जोधपुर। हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी स्थित एथनॉल फैक्ट्री में कथित हिंसा और आगजनी की घटना से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने महत्वपूर्ण अंतरिम राहत प्रदान की है।
राजस्थान हाईकोर्ट एथनॉल फैक्ट्री में कथित हिंसा और आगजनी मामले में किसानों के खिलाफ दर्ज दूसरी एफआईआर पर अंतरिम राहत प्रदान करते हुए जांच और आगे की सभी पुलिस कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने प्रथम दृष्टया माना कि समान घटना, समान पक्षकारों और समान तथ्यों के आधार पर दूसरी एफआईआर दर्ज करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग प्रतीत होता है।
एथनॉल फैक्ट्री के विरोध का मामला
मामला हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी थाना क्षेत्र स्थित ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड के कारखाने में 10 नवंबर 2025 को हुई कथित हिंसा और आगजनी से जुड़ा है।
टिब्बी इलाके के राठीखेड़ा गांव में प्रस्तावित एशिया की सबसे बड़ी एथेनॉल फैक्ट्री जोरदार विवाद और हिंसक टकराव का केंद्र बन गई थी.
करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही यह फैक्ट्री, जो सरकार के अनुसार आधुनिक तकनीक से बनेगी और केंद्र सरकार के एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम को सपोर्ट करेगी, लेकिन यह प्रोजेक्ट किसानों के लिए संघर्ष का बड़ा मुद्दा बन गया
आरोप है कि कुछ लोगों ने राजनीतिक उकसावे के बाद अवैध जमावड़ा बनाकर फैक्ट्री परिसर में प्रवेश किया और विभिन्न आपराधिक कृत्य किए।
फैक्ट्री के खिलाफ पिछले कई महीनों से चल रहा विरोध 10 दिसंबर को अचानक भड़क उठा और हालात बेकाबू हो गए. फैक्ट्री की दीवार तोड़ी गई, वाहन जलाए गए, पुलिस-किसान टकराव हुआ और सैकड़ों लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए.
इस घटना के संबंध में पहले 11 दिसंबर 2025 को दोपहर 3:45 बजे एफआईआर संख्या 510/2025 दर्ज की गई थी, जबकि उसी घटना को लेकर 12 दिसंबर 2025 को सुबह 8:11 बजे एफआईआर संख्या 511/2025 भी दर्ज कर ली गई।
याचिका में दलील
याचिकाकर्ता किसान बलजिंदर सिंह ढिल्लों और बलकौर सिंह ढिल्लों की ओर से अधिवक्ता निशांत गाबा ने अदालत में दलील दी कि दोनों एफआईआर में घटना का समय, स्थान, कथित अपराधों की प्रकृति, थाना और पक्षकार सभी समान हैं।
अधिवक्ता ने कहा कि दूसरी एफआईआर दर्ज करना विधि विरुद्ध है और यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसलों—टी.टी. एंटनी बनाम केरल राज्य (2001) तथा अमित अनिल चंद्र शाह बनाम सीबीआई (2013)—का हवाला देते हुए कहा कि एक ही घटना के लिए दो अलग-अलग एफआईआर स्वीकार्य नहीं हैं।
हाईकोर्ट ने बहस सुनने के बाद मामले में कहा कि दोनों एफआईआर में तथ्य, मूल कारण, घटना, घटना-स्थल, अपराधों की प्रकृति, थाना तथा पक्षकार सभी समान हैं और एक ही घटना के लिए दूसरी एफआईआर दर्ज करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा, प्रथम दृष्टया सार्थक प्रतीत होता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी दोहरी कार्यवाही में कानून के दुरुपयोग को रोकने हेतु कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग करती है, और इस संदर्भ में कोर्ट शक्तियों का प्रयोग उचित है।
अंतरिम आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार सहित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की हैं.
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक पुलिस थाना टिब्बी, जिला हनुमानगढ़ में दर्ज एफआईआर संख्या 511/2025 में आगे की समस्त कार्यवाही पर रोक लगा दी हैं.