तत्काल संरक्षण की मांग की।
मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए जस्टिस कुलदीप माथुर की विशेष एकलपीठ के समक्ष रविवार को सुनवाई हुई।
तेजपाल मिर्धा की ओर से अधिवक्ता रामावतार चौधरी एवं सहयोगी अधिवक्ता सुमेर सिंह गौर ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
रविवार को हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने तेजपाल मिर्धा को अंतरिम राहत देते हुए फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।
श्रीविजयनगर के सुशील मिढा को भी राहत
इसी बीच श्रीविजयनगर नगर पालिका के चेयरमैन पद के प्रत्याशी सुशील मिढा ने भी गिरफ्तारी की आशंका को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया।
उनकी ओर से अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी, मुदित नागपाल और निशांत गाबा ने पैरवी करते हुए अदालत के समक्ष तत्काल राहत की मांग रखी।
सुशील मिढा ने खिलाफ एससीएसटी एक्ट में मामला दर्ज होने और गिरफतारी की आशंका जताई
याचिका में दावा किया है कि एफआईआर 21 सितंबर 2026 को होने वाले चेयरमैन चुनाव से ठीक पहले 19 सितंबर को दर्ज कि गयी हैं. जिससे उनकी चुनावी भागीदारी प्रभावित होने की आशंका है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि एफआईआर चुनाव से ठीक पहले दर्ज की गई जबकि कथित घटना 16 सितंबर 2026 की है और शिकायत 19 सितंबर को दर्ज हुई। याचिका में इसे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला घटनाक्रम बताते हुए एफआईआर रद्द करने की मांग की गई है।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सुशील मूंदड़ा को भी अंतरिम राहत प्रदान करते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाई।
हनुमानगढ़ की मंजू रणवा को भी हाईकोर्ट से राहत
हनुमानगढ़ नगर परिषद के चेयरमैन पद के चुनाव को लेकर भी रविवार को हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई हुई।
मंजू रणवा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है। उनके पक्ष की ओर से चुनाव में पर्याप्त पार्षदों के समर्थन का दावा किया गया है।
मंजू रणवा ने भी गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राहत की मांग की।
उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवि भंसाली और अधिवक्ता कुणाल उपाध्याय ने याचिका प्रस्तुत करते हुए रविवार को तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।
मामले में जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए अंतरिम राहत प्रदान की और फिलहाल दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी।
श्रीगंगानगर के संजय मूंदड़ा को भी मिली बड़ी राहत
रविवार की कानूनी हलचल में श्रीगंगानगर नगर परिषद के सभापति पद के उम्मीदवार संजय मूंदड़ा का मामला भी प्रमुख रहा।
संजय मूंदड़ा के खिलाफ लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के एक कथित गुर्गे के जरिए धमकी दिलवाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। गिरफ्तारी की आशंका के बीच उन्होंने रविवार को राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
संजय मूंदड़ा की ओर से अधिवक्ता राजेश परिहार ने शाम करीब 4 बजे याचिका दायर की। मामले की तात्कालिकता को देखते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल के निर्देश पर जस्टिस सुनील बेनीवाल की एकलपीठ के समक्ष रविवार शाम सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने संजय मूंदड़ा को अंतरिम राहत देते हुए 5 अक्टूबर तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। साथ ही उन्हें सोमवार को होने वाले सभापति पद के चुनाव में भाग लेने की अनुमति भी दी गई।
चुनाव से ठीक पहले एफआईआर और गिरफ्तारी की आशंका बनी बड़ा मुद्दा
रविवार को हाईकोर्ट में सामने आए मामलों में एक समान स्थिति यह रही कि निकाय चुनाव से ठीक पहले प्रत्याशियों के खिलाफ मामले दर्ज होने या गिरफ्तारी की आशंका के कारण अदालत से तत्काल संरक्षण की मांग की गई।
कई मामलों में प्रत्याशियों की ओर से दलील दी गई कि गिरफ्तारी की आशंका के कारण वे चुनाव प्रक्रिया में प्रभावी रूप से हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
अदालतों ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए रविवार को विशेष सुनवाई की और अलग-अलग मामलों में अंतरिम राहत प्रदान की।
हालांकि, प्रत्याशियों की ओर से लगाए गए आरोपों और दलीलों पर अंतिम निष्कर्ष इन मामलों की आगे होने वाली न्यायिक कार्यवाही के बाद ही सामने आएगा।
रविवार को खुला हाईकोर्ट, चुनावी माहौल के बीच बढ़ी कानूनी हलचल
आमतौर पर अवकाश के दिन होने वाली अदालत की नियमित कार्यवाही के बजाय रविवार को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनावी तात्कालिकता से जुड़े मामलों की विशेष सुनवाई हुई।
सोमवार को होने वाले चेयरमैन और सभापति पद के चुनाव से ठीक पहले प्रत्याशियों की गिरफ्तारी, एफआईआर और चुनाव में भागीदारी को लेकर हाईकोर्ट में पहुंची याचिकाओं ने राजस्थान के निकाय चुनावों के बीच कानूनी मोर्चे पर भी हलचल बढ़ा दी है।
फिलहाल रविवार की सुनवाइयों के बाद कई प्रत्याशियों को अंतरिम राहत मिल चुकी है, जबकि संबंधित मामलों में आगे की सुनवाई निर्धारित तिथियों पर होगी।
