जयपुर, 6 अक्टूबर
Rajasthan Highcourt की जोधपुर मुख्यपीठ और जयपुर पीठ का क्षेत्राधिकार निर्धारित होने और जिलों का बंटवारा होने के बावजूद, जयपुर पीठ के अधीन जिलों से जुड़ी याचिकाएँ जोधपुर मुख्यपीठ में दायर होने पर हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है।
जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने इस मामले में फोरम शॉपिंग और बेंच हंटिंग की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए याचिकाओं पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
Rajasthan Highcourt ने अपने आदेश में कहा कि जयपुर बेंच के क्षेत्राधिकार के मामलों को बिना उचित कारण जोधपुर मुख्यालय में दाखिल करना अनुचित है और इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है।
जयपुर की जोधपुर में दाखिल
जयपुर पीठ के जिलों भरतपुर, सीकर, जयपुर से जुड़ी याचिकाएँ बिना कोई विशेष कारण जोधपुर मुख्यपीठ में दायर की गईं। इसके साथ ही, इन याचिकाओं के साथ हाथ से लिखी नोट्स और बिना तारीख वाले दस्तावेज भी पेश किए गए।
हाईकोर्ट ने कहा कि कार्यभार और अन्य तकनीकी कारणों से प्रारंभिक चरण में न्यायिक अधिकारियों के लिए इस पर ध्यान देना मुश्किल हो रहा है। जिसके चलते, भौगोलिक क्षेत्राधिकार उल्लंघन के बावजूद याचिकाओं को स्वीकार कर लिया गया और बाद में उन्हें मेनटेनेबिलिटी (Maintainability) के आधार पर चुनौती दी गई।
एकलपीठ ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बेंच हंटिंग और फोरम शॉपिंग की प्रवृत्ति न केवल अनुचित है, बल्कि यह कानून के दुरुपयोग के समान है।
क्षेत्रअधिकार स्पष्ट
Rajasthan Highcourt ने Dhanwantri Institute of Medical Science की याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि जयपुर बेंच में दाखिल याचिका को वापस लेने के बाद उसी याचिका को जोधपुर मुख्यालय में दायर किया गया, जिसके लिए अदालत ने 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। कोर्ट ने कहा कि यह शिक्षण संस्थान के लिए अत्यंत अनुचित और अनुशासनहीन आचरण है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जयपुर बेंच और जोधपुर मुख्यालय के क्षेत्रअधिकार स्पष्ट हैं।
क्षेत्राधिकार का उल्लंघन और याचिकाओं में डमी पार्टियों का प्रयोग न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
मोनिटरिंग की जरूरत
Rajasthan Highcourt ने कहा कि इस तरह की याचिकाएँ पेश करने की प्रवृत्ति पर निगरानी (Monitoring) की जरूरत है।
कोर्ट ने उन याचिकाकर्ताओं पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जिन्होंने जयपुर बेंच के क्षेत्राधिकार होते हुए याचिका जोधपुर में दाखिल की।
साथ ही, इस मामले में राज्य के महाधिवक्ता को न्यायमित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया गया और हाईकोर्ट के न्यायिक रजिस्ट्रार को इस तरह की याचिकाओं का आंकड़ा पेश करने का आदेश दिया गया।